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जोंस मिल : पूरी जमीन ही घोषित की जा सकती है सरकारी, कमेटी के हाथ लगे अहम दस्तावेज

Thu, 27 Aug 2020 03:56 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 27 Aug 2020 03:56 PM IST
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entire land jones can be declared government in agra
जोंस मिल - फोटो : अमर उजाला
आगरा में जोंस मिल मामले की जांच कर रही कमेटी के हाथ ऐसे दस्तावेज लगे हैं जिससे पूरी जमीन सरकारी घोषित की जा सकती है। जांच कमेटी की रिपोर्ट में पता चला है कि जोंस परिवार ने पट्टे में मिली जमीन को किराएदारों के नाम कर दिया था। अधिकारियों का कहना है कि कानूनी रूप से ऐसा किया जाना गलत है।
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जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह के आदेश पर यहां 23 खसरों की कमेटी जांच कर रही हैं। इसमें करीब 128 बीघा जमीन है। जोंस परिवार ने आगरा काश्तकारी अधिनियम 1926 की धारा 30 के विरुद्ध यूनाइटेड मिल के नाम संपत्ति हस्तांतरित की।
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काश्तकारी एक्ट लागू होने पर हस्तांतरण शून्य हो गया। इस आधार पर 11 मार्च 1932 को पूरी संपत्ति राज्य सरकार में निहित हो चुकी थी। एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव ने बताया कि कई जानकारियां मिली हैं। रिपोर्ट अभी फाइनल नहीं हुई है। जोंस मिल के खसरों में जमीन की बिक्री व निर्माण पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है।

जॉन ने बनवाए थे दो पुस्तकालय, इनमें हैं 54 हजार किताबें

जॉर्ज एंथनी जॉन के खजाने में दुर्लभ किताबें हैं। उन्होंने एक तरफ जीवनी मंडी में पांच मिलों का निर्माण कराया। दूसरी तरफ सदर बाजार और पालीवाल पार्क में दो लाइब्रेरी स्थापित कीं। दोनों लाइब्रेरियों में करीब 54 हजार किताबें हैं। सदर में नंद सिनेमा के पास क्वीन लाइब्रेरी बंद है, जबकि पालीवाल पार्क स्थित जोंस पब्लिक लाइब्रेरी गुलजार है।

इसकी पहली मंजिल पर 124 प्राचीन मूर्तियों का संग्रहालय भी बना है। जीए जोन की पोती मोरिन जोन ने बताया कि दादा ने इंग्लैंड की महारानी क्वीन विक्टोरिया के नाम पर सदर बाजार में क्वीन लाइब्रेरी बनवाई थी। इसमें 40 हजार किताबें हैं। लाइब्रेरी का फर्श लकड़ी का बना है, ताकि पढ़ते समय ध्यान भंग न हो। 

यह लाइब्रेरी बाद में छावनी परिषद के हैंडओवर हो गई। यहां लाइब्रेरी बंद मिली। करीब 40 वर्षों से लाइब्रेरी के एक कमरे में किराए पर रह रहीं मेनिया पॉल ने बताया कि लाइब्रेरी के लिए फादर जोन ने अपना बंगला दान किया था। करीब 1.3 एकड़ में बनी इस लाइब्रेरी में अब सफाई कर्मियों के अलावा कोई नहीं रहता।

1945 में नगर निगम को हो गई हैंडओवर

पालीवाल पार्क स्थित जोंस पब्लिक लाइब्रेरी 1928 में बनी। मोरिन जोंस ने बताया कि तब इसमें अंग्रेजी साहित्य था, लेकिन फादर जोन को भारतीय संस्कृति व साहित्य से भी गहरा लगाव था। उनके जाने के बाद 1945 में लाइब्रेरी का पुनरुद्धार किया गया। 

लाइब्रेरी नगर निगम प्रशासन के हैंडओवर हो गई। लाइब्रेरियन सुभाष कुमार ने बताया कि अभी लाइब्रेरी में करीब 14 हजार किताबें हैं। सबसे पुरानी किताब 1932 की है। बाद में यहां एक संग्रहालय खोला गया। संग्रहालय में हिंदू देवी-देवताओं की 124 प्राचीन मूर्तियां रखी हुईं हैं।
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