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मैनपुरी में जन्मी गीतांजलिश्री को मिला अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइस

Sat, 28 May 2022 12:03 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 28 May 2022 12:03 AM IST
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Expressed happiness over Gitanjalishree receiving the International Booker Prize
मैनपुरी। जिले में जन्मी हिंदी की जानी मानी कथाकार गीतांजलिश्री के उपन्यास रेत की समाधि के अंग्रेजी रूपांतरण टॉम्ब ऑफ सेंड को इस साल का अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइस मिला है। यह पुरस्कार लंदन में आयोजित समारोह में दिया गया। उनकी इस उपलब्धि ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश, प्रदेश और मैनपुरी को गौरवांवित किया है।
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गीतांजलिश्री वह पहली भारतीय महिला हैं जिनके उपन्यास को अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइस मिला है। पुरस्कार मिलने के बाद गीतांजलिश्री ने कहा कि उपन्यास को लिखते समय उन्होंने कभी यह कल्पना नहीं की थी कि एक दिन उनकी इस कृति को इतना बड़ा सम्मान मिलेगा। इस पुरस्कार से हिंदी साहित्य और साहित्यकारों का सम्मान बढ़ा है। गीतांजलिश्री पिछले तीस वर्षों से लेखन कार्य कर रही हैं। उन्होंने पहला उपन्यास माई लिखा था। वह अब तक कई उपन्यास और कहानी संग्रह लिख चुकी हैं।
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गीतांजलिश्री का जन्म उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में 12 जून 1957 को हुआ था। पिता अनिरुद्ध पांडेय सिविल सेवा में थे और गीतांजलिश्री के जन्म के समय उनकी तैनाती जिले में कलक्टर के पद पर थी। गीतांजलिश्री ने बताया कि उन्होंने बचपन के दो साल मैनपुरी में गुजारे। इसके बाद पिता का स्थानांतरण हो गया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में हुई। लेडी श्रीराम कॉलेज दिल्ली से स्नातक और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से इतिहास में एमए किया। वर्तमान में वह दिल्ली में निवास कर रही हैं।
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उपन्यास रेत की समाधि के अंग्रेजी रूपांतरण टॉम्ब ऑफ सेंड की लेखिका गीतांजलिश्री को अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइस मिलने पर जिले के साहित्यकार स्वयं को गौरवांवित महसूस कर रहे हैं। हर्ष जताते हुए उन्होंने गीतांजलिश्री को बधाई दी है।
गीतांजलिश्री ने बताया कि पिता के स्थानांतरण के बाद से उनका मैनपुरी आना नहीं हुआ। मैनपुरी के बारे में उन्हें याद नहीं है, मां श्री पांडेय से मैनपुरी का जिक्र कई बार सुना। उन्होंने कहा कि मैनपुरी मेरी जन्मस्थली है, मौका मिलेगा वह मैनपुरी जरूर आएंगी।
गीतांजलिश्री को अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइस मिलने से जिले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान हुई है। कुछ समय पहले तक जिले के युवा साहित्यकार भी उनके बारे में नहीं जानते थे। आज वे गीतांजलिश्री की राह पर चलना चाहता है।
जिले के प्रमुख साहित्यकार श्रीकृष्ण मिश्रा ने गीतांजलिश्री को बुकर प्राइस मिलने पर हर्ष जताया। कहा कि मैनपुरी की माटी में जन्मी गीतांजलिश्री की इस उपलब्धि से जिलेभर के साहित्यकार गौरवांवित है। ईश्वर से कामना है कि हिंदी की बिंदी इसी तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमके।

साहित्यकार डॉ. पदम सिंह ‘पदम’ का कहना है कि साहित्यकार के लिए सम्मान से बढ़कर कुछ नहीं है। बुकर प्राइस भले ही गीतांजलिश्री को मिला है लेकिन इससे हर साहित्यकार का सम्मान बढ़ा है। मेरी कामना है कि इसी तरह वह हिंदी को देश और विदेश में पहचान दिलाएं।
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