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जिंदगीभर सिर छिपाने को छत के लिए तरसा, मौत आई तो कब्र नसीब नहीं...
Wed, 13 Nov 2019 01:58 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 13 Nov 2019 01:58 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
फिरोजाबाद जनपद के नारखी के गांव नगला रूध में भूमिहीन लोगों के अंतिम संस्कार के लिए न तो जमीन है और न श्मशानघाट। इसी गांव में हिंदू बंजारा समाज के लोग भी रहते हैं। इनके पास अपनी जमीन नहीं है। इस समाज के लोगों की मृत्यु पर अंतिम संस्कार करना मुश्किल होता है।
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मंगलवार को श्वांस के मरीज पप्पू (50) पुत्र मेघ सिंह की मौत हो गई। ग्रामसभा की जमीन पर दूसरे समाज के लोग अंतिम संस्कार नहीं होने दे रहे हैं। परिजन शव रखे बैठे हैं।
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इससे पूर्व इसी गांव में बंजारा समाज की महिला पुष्पादेवी की तीन माह पूर्व मौत हो गई थी। तब प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद ग्रामसभा की जमीन पर पुष्पादेवी का अंतिम संस्कार किया गया था।
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तब प्रशासन ने गांव में ग्रामसभा की जमीन श्मशान के लिए जमीन देने की बात कही थी। ग्रामसभा की जिस जमीन पर पुष्पादेवी के शव का अंतिम संस्कार किया गया था, उस जमीन से सट कर दूसरे समाज के लोगों के खेत हैं। यह लोग पप्पू के शव का अंतिम संस्कार नहीं होने दे रहे है।
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मंगलवार को श्वांस के मरीज पप्पू (50) पुत्र मेघ सिंह की मौत हो गई। ग्रामसभा की जमीन पर दूसरे समाज के लोग अंतिम संस्कार नहीं होने दे रहे हैं। परिजन शव रखे बैठे हैं।
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इससे पूर्व इसी गांव में बंजारा समाज की महिला पुष्पादेवी की तीन माह पूर्व मौत हो गई थी। तब प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद ग्रामसभा की जमीन पर पुष्पादेवी का अंतिम संस्कार किया गया था।
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तब प्रशासन ने गांव में ग्रामसभा की जमीन श्मशान के लिए जमीन देने की बात कही थी। ग्रामसभा की जिस जमीन पर पुष्पादेवी के शव का अंतिम संस्कार किया गया था, उस जमीन से सट कर दूसरे समाज के लोगों के खेत हैं। यह लोग पप्पू के शव का अंतिम संस्कार नहीं होने दे रहे है।