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फर्जी प्रमाण पत्र बनाने में करते थे प्रधान और सभासद के लेटरपेड का इस्तेमाल
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फर्जी प्रमाण पत्र बनबाने आए दो हवालात में बंद- अमर उजाला
- फोटो : ETAH
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एटा। फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले दोनों युवक काफी तेज तर्रार और कंप्यूटर के जानकार हैं। दोनों के पास से कुछ पुराने प्रमाण पत्र भी बरामद हुए। यह प्रमाण पत्र बनाने के लिए सभासद और प्रधान के लेटरपेड का इस्तेमाल करते थे। यह कोई भी प्रमाण पत्र और आधार कार्ड कुछ ही दिनों में बना देते थे, लेकिन इसके लिए प्रक्रिया पूरी अपनाते थे। जिससे प्रमाण पत्र बनवाने वाले को शक न हो।
फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के मामले में पकड़ा गया चमन शहर का ही निवासी है, जबकि उसका साथी दुर्गेश अलीगढ़ का रहने वाला है। दुर्गेश अलीगढ़ में किसी विभाग में काम भी करता है। इन दोनों को ही सरकारी दस्तावेजों और उन्हें बनवाने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी है। यह दोनों प्रमाण पत्र बनाने के लिए आसपास के क्षेत्र के गांव के प्रधान या मोहल्ले के सभासद का लेटरपैड इस्तेमाल करते थे। इनके द्वारा लेटरपैड पर सभासद के हस्ताक्षर और मुहर भी लगाई दी जाती थी, जिससे की कोई शक न कर सके। बुधवार को दोनों के पकड़े जाने के बाद सदर तहसील में इन्हें लेकर पूरे दिन चर्चा रही।
पहले भी कई बार आ चुके थे दोनों
दुर्गेश और चमन प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसील सदर में पहले भी कई बार आ चुके हैं। इसके चलते ही लेखपाल लक्ष्मी नारायण को शक हुआ था। दोनों के पकड़े जाने के बाद जब मामला प्रकाश में आया तो अन्य लेखपाल भी बोले शायद यह दोनों उनके पास भी आ चुके हैं।
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हो सकता बड़ा गैंग
फर्जी प्रमाण पत्र बनाने का पकड़े गए इन युवकों का गैंग हो सकता है। इनके साथ और लोगों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। तहसील में मौजूद लोगों ने भी इस पर शंका जाहिर करते हुए पूछताछ ठीक से किए जाने की बात कही। बताया कि यह लोग एक साथ लेटरपैड, आधार कार्ड व प्रमाण पत्रों के फार्म आदि की व्यवस्था अकेले नहीं करते होंगे। इसमें साइबर कैफे या फोटो कॉपी संचालकों के शामिल होने की बात सामने आ रही है।
यह मामला प्रकाश में आने के बाद और सख्ती बरती जाएगी। प्रमाण पत्रों के आवेदनों पर और पुख्ता जांच कराई जाएगी। जिससे फर्जी प्रमाण पत्र जारी न हो सकें। इन युवकों के साथ और भी लोग शामिल हैं तो पुलिस उनसे पूछताछ करेगी। जिसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
दुर्गेश यादव, तहसीलदार सदर, एटा
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फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के मामले में पकड़ा गया चमन शहर का ही निवासी है, जबकि उसका साथी दुर्गेश अलीगढ़ का रहने वाला है। दुर्गेश अलीगढ़ में किसी विभाग में काम भी करता है। इन दोनों को ही सरकारी दस्तावेजों और उन्हें बनवाने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी है। यह दोनों प्रमाण पत्र बनाने के लिए आसपास के क्षेत्र के गांव के प्रधान या मोहल्ले के सभासद का लेटरपैड इस्तेमाल करते थे। इनके द्वारा लेटरपैड पर सभासद के हस्ताक्षर और मुहर भी लगाई दी जाती थी, जिससे की कोई शक न कर सके। बुधवार को दोनों के पकड़े जाने के बाद सदर तहसील में इन्हें लेकर पूरे दिन चर्चा रही।
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पहले भी कई बार आ चुके थे दोनों
दुर्गेश और चमन प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसील सदर में पहले भी कई बार आ चुके हैं। इसके चलते ही लेखपाल लक्ष्मी नारायण को शक हुआ था। दोनों के पकड़े जाने के बाद जब मामला प्रकाश में आया तो अन्य लेखपाल भी बोले शायद यह दोनों उनके पास भी आ चुके हैं।
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हो सकता बड़ा गैंग
फर्जी प्रमाण पत्र बनाने का पकड़े गए इन युवकों का गैंग हो सकता है। इनके साथ और लोगों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। तहसील में मौजूद लोगों ने भी इस पर शंका जाहिर करते हुए पूछताछ ठीक से किए जाने की बात कही। बताया कि यह लोग एक साथ लेटरपैड, आधार कार्ड व प्रमाण पत्रों के फार्म आदि की व्यवस्था अकेले नहीं करते होंगे। इसमें साइबर कैफे या फोटो कॉपी संचालकों के शामिल होने की बात सामने आ रही है।
यह मामला प्रकाश में आने के बाद और सख्ती बरती जाएगी। प्रमाण पत्रों के आवेदनों पर और पुख्ता जांच कराई जाएगी। जिससे फर्जी प्रमाण पत्र जारी न हो सकें। इन युवकों के साथ और भी लोग शामिल हैं तो पुलिस उनसे पूछताछ करेगी। जिसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
दुर्गेश यादव, तहसीलदार सदर, एटा