फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Even gods and goddesses are suffering from cold Kadhi Bajra offered as prasad Kanha is wearing a coat

देवी-देवताओं को भी सता रही ठंड: कढ़ी बाजरा का लगाया जा रहा भोग, कान्हा पहन रहे कोट; पूजा के समय में भी बदलाव

Tue, 26 Nov 2024 03:41 PM IST
धीरेन्द्र सिंह मनीष शर्मा, आगरा
मनीष शर्मा, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 26 Nov 2024 03:41 PM IST
सार

शीत ऋतु में मंदिरों में देवी-देवताओं के खानपान और पहनावे में बदलाव हो गया है। इतना ही नहीं पूजा का समय भी बदला गया है। सर्दी की शुरुआत में प्रतिवर्ष ये परिवर्तन किए जाते हैं।

विज्ञापन
Even gods and goddesses are suffering from cold Kadhi Bajra offered as prasad Kanha is wearing a coat
कान्हा पहन रहे कोट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शीत ऋतु आने से आम जनमानस के साथ देवी-देवताओं को भी ठंड सता रही है। इस मान्यता के साथ देव उत्थान एकादशी से शहर के मंदिरों में भगवान के खानपान और पहनावे में बदलाव किया गया है। मंदिर के सेवायत अपने अराध्य को कढ़ी-बाजरे का भोग और गर्म कोट पहना रहे हैं।

विज्ञापन


सर्दी को ध्यान में रखते हुए शहर के प्रमुख मंदिरों में कपाट खुलने और बंद होने के समय से लेकर आरती और भोग की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। हलवाई की बगीची स्थित श्रीनाथ मंदिर के पंडित मुकेश चंद मुखिया ने बताया कि शीत ऋतु की शुरुआत होने पर ठाकुरजी के खानपान से लेकर पोशाक में बदलाव किया जाता है।
विज्ञापन


दिनचर्या का विशेष ध्यान
देवउठनी एकादशी से मकर संक्रांति तक उनकी दिनचर्या का विशेष ध्यान रखा जाता है। सुबह गर्म पानी में स्नान के बाद गर्म दूध और मिष्ठान का भोग लगाते हैं। रूई की बनी पोशाक और कोट पहनाते हैं। दिन में कढ़ी बाजरा, मेथी और बथुआ की सब्जी के साथ मेवे और गुड़ का भोग अर्पित करते हैं। ठंड को देखते हुए मंगला आरती और सांध्य आरती के समय में भी बदलाव किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसलिए किया जाता है बदलाव
विजय नगर स्थित राधा-कृष्ण मंदिर के सेवायत पंडित रजत पांडेय ने बताया कि शीत ऋतु में जिस तरह मनुष्य अपने रहन-सहन में बदलाव करता है, वैसे ही ठंड को ध्यान में रखते हुए देवी-देवताओं की दिनचर्या में बदलाव किया जाता है। सुबह का भोग गर्म रबड़ी और गाजर का हलवे के साथ गर्म दूध से लगाते हैं।

बाजरे की रोटी और मक्के का साग का भोग
दोपहर का बाजरे की रोटी और मक्के का साग, गट्टे की सब्जी, अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। रात्रि भोज में मक्के की रोटी के साथ सरसाें की सब्जी और गर्म दूध दिया जाता है। सर्दियों में भगवान को शनील के कपड़ों की पोशाक के साथ शयन के समय शनील की रजाई, गद्दे और पास में अंगीठी रखते हैं। आरती के समय में आधे घंटे का बदलाव किया गया है।


भगवान ओढ़ रहे रजाई
कमला नगर स्थित इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष अरविंद प्रभु ने बताया कि शयन आरती का समय 8:45 के स्थान पर 8:15 बजे कर दिया गया है। मार्गशीर्ष की षष्ठी के दिन ओढ़न षष्ठी मनाई जाती है। इस दिन से भगवान को सर्दी से बचाने के लिए मोटे कपड़े और रजाई ओढ़ना शुरू कर देते हैं। तीनों पहर को भगवान के भोग में खड़े मसाले से तैयार खिचड़ी परोसी जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed