{"_id":"5f42b2738ebc3e3cb75e58ca","slug":"flood-kasganj-news-agr456066470","type":"story","status":"publish","title_hn":"पटियाली के कई गांव की आबादी में भरा है बाढ़ का पानी, नहीं मिल रही निजात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पटियाली के कई गांव की आबादी में भरा है बाढ़ का पानी, नहीं मिल रही निजात
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कासगंज। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। रविवार को भी इसमें पांच सेटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। इससे यह 163.85 पर पहुंच गया है। पटियाली इलाके के 5 गांव की आबादी में बाढ़ का पानी कई दिनों से भरा हुआ है। वहां आवागमन के लिए सात नाव लगाईं गई हैं। इन इलाकों के ग्रामीण बेहद परेशान हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों को अलर्ट करते हुए स्थापित की गईं 14 बाढ़ चौकियों में पहुंचने के निर्देश दिए हैं।
बाढ़ का सर्वाधिक प्रभाव पटियाली तहसील इलाके के पनसोती, मूंझखेड़ा, जिजौल, हिम्मतनगर बझेरा, नगला मुंता में है। यहां 7 नाव ग्रामीणों के आवागमन के लिए लगाई गई हैं। इन गांव के ग्रामीणों को बाढ़ चौकियों पर रहने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन ग्रामीण बाढ़ चौकियों के बजाए गांव में रहना ही पसंद कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे पशु, चारा और घरेलू सामान को कैसे और कहां ले जाएं।
गांव में रहेंगे तो हर चीज पर नजर बनी रहेगी। रविवार को भी गंगा नदी में बांधों से एक लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया है। इससे अभी ग्रामीणों को राहत मिलते नहीं दिख रही है। सोरों के गंगा के तटवती गांव मनकापुर, कादरवाड़ी, बघेला, पुख्ता, घूरनपुर, लहरा में अभी बाढ़ का प्रकोप आबादी तक नहीं है। लेकिन जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए आगामी समय में ये गांव कभी भी बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं।
विज्ञापन
ऐहतियातन इन गांव के लोगों को भी अलर्ट कर दिया गया है। सहवाजपुर-सुन्नगढ़ी मार्ग गंगा के पानी से कट चुका है। यहां तीन दिन पहले पानी कुछ कम हुआ था, लेकिन अब यहां फिर से सड़क पर पानी आ गया है। प्रशासन ने लोक निर्माण विभाग को मरम्मत के निर्देश दिए हैं, लेकिन पानी होने के कारण मरम्मत नहीं हो पा रही है।
पूरे जिले में 25 नाव लगाई गईं
बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए पूरे जिले में 25 नाव लगाईं र्गइं हैं। इसमें 12 नाव पटियाली इलाके में, सोरों इलाके में 6 और सहावर क्षेत्र में 7 नाव संचालित हैं।
पशुओं का शुरू हुआ टीकाकरण
जिलाधिकारी के निर्देश पर बाढ़ प्रभावित इलाकों में पशुओं के टीकाकरण का काम तेज किया गया है। बाढ़ के पानी में लगातार पशुओं के रहने से खुरपका व मुंहपका रोग का खतरा बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य टीमें भी हुईं सक्रिय
पटियाली इलाके में स्वास्थ्य टीमें सक्रिय हुई हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र मूझंखेड़ा में 242 मरीजों का परीक्षण किया गया। इसी तरह से पनसोती व अन्य प्रभावित गांव में टीमें लगातार परीक्षण कर रही हैं। अपर जिलाधिकारी अजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के सभी ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है।
प्रशासन राशन किट की कर रहा तैयारी
बाढ़ प्रभावित इलाकों में जिला प्रशासन ने आपूर्ति विभाग को राशन किट तैयार करके प्रभावित गांव के ग्रामीणों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। आपूर्ति के टेंडर किए जा चुके हैं। राशन किट में एक पैकेट माचिस, मोमबत्ती, बिस्किट, 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, 1 किलो नमक, 2 किलो दाल, 2 किलो चना, हल्दी, मिर्च, धनिया और एक लीटर तेल दिया जाएगा।
जलस्तर का लेखा जोखा
- 94956 क्यूसेक पानी हरिद्वार बैराज से छोड़ा गया।
- 74773 क्यूसेक पानी बिजनौर से छोड़ा गया।
- 169755 क्यूसेक पानी नरौरा से छोड़ा गया।
वर्जन
- गंगा के जलस्तर में 5 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। पटियाली इलाके के गांव में कुछ पानी बढ़ा है। बाढ़ से निपटने के सभी प्रबंध जिला प्रशासन ने निर्धारित कर दिए हैं। अभी स्थिति नियंत्रण में है। हरिद्वार से पानी का दबाव कुछ कम हुआ है। - अजय श्रीवास्तव, एडीएम।
विज्ञापन
बाढ़ का सर्वाधिक प्रभाव पटियाली तहसील इलाके के पनसोती, मूंझखेड़ा, जिजौल, हिम्मतनगर बझेरा, नगला मुंता में है। यहां 7 नाव ग्रामीणों के आवागमन के लिए लगाई गई हैं। इन गांव के ग्रामीणों को बाढ़ चौकियों पर रहने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन ग्रामीण बाढ़ चौकियों के बजाए गांव में रहना ही पसंद कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे पशु, चारा और घरेलू सामान को कैसे और कहां ले जाएं।
विज्ञापन
गांव में रहेंगे तो हर चीज पर नजर बनी रहेगी। रविवार को भी गंगा नदी में बांधों से एक लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया है। इससे अभी ग्रामीणों को राहत मिलते नहीं दिख रही है। सोरों के गंगा के तटवती गांव मनकापुर, कादरवाड़ी, बघेला, पुख्ता, घूरनपुर, लहरा में अभी बाढ़ का प्रकोप आबादी तक नहीं है। लेकिन जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए आगामी समय में ये गांव कभी भी बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं।
विज्ञापन
ऐहतियातन इन गांव के लोगों को भी अलर्ट कर दिया गया है। सहवाजपुर-सुन्नगढ़ी मार्ग गंगा के पानी से कट चुका है। यहां तीन दिन पहले पानी कुछ कम हुआ था, लेकिन अब यहां फिर से सड़क पर पानी आ गया है। प्रशासन ने लोक निर्माण विभाग को मरम्मत के निर्देश दिए हैं, लेकिन पानी होने के कारण मरम्मत नहीं हो पा रही है।
पूरे जिले में 25 नाव लगाई गईं
बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए पूरे जिले में 25 नाव लगाईं र्गइं हैं। इसमें 12 नाव पटियाली इलाके में, सोरों इलाके में 6 और सहावर क्षेत्र में 7 नाव संचालित हैं।
पशुओं का शुरू हुआ टीकाकरण
जिलाधिकारी के निर्देश पर बाढ़ प्रभावित इलाकों में पशुओं के टीकाकरण का काम तेज किया गया है। बाढ़ के पानी में लगातार पशुओं के रहने से खुरपका व मुंहपका रोग का खतरा बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य टीमें भी हुईं सक्रिय
पटियाली इलाके में स्वास्थ्य टीमें सक्रिय हुई हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र मूझंखेड़ा में 242 मरीजों का परीक्षण किया गया। इसी तरह से पनसोती व अन्य प्रभावित गांव में टीमें लगातार परीक्षण कर रही हैं। अपर जिलाधिकारी अजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के सभी ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है।
प्रशासन राशन किट की कर रहा तैयारी
बाढ़ प्रभावित इलाकों में जिला प्रशासन ने आपूर्ति विभाग को राशन किट तैयार करके प्रभावित गांव के ग्रामीणों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। आपूर्ति के टेंडर किए जा चुके हैं। राशन किट में एक पैकेट माचिस, मोमबत्ती, बिस्किट, 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, 1 किलो नमक, 2 किलो दाल, 2 किलो चना, हल्दी, मिर्च, धनिया और एक लीटर तेल दिया जाएगा।
जलस्तर का लेखा जोखा
- 94956 क्यूसेक पानी हरिद्वार बैराज से छोड़ा गया।
- 74773 क्यूसेक पानी बिजनौर से छोड़ा गया।
- 169755 क्यूसेक पानी नरौरा से छोड़ा गया।
वर्जन
- गंगा के जलस्तर में 5 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। पटियाली इलाके के गांव में कुछ पानी बढ़ा है। बाढ़ से निपटने के सभी प्रबंध जिला प्रशासन ने निर्धारित कर दिए हैं। अभी स्थिति नियंत्रण में है। हरिद्वार से पानी का दबाव कुछ कम हुआ है। - अजय श्रीवास्तव, एडीएम।