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श्री पारस अस्पताल दमघोंटू मॉकड्रिल: ऑक्सीजन संकट के पीड़ित बोले-शासन प्रशासन बोल रहा सफेद झूठ
Sun, 25 Jul 2021 10:10 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 25 Jul 2021 10:10 AM IST
सार
ऑक्सीजन की कमी होने पर ही मॉकड्रिल की गई। जिसमें कथित 22 मरीजों ने दम तोड़ा। परंतु जांच में अफसरों ने लीपापोती कर सिर्फ श्री पारस संचालक को नहीं बचाया, बल्कि ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में नाकाम सरकार का भी बचाव किया है।
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श्री पारस अस्पताल आगरा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
श्री पारस अस्पताल मॉकड्रिल कांड में मौतों के आंकड़ों पर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतक मरीजों के परिजनों ने जांच में मौतों की सच्चाई छिपाने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शासन-प्रशासन सफेद झूठ बोल रहा है। ऑक्सीजन की कमी होने पर ही मॉकड्रिल की गई। जिसमें कथित 22 मरीजों ने दम तोड़ा। परंतु जांच में अफसरों ने लीपापोती कर सिर्फ श्री पारस संचालक को नहीं बचाया, बल्कि ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में नाकाम सरकार का भी बचाव किया है।
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प्रशासन द्वारा कराए मॉकड्रिल कांड के डेथ ऑडिट में 26 व 27 अप्रैल को 16 मौतों की पुष्टि की गई है। जिसमें 11 ताजनगरी और पांच दूसरे जिलों के मृतक हैं। मृतकों की संख्या से पीड़ित संतुष्ट नहीं। शव लेने 26 अप्रैल को श्री पारस अस्पताल पहुंचे परिजनों का कहना है कि उस दिन सुबह से लेकर रात एक बजे तक अस्पताल में शवों की कतार लगी रही। अस्पताल के बाहर रात एक बजे तक शवों को निकालने का सिलसिला चलता रहा। उधर, चिकित्सा मामलों के विशेषज्ञ डॉ. देवेन्द्र गुप्ता का कहना है कि जिन 16 मरीजों की मौत का दावा प्रशासन कर रहा है उनके पोस्टमार्टम ही नहीं हुए। ऐसे में उनकी मौत ऑक्सीजन कमी से हुई या नहीं, ये कैसे साबित होगा। प्रशासन की रिपोर्ट में 16 मृतकों की मौत का कारण ऑक्सीजन कमी नहीं माना गया है। इस संबंध में विधि विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन अगर ऑक्सीजन कमी से मौतें बताता तो सरकार की किरकिरी होती। सरकार के इशारे पर ही मौतों का वास्तविक कारण नहीं बताया गया है।
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पीड़ितों की पीड़ा
ऑक्सीजन होती तो न मरते इतने मरीज
- अफसर झूठ बोल रहे हैं कि उस रात पर्याप्त ऑक्सीजन थी। अगर ऑक्सीजन होती तो इतने मरीज नहीं मरते। 16 मौतों का आंकड़ा झूठा हो सकता है। 25 व 26 अप्रैल को 22 से अधिक मरीजों की मौत श्री पारस अस्पताल में ऑक्सीजन कमी से हुई है। नत्थी लाल त्यागी, मधु नगर
रात एक बजे तक निकाले गए शव
- उस रात एक बजे तक श्री पारस अस्पताल से मरीजों के शव निकाले गए। सुबह से सिलसिला शुरू हुआ जो देर रात तक चलता रहा। मैं चश्मदीद गवाह हूं इस बात की। शाम छह बजे मुझे मेरी मां की मृत्यु की सूचना दी गई। - प्रियंका सिंह, दहतोरा
न्याय के नाम पर हुआ अन्याय
- शासन-प्रशासन से हमें न्याय की उम्मीद थी, लेकिन न्याय के नाम पर हमारे साथ अन्याय हुआ। अस्पताल संचालक को बचाने और अपनी कमियां छिपाने के लिए जांच में लीपापोती की गई है। संचालक के विरुद्ध कमजोर धाराओं में मुकदमा किया गया है। - सौरभ अग्रवाल
सीबीआई जांच की जरूरत
- मामला बेहद संवेदनशील है। प्रशासन ने हल्के ढंग से जांच की। ऐसे गंभीर मामलों की जांच सीबीआई से कराने की जरूरत है। अगर सीबीआई जांच हो, तो अस्पताल संचालक के अलावा अफसरों को भी जेल जाना पड़ेगा। - राजवीर सिंह, अधिवक्ता, फौजदारी
ऑक्सीजन होती तो न मरते इतने मरीज
- अफसर झूठ बोल रहे हैं कि उस रात पर्याप्त ऑक्सीजन थी। अगर ऑक्सीजन होती तो इतने मरीज नहीं मरते। 16 मौतों का आंकड़ा झूठा हो सकता है। 25 व 26 अप्रैल को 22 से अधिक मरीजों की मौत श्री पारस अस्पताल में ऑक्सीजन कमी से हुई है। नत्थी लाल त्यागी, मधु नगर
रात एक बजे तक निकाले गए शव
- उस रात एक बजे तक श्री पारस अस्पताल से मरीजों के शव निकाले गए। सुबह से सिलसिला शुरू हुआ जो देर रात तक चलता रहा। मैं चश्मदीद गवाह हूं इस बात की। शाम छह बजे मुझे मेरी मां की मृत्यु की सूचना दी गई। - प्रियंका सिंह, दहतोरा
न्याय के नाम पर हुआ अन्याय
- शासन-प्रशासन से हमें न्याय की उम्मीद थी, लेकिन न्याय के नाम पर हमारे साथ अन्याय हुआ। अस्पताल संचालक को बचाने और अपनी कमियां छिपाने के लिए जांच में लीपापोती की गई है। संचालक के विरुद्ध कमजोर धाराओं में मुकदमा किया गया है। - सौरभ अग्रवाल
सीबीआई जांच की जरूरत
- मामला बेहद संवेदनशील है। प्रशासन ने हल्के ढंग से जांच की। ऐसे गंभीर मामलों की जांच सीबीआई से कराने की जरूरत है। अगर सीबीआई जांच हो, तो अस्पताल संचालक के अलावा अफसरों को भी जेल जाना पड़ेगा। - राजवीर सिंह, अधिवक्ता, फौजदारी
35 दिन में सूचना नहीं देने पर डीएम व एडी हेल्थ से अपील
श्री पारस कांड में प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग सवालों का सामना नहीं कर पा रहा। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग से 25 बिंदुओं पर बाल अधिकार कार्यकर्ता ने 21 जून को सूचना अधिकार के तहत जन सूचना मांगी थी। जिसे उपलब्ध नहीं कराया। 35 दिन बाद भी सूचना नहीं देने पर शनिवार को इस मामले में डीएम व एडी हैल्थ कार्यालय में प्रथम अपील की गई है।
जिलाधिकारी कार्यालय के जन सूचना अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट से दस बिंदुओं पर आरटीआई मांगी गई थी। सीएमओ से 15 बिंदुओं पर सूचना मांगी गई। दोनों विभागों ने सूचना नहीं दी। प्रथम अपील करने वाले नरेश पारस ने कहा, प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने सूचना उपलब्ध नहीं कराई तो राज्य सूचना आयोग जाएंगे। उन्होंने सूचना नहीं देने के पीछे दोनों विभागों की मंशा पर सवाल उठाए हैं। आरटीआई में उन सभी बिंदुओं पर सूचना मांगी गई है जिनके जवाब प्रशासनिक जांच रिपोर्ट में पीड़ितों को नहीं मिले हैं। नरेश पारस की शिकायत पर श्रीपारस प्रकरण में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी केस दर्ज कर लिया है। जिसकी जल्द जांच शुरू होने की संभावना है।
आईवीएफ डे: उपलब्धियों का एक अनूठा ‘उत्सव‘, 1998 में आगरा में जन्मा था उत्तर प्रदेश का पहला टेस्ट ट्यूब बेबी
श्री पारस कांड में प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग सवालों का सामना नहीं कर पा रहा। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग से 25 बिंदुओं पर बाल अधिकार कार्यकर्ता ने 21 जून को सूचना अधिकार के तहत जन सूचना मांगी थी। जिसे उपलब्ध नहीं कराया। 35 दिन बाद भी सूचना नहीं देने पर शनिवार को इस मामले में डीएम व एडी हैल्थ कार्यालय में प्रथम अपील की गई है।
जिलाधिकारी कार्यालय के जन सूचना अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट से दस बिंदुओं पर आरटीआई मांगी गई थी। सीएमओ से 15 बिंदुओं पर सूचना मांगी गई। दोनों विभागों ने सूचना नहीं दी। प्रथम अपील करने वाले नरेश पारस ने कहा, प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने सूचना उपलब्ध नहीं कराई तो राज्य सूचना आयोग जाएंगे। उन्होंने सूचना नहीं देने के पीछे दोनों विभागों की मंशा पर सवाल उठाए हैं। आरटीआई में उन सभी बिंदुओं पर सूचना मांगी गई है जिनके जवाब प्रशासनिक जांच रिपोर्ट में पीड़ितों को नहीं मिले हैं। नरेश पारस की शिकायत पर श्रीपारस प्रकरण में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी केस दर्ज कर लिया है। जिसकी जल्द जांच शुरू होने की संभावना है।
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