पालना देगा नया जीवन: अनचाहे नवजात को मारें या फेंके नहीं, यहां छोड़ें, आगरा में एसएन मेडिकल कॉलेज की पहल
आगरा में अब अनचाहे नवजात शिशुओं को पालना नया जीवन देगा। यह पहल एसएन मेडिकल कॉलेज की तरफ से की गई है। लोगों से अपील की गई है कि अनचाहे नवजात को मारें या फेंके नहीं पालने में छोड़ दें।
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उत्तर प्रदेश के आगरा में अनचाहे नवजात शिशुओं को अब आश्रय पालना में छोड़ा जा सकता है। यह पालना एसएन मेडिकल कॉलेज में एमसीएच विंग (स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के पास) के करीब स्थापित किया गया। शुक्रवार को उच्च शिक्षामंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने आश्रय पालना स्थल का लोकार्पण किया।
मौके पर महेशाश्रम, मां भगवती विकास संस्थान उदयपुर के संस्थापक व जीवन रक्षण अभियान के संचालक योग गुरु देवेंद्र अग्रवाल, आरएसएस के प्रांत सह सेवा प्रमुख श्याम किशोर गुप्ता, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता मौजूद रहे।
एलटी थ्री में आयोजित कार्यक्रम में उच्च शिक्षामंत्री ने कहा कि कोई अनचाही संतान जन्म लेती है तो उसे मारे नहीं या इधर-उधर नही फेंकें, अपनी पहचान बताए बिना उसे इस आश्रय पालना स्थल में छोड़ जाएं। ऐसे लोगों की पहचान गुप्त रहेगी। संबंधित के विरुद्ध कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इच्छुक दंपती विधि अनुरूप ले सकेंगे गोद
श्याम किशोर गुप्ता ने कहा कि आश्रय पालना स्थलों के माध्यम से हर अनचाहे नवजात शिशु को जीने का अधिकार प्राप्त हो सकेगा। साथ ही इच्छुक दंपती इन मासूम को विधि अनुरूप गोद लेकर अपना परिवार पूरा कर सकेंगे।
योग गुरु देवेंद्र अग्रवाल ने कहा कि आश्रय पालन स्थल में प्राप्त शिशु को जिला बाल कल्याण समिति की ओर से विधि के अनुरूप दत्तक ग्रहण के लिए स्वतंत्र घोषित किया जाएगा। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण की ओर से शिशु के दत्तक ग्रहण की कार्यवाही की जाएगी।
शिशु को पुनर्वास कर दिया जाएगा
इसके बाद जिला न्यायालय की ओर से उस शिशु को दत्तक ग्रहण के माध्यम से पुनर्वास कर दिया जाएगा। इससे शिशु को एक नया जीवन और नया नाम मिलेगा। डॉ. प्रशांत लवानिया ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. प्रीति भारद्वाज ने किया। कार्यक्रम में सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, नर्सिंग स्टाफ, कर्मचारी, आशा कर्मी व छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।
हाईटेक मोशन सेंसर है लगा
डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि आश्रय पालना स्थल हाईटेक मोशन सेंसर से युक्त हैं, जिससे की पालना स्थल में शिशु को छोड़ने के 2 मिनट बाद चिकित्सालय के लेबर रूम में अपने आप घंटी बजेगी। इस दो मिनट के समय में छोड़ने वाला व्यक्ति आसानी से सुरक्षित रूप से वहां से जा सकेगा। घंटी बजते ही चिकित्साकर्मी की ओर से आश्रय पालना स्थल से शिशु को तत्काल प्राप्त कर उसकी चिकित्सकीय व व्यक्तिगत देखभाल की जाएगी। शिशु के स्वस्थ होने पर उसे तत्काल नजदीकी राजकीय मान्यता प्राप्त शिशु गृह में भेज दिया जाएगा।