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मुद्दा किताबें सस्ती हों: कमीशन के चलते निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबें लगा रहे स्कूल
Fri, 29 May 2020 09:40 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 29 May 2020 09:40 AM IST
सार
सीबीएसई और यूपी बोर्ड की परीक्षा में एनसीईआरटी किताबों से प्रश्न पूछे जा रहे हैं
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विस्तार
सीबीएसई और यूपी बोर्ड की परीक्षा में एनसीईआरटी किताबों से प्रश्न पूछे जा रहे हैं। इसके अलावा सिविल सर्विसेज, मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रतियोगी परीक्षाओं में भी एनसीईआरटी पैटर्न पर ही आधारित अधिकतर सवाल होते हैं। इसके बाद भी स्कूलों में रिफरेंस बुक या निजी पब्लिशर्स की किताबें लगाई जा रही हैं।
सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं से पहले विशेषज्ञ और शिक्षक विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की किताबें ध्यान से पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्हें सीबीएसई की वेबसाइट पर डाले जाने वाले सैंपल पेपर हल करने का सुझाव दिया जाता है, जो कि एनसीईआरटी की किताबों से ही तैयार किया जाता है।
लॉकडाउन में महंगी हुई पढ़ाईः अभिभावकों पर मंडराया आर्थिक संकट, चार से छह हजार का स्कूल बैग
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एनसीईआरटी की किताबें प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों से बहुत सस्ती हैं। यह इंटरनेट पर भी उपलब्ध हो जाती हैं। कमीशन कम होने से इसको लगाने में कम रुचि दिखाई जाती है। हालांकि स्कूलों की शिकायत रहती है कि किताबें समय सक मिल नहीं पाती हैं।
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सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं से पहले विशेषज्ञ और शिक्षक विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की किताबें ध्यान से पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्हें सीबीएसई की वेबसाइट पर डाले जाने वाले सैंपल पेपर हल करने का सुझाव दिया जाता है, जो कि एनसीईआरटी की किताबों से ही तैयार किया जाता है।
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एनसीईआरटी की किताबें प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों से बहुत सस्ती हैं। यह इंटरनेट पर भी उपलब्ध हो जाती हैं। कमीशन कम होने से इसको लगाने में कम रुचि दिखाई जाती है। हालांकि स्कूलों की शिकायत रहती है कि किताबें समय सक मिल नहीं पाती हैं।
परीक्षा में एनसीईआरटी की किताबें सर्वाधिक फायदेमंद
एनसीईआरटी किताबें बहुत ही अच्छी हैं और विद्यार्थियों के लिए लाभप्रद हैं। स्कूल में अधिकतर किताबें एनसीईआरटी की ही लगाई गई हैं। किताबों की अनुपलब्धता भी एक समस्या है, इसका समाधान होना चाहिए। एनसीईआरटी की किताबें अपेक्षाकृत बहुत सस्ती भी हैं। - पुनीत वशिष्ठ, प्रधानाचार्य, जीडी गोयंका पब्लिक स्कूल
एनसीईआरटी की किताबों की उपलब्धता समय से नहीं हो पाती है। इसलिए रिफरेंस बुक लगानी पड़ती है। रिफरेंस बुक से विषय को समझना विद्यार्थियों के लिए आसान हो जाता है। -मोहित बंसल, निदेशक, जॉन मिल्टन पब्लिक स्कूल
सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए एनसीईआरटी की किताबें सर्वश्रेष्ठ हैं। प्रश्न भी इन्हीं पर आधारित होते हैं। स्कूलों में इन्हीं किताबों से पढ़ाया जाना चाहिए। यह अपेक्षाकृत सस्ती भी बहुत होती हैं। इंटरनेट पर भी उपलब्ध हैं। -अमित सिंह, निदेशक, सेंटर फॉर एंबिशन
मेडिकल की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ने का सुझाव दिया जाता है। स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाया जाए तो विद्यार्थी को प्रतियोगी परीक्षाओं में भी मदद मिलेगी। - डॉ. ललितेश यादव, एकेडमिक हेड, बलूनी क्लासेज
एनसीईआरटी किताबें बहुत ही अच्छी हैं और विद्यार्थियों के लिए लाभप्रद हैं। स्कूल में अधिकतर किताबें एनसीईआरटी की ही लगाई गई हैं। किताबों की अनुपलब्धता भी एक समस्या है, इसका समाधान होना चाहिए। एनसीईआरटी की किताबें अपेक्षाकृत बहुत सस्ती भी हैं। - पुनीत वशिष्ठ, प्रधानाचार्य, जीडी गोयंका पब्लिक स्कूल
एनसीईआरटी की किताबों की उपलब्धता समय से नहीं हो पाती है। इसलिए रिफरेंस बुक लगानी पड़ती है। रिफरेंस बुक से विषय को समझना विद्यार्थियों के लिए आसान हो जाता है। -मोहित बंसल, निदेशक, जॉन मिल्टन पब्लिक स्कूल
सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए एनसीईआरटी की किताबें सर्वश्रेष्ठ हैं। प्रश्न भी इन्हीं पर आधारित होते हैं। स्कूलों में इन्हीं किताबों से पढ़ाया जाना चाहिए। यह अपेक्षाकृत सस्ती भी बहुत होती हैं। इंटरनेट पर भी उपलब्ध हैं। -अमित सिंह, निदेशक, सेंटर फॉर एंबिशन
मेडिकल की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ने का सुझाव दिया जाता है। स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाया जाए तो विद्यार्थी को प्रतियोगी परीक्षाओं में भी मदद मिलेगी। - डॉ. ललितेश यादव, एकेडमिक हेड, बलूनी क्लासेज