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गंगा डॉल्फिन डे : गंगानदी में डॉल्फिन मछली को बचाने में जुटा है डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, राष्ट्रीय मछली का दर्जा है प्राप्त
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हजारा नहर में अठखेलियां करती डॉल्फिन।
- फोटो : KASGANJ
कासगंज। राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन जिले की गंगानदी की सीमा में कई बार देखी गई हैं। डब्ल्यू डब्ल्यू एफ की टीम के सर्वेक्षण में डॉल्फिन गंगा में पाई गई हैं। कछला से कादरगंज तक कई डॉल्फिन देखी गई हैं। इस जलजीव के संरक्षण के लिए डब्ल्यू डब्ल्यू एफ(वल्र्ड वाइल्ड लाइफ फंड) ने कवायद तेज की है। वहीं गंगा से हजारा नहर में पहुंची डॉल्फिन का परिवार यहां हजारा नहर के झाल के पुल पर रहा, लेकिन अब यह परिवार दिखाई नहीं देता। विशेषज्ञ बताते हैं कि अब यह परिवार आगे बढ़ चुका है।
मंगलवार को डॉल्फिन दिवस है। दुनिया के दुर्लभ जीवों में से एक विलुप्तप्राय होती डॉल्फिन को लगभग चार साल पहले भारत सरकार ने राष्ट्रीय जल जीव घोषित किया था। जिससे कि उसका बेहतर संरक्षण हो सके। इसलिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के द्वारा गंगा का सर्वेक्षण करके डॉल्फिन की जानकारी जुटाई गई। डॉल्फिन की संख्या में हो रही कमी को दूर करने के लिए संरक्षण का विशेष अभियान चलता है। विशेषज्ञों के मुताबिक डॉल्फिन साफ और गहरे पानी में रहना पसंद करती है।
इसी साल जनवरी माह में डॉल्फिन का एक परिवार हजारा गंग नहर में पहुंच गया था। वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने सर्वेक्षण के बाद संरक्षण की पहल की। यहां गहरे पानी में यह परिवार रुका। प्रतिदिन दो किलोमीटर के दायरे में यह परिवार अठखेलियां करता था। यहां प्रतिदिन डॉल्फिन परिवार की अठखेलियां देखने के लिए लोग पहुंचते थे, लेकिन अब जलीय जीव प्रेमियों में मायूसी दिख रही है।
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ये कहते हैं विशेषज्ञ
- डॉल्फिन की तलाश में संरक्षण किया जा रहा है। कादरगंज में गंगानदी का गहरा जलस्तर और हजारा नहर का गहरा पानी डॉल्फिन के संरक्षण के लिए बेहतर है। हजारा नहर में जो डॉल्फिन परिवार देखा था वह अब आगे बढ़ गया है। - हिमांशु कुमार, कॉर्डिनेटर, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ
- डॉल्फिन के संरक्षण के लिए प्रयास जारी हैं। जो डॉल्फिन परिवार आया था वह आगे बढ़ गया यह उसकी स्वतंत्रता है। जलीय जीवों को बंदिश में नहीं रखा जा सकता। डॉल्फिन पानी में रहने के कुछ देर बाद सांस लेने के लिए ऊपर आती हैं। यह अठखेलियां आकर्षक होती हैं। - हरि शुक्ला, डीएफओ
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मंगलवार को डॉल्फिन दिवस है। दुनिया के दुर्लभ जीवों में से एक विलुप्तप्राय होती डॉल्फिन को लगभग चार साल पहले भारत सरकार ने राष्ट्रीय जल जीव घोषित किया था। जिससे कि उसका बेहतर संरक्षण हो सके। इसलिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के द्वारा गंगा का सर्वेक्षण करके डॉल्फिन की जानकारी जुटाई गई। डॉल्फिन की संख्या में हो रही कमी को दूर करने के लिए संरक्षण का विशेष अभियान चलता है। विशेषज्ञों के मुताबिक डॉल्फिन साफ और गहरे पानी में रहना पसंद करती है।
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इसी साल जनवरी माह में डॉल्फिन का एक परिवार हजारा गंग नहर में पहुंच गया था। वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने सर्वेक्षण के बाद संरक्षण की पहल की। यहां गहरे पानी में यह परिवार रुका। प्रतिदिन दो किलोमीटर के दायरे में यह परिवार अठखेलियां करता था। यहां प्रतिदिन डॉल्फिन परिवार की अठखेलियां देखने के लिए लोग पहुंचते थे, लेकिन अब जलीय जीव प्रेमियों में मायूसी दिख रही है।
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ये कहते हैं विशेषज्ञ
- डॉल्फिन की तलाश में संरक्षण किया जा रहा है। कादरगंज में गंगानदी का गहरा जलस्तर और हजारा नहर का गहरा पानी डॉल्फिन के संरक्षण के लिए बेहतर है। हजारा नहर में जो डॉल्फिन परिवार देखा था वह अब आगे बढ़ गया है। - हिमांशु कुमार, कॉर्डिनेटर, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ
- डॉल्फिन के संरक्षण के लिए प्रयास जारी हैं। जो डॉल्फिन परिवार आया था वह आगे बढ़ गया यह उसकी स्वतंत्रता है। जलीय जीवों को बंदिश में नहीं रखा जा सकता। डॉल्फिन पानी में रहने के कुछ देर बाद सांस लेने के लिए ऊपर आती हैं। यह अठखेलियां आकर्षक होती हैं। - हरि शुक्ला, डीएफओ