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Agra: हाईकोर्ट व जनपद न्यायालयों की सूचनाएं पाना होगा आसान, जानें आरटीआई पोर्टल से किस तरह मिलेगा फायदा
Tue, 21 Mar 2023 10:22 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 21 Mar 2023 10:22 AM IST
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- फोटो : istock
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यदि आपको उच्च न्यायालय या उसके अधीनस्थ किसी भी जनपद न्यायालय से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूचना पानी है तो उसके ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल पर आरटीआई प्रार्थनापत्र लगा सकेंगे। शुल्क भी ऑनलाइन भुगतान कर सकेंगे। जन सूचना अधिकारी के खिलाफ भी ऑनलाइन अपील करने की सुविधा होगी। यह आदेश आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता व आरटीआई एक्टिविस्ट केसी जैन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2020 में प्रस्तुत की गई जनहित रिट याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, पीएस नरसिम्हा व जेबी पारदीवाला की पीठ ने दिया है।
अधिवक्ता जैन ने बताया कि वर्तमान में 2500 से अधिक विभाग व लोक प्राधिकारी उस पोर्टल पर हैं, किंतु देश के अधिकांश उच्च न्यायालयों ने ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल नहीं बनाया। उनके अधीनस्थ आने वाले जनपद न्यायालयों का कोई आरटीआई पोर्टल नहीं बना है। आवेदकों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसके लिए उन्होंने जनहित रिट याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी बात रखी और बताया कि किसी भी हाईकोर्ट ने अपने जनपद न्यायालयों के लिए ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल की व्यवस्था नहीं की है। दिल्ली व मध्य प्रदेश उच्च न्यायालयों ने अपने लिए आरटीआई पोर्टल बना लिया है। मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने विभिन्न उच्च न्यायालयों के अधिवक्ताओं से प्रश्न किया कि उच्च न्यायालय आरटीआई पोर्टल क्यों नहीं बना सकते हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपना आरटीआई पोर्टल बना लिया है।
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अधिवक्ता जैन ने बताया कि वर्तमान में 2500 से अधिक विभाग व लोक प्राधिकारी उस पोर्टल पर हैं, किंतु देश के अधिकांश उच्च न्यायालयों ने ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल नहीं बनाया। उनके अधीनस्थ आने वाले जनपद न्यायालयों का कोई आरटीआई पोर्टल नहीं बना है। आवेदकों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसके लिए उन्होंने जनहित रिट याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई।
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सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी बात रखी और बताया कि किसी भी हाईकोर्ट ने अपने जनपद न्यायालयों के लिए ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल की व्यवस्था नहीं की है। दिल्ली व मध्य प्रदेश उच्च न्यायालयों ने अपने लिए आरटीआई पोर्टल बना लिया है। मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने विभिन्न उच्च न्यायालयों के अधिवक्ताओं से प्रश्न किया कि उच्च न्यायालय आरटीआई पोर्टल क्यों नहीं बना सकते हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपना आरटीआई पोर्टल बना लिया है।
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