पड़ताल: सरकारी दफ्तरों में बिजली की बर्बादी, देहात में हाहाकार, दिन में फिजूल जल रहीं ट्यूबलाइट
अमर उजाला ने पड़ताल में पाया कि डीवीवीएनएल के मुख्य अभियंता के दफ्तर दिन में भी जगमगा रहे हैं। वहीं नगर निगम के खाली ऑफिस में एसी-पंखे चल रहे थे और फिजूल में ट्यूबलाइट जल रही थी।
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कोयले की कमी के कारण प्रदेश के लोग बिजली संकट से जूझ रहे हैं। देहात में 10 से 12 घंटों की अघोषित बिजली कटौती से हाहाकार मचा है। बुवाई से पहले बिजली की कटौती से ग्रामीण व किसान परेशान हैं। वहीं सरकारी दफ्तरों में बिजली की बर्बादी हो रही है। इस मामले में अमर उजाला की टीम ने पड़ताल की तो पाया बिजली बचाओ का संदेश देने वाले बिजली विभाग के कार्यालयों में फिजूल लाइटें जल रहीं थीं। खाली कमरों में भी पंखे चल रहे थे। नगर निगम कार्यालय के खाली कमरों में एसी और पंखे चलते मिले। अफसरों के दफ्तर दिन में भी एलईडी लाइटों से जगमगा रहे थे।
डीवीवीएनएल: दो कर्मचारियों के लिए चार एसी
ऊर्जा भवन, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम (डीवीवीएनएल) के प्रबंध निदेशक का दफ्तर है। मंगलवार को दोपहर 12.15 बजे यहां पहली मंजिल पर एमडी ऑफिस में सीढ़ियों पर बल्ब जलते मिले। कान्फ्रेंस हॉल में दो कर्मचारी बैठे थे, यहां चार एसी हॉल को ठंडा करने के लिए चल रहे थे। हॉल की सभी एलईडी लाइटें जलती मिलीं।
मुख्य अभियंता वितरण कार्यालय: गैलरी में सन्नाटा, फिर भी चल रहा था पंखा
दोपहर एक बजे गैलाना रोड पर मुख्य अभियंता वितरण कार्यालय में कमरा नंबर 20 में दरवाजे पर ताला लटका था, लेकिन दरवाजे के ऊपर बल्ब जलता हुआ मिला। गैलरी में सन्नाटा था, लेकिन फिजूल में पंखा चल रहा था। बिजली विभाग के दफ्तर में ही बिजली की बर्बादी हो रही थी।
दोपहर 2.30 बजे नगर निगम में प्रथम तल पर नगर आयुक्त कार्यालय के बाहर गैलरी में सभी ट्यूबलाइटें जलती मिलीं, जबकि तेज धूप के कारण काफी रोशनी थी। अंदर सभी ऑफिसों में एसी चलते मिले, जबकि लंच टाइम में ज्यादातर कर्मचारी वेटिंग रूम में एक साथ खाना खा रहे थे।
नहीं होगी लापरवाही, देंगे निर्देश
मैं आगरा से बाहर हूं। कर्मचारियों की जिम्मेदारी है जब कोई न हो तो पंखे, बल्ब व अन्य उपकरण बंद रहने चाहिए। भविष्य में लापरवाही नहीं होगी। सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को इस संबंध में निर्देशित किया जाएगा। - अमित किशोर, प्रबंध निदेशक, डीवीवीएनएल
बिजली की फिजूलखर्ची नहीं होनी चाहिए। जहां भी गैरजरूरी लाइटें या पंखे चलाए जा रहे हैं, कर्मचारियों से कहा गया है कि कमरे से निकलते ही लाइट, पंखे बंद कर दें। निखिल टी फुंडे, नगर आयुक्त
जैतपुकर कलां में अघोषित कटौती ने किसानों की नींद उड़ा दी है। ग्रामीणों के मुताबिक बाह और जैतपुर के गांव में ब्लैक आउट जैसे हालात हैं। जैतपुर के कचौरा घाट, पई, चित्रहाट, पारना, नौगवां, पाठक पुरा, मढे़पुरा, सामरे मऊ, चौरंगाहार मे 12 से 14 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। बाह के बाघराज पुरा, पुरा भदौरिया, रैंका, क्वारी, बिजकौली, बासौनी गांव में लंबे समय तक बत्ती गुल रहती है। संवाद
एत्मादपुर में नहीं मिल रही निर्बाध आपूर्ति
नलकूप के लिए 10 घंटे निर्बाध आपूर्ति के आदेश हैं। सवाई निवासी किसान दलवीर सिंह ने बताया कि नलकूप के लिए दस घंटे निर्बाध आपूर्ति नहीं मिल रही। बार-बार कटौती होती है। खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही। आलू बुवाई का समय है। कस्बे में भी 20 घंटे में छह घंटे की कटौती हो रही है, जिससे व्यापारी प्रभावित हैं। संवाद
फतेहपुर सीकरी में अधर में लटकी खेतों की पलेवट
सामरा निवासी रामवीर सिंह भगौर, दुलहरा के भूरी सिंह, हंसपुरा के जितेंद्र शर्मा आदि किसानों ने बताया कि क्षेत्र में 18 घंटे आपूर्ति के निर्देश हैं। इस समय छह से आठ घंटे बिजली मिल रही है वह भी रात में। दिन में बिजली कटौती के कारण गेहूं, सरसों बुवाई के लिए खेतों की पलेवट नहीं हो सकी। नगला मौहरे निवासी देवदत्त शुक्ला ने बताया कि फीडर से केवल छह से सात घंटे आपूर्ति मिल रही है। संवाद
बरहन में सूखने के कगार पर फसलें
बरहन के सुजानपुरा निवासी राज बहादुर के मुताबिक सुबह-शाम तीन-तीन घंटे की कटौती हो रही है। जर्जर तारों की मरम्मत के नाम पर कभी भी बिजली काट दी जाती है। नगला फूटरा निवासी किसान नाहर सिंह ने बताया कि फसल के लिए दिन में सिर्फ छह घंटे बिजली मिल पा रही है। सिंचाई नहीं होने से फसलें सूखने के कगार पर हैं।
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