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कूड़ा घोटाला: जांच के घेरे में आई एक और कंपनी, पुलिस ने नगर आयुक्त को लिखा पत्र
Fri, 24 Jul 2020 12:02 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 24 Jul 2020 12:02 AM IST
सार
- नगर निगम ने साक्ष्य दिए पांच के खिलाफ, तहरीर में चार का ही नाम
- पुलिस ने नगर आयुक्त से पूछा- इस कंपनी का नाम क्यों छोड़ा गया ?
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आगरा नगर निगम
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विस्तार
आगरा में घर-घर से कूड़ा उठाने के नाम पर किए गए 2.82 करोड़ रुपये के घोटाले में एक और कंपनी पुलिस की जांच के घेरे में आ गई है। नगर निगम की जांच रिपोर्ट में इसका नाम है लेकिन तहरीर में नहीं दिया गया था। इस कारण एफआईआर चार पर हुई। पुलिस ने अब नगर आयुक्त को पत्र भेजकर पूछा है कि इस कंपनी का नाम क्यों छोड़ा गया ?
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केस हरीपर्वत थाने में 13 दिन पहले दर्ज कराया गया था। तहरीर के साथ 200 पेज की जांच रिपोर्ट दी गई। थाना प्रभारी निरीक्षक अजय कौशल ने बताया कि इस रिपोर्ट के अध्ययन से पता चला कि कूड़ा उठाने का ठेका पांच कंपनियों को दिया गया था। नगर निगम ने मई-जून, 2019 में कूड़ा उठाए जाने की जांच कराई तो पांचों कंपनियों की गड़बड़ी मिली।
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लेकिन एफआईआर में सिर्फ चार को नामजद किया गया है। इनमें से तीन झांसी की हैं? मैसर्स अरवा एसोसिएट, मैसर्स सोसायटी फोर एजुकेशन एंड वेलफेयर फोर ऑल और ओम मोटर्स। एक कंपनी ग्वालियर की है एसआरएमटी वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड।
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सिर्फ 7.2 फीसदी घरों से उठाया था कूड़ा
इंस्पेक्टर ने बताया कि नगर निगम की जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि स्पार्क ग्लोबल कंपनी को साकेत और गांधीनगर से कूड़ा उठाना था। कंपनी ने दावा किया था कि 2019 के मई में 1,45,371 और फिर जून में भी इतने ही घरों से कूड़ा उठाया। निगम की जांच में पाया गया कि मई में सिर्फ 7.2 फीसदी (10,467 घर) और जून में 9.43 फीसदी (13,708 घरों) से कूड़ा उठाया गया।
10 दिन में एक ने भी बयान दर्ज नहीं कराया
पुलिस ने 13 जुलाई को चारों कंपनियों के अधिकारियों को नोटिस जारी कर उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था। इंस्पेक्टर ने बताया कि अब तक एक भी नहीं आया है। नगर आयुक्त से पूछा था कि कंपनियों के फर्जी बिल किन-किन कर्मचारियों और अधिकारियों ने पास किए। उनके भी नाम नहीं मिले हैं। पुलिस टीम अगले सप्ताह झांसी और ग्वालियर जाकर बयान दर्ज करेगी।
संबंधित खबर- डोर-टू डोर कूड़ाः घोटालेबाज कंपनियों ने अधिकारियों के नियम किए तार-तार, निगम अफसरों पर लगे आरोप
10 दिन में एक ने भी बयान दर्ज नहीं कराया
पुलिस ने 13 जुलाई को चारों कंपनियों के अधिकारियों को नोटिस जारी कर उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था। इंस्पेक्टर ने बताया कि अब तक एक भी नहीं आया है। नगर आयुक्त से पूछा था कि कंपनियों के फर्जी बिल किन-किन कर्मचारियों और अधिकारियों ने पास किए। उनके भी नाम नहीं मिले हैं। पुलिस टीम अगले सप्ताह झांसी और ग्वालियर जाकर बयान दर्ज करेगी।
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