फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Farmers upset due to shortage of DAP, sellers are stocking

डीएपी की किल्लत से किसान परेशान, विक्रेता कर रहे स्टॉक

Sun, 20 Nov 2022 11:35 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 20 Nov 2022 11:35 PM IST
विज्ञापन
Farmers upset due to shortage of DAP, sellers are stocking
20एमएनपी-19-घिरोर क्षेत्र में बंद जिला सहकारी समिति - फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। डीएपी की किल्लत से जिले के किसान परेशान हैं। हर तरफ खाद के लिए मारामारी है। वहीं प्रशासन का आंकड़ा जिले में बड़े पैमाने पर डीएपी उपलब्ध होने की गवाही दे रहा है। ऐसे में साफ है कि कीमतें बढ़ाने और अवैध वसूली करने के लिए विक्रेता उर्वरक का स्टॉक गोदामों में कर रहे हैं। इससे किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। सहकारी समितियों पर भी समय से वितरण न होने के चलते किसान परेशान हैं।
विज्ञापन

जिले में बड़े पैमाने पर आलू और गेहूं की खेती की जाती है। गेहूं का रकबा जहां डेढ़ लाख हेक्टेयर के करीब है तो वहीं आलू का रकबा 22 हजार हेक्टेयर है। दोनों की बुवाई के लिए डीएपी की आवश्यकता पड़ती है। आलू की बुवाई का काम जहां एक माह पहले ही शुरू हो गया था तो वहीं गेहूं की बुवाई का काम भी बीते एक पखवाड़े से चल रहा है। किसानों को डीएपी की जरूरत है, लेकिन उन्हें डीएपी नहीं मिल पा रही है। अगर डीएपी मिल रही है तो 1350 रुपये की डीएपी की बोरी के लिए उन्हें 1650 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि अब तक जिले में 24 हजार मीट्रिक टन डीएपी का वितरण किया जा चुका है। ऐसे में डीएपी की किल्लत नहीं होनी चाहिए। अगर प्रशासन की बात मान ली जाए तो आखिर डीएपी जा कहां रही है।
विज्ञापन

32400 मीट्रिक टन है वितरण का लक्ष्य
इस साल रबी सीजन के लिए मैनपुरी को शासन से 32400 मीट्रिक टन डीएपी वितरित करने का लक्ष्य दिया गया है। इसमें से अब तक 24 हजार मीट्रिक टन यानी 75 प्रतिशत डीएपी बांटी भी जा चुकी है। अगर ये डीएपी बांटी जा चुकी है तो किसानों के खेतों की बुवाई का काम क्यों प्रभावित हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सहकारी समितियों पर लटक रहे ताले
प्रशासन द्वारा सहकारी समितियों के माध्यम से डीएपी का वितरण कराया जाता है, लेकिन जिले में सहकारी समितियों पर ताले लटके नजर आ रहे हैं। जैसे ही डीएपी आती है तो चहेतों को वितरित कर दी जाती है। वहीं इसके बाद डीएपी के इंतजार में समितियों पर ताले लटके रहते हैं। इससे किसानों को मायूस होना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed