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पेट में रखी खोपड़ी की हड्डी ने 14 महीने तक दिया दर्द, 'आयुष्मान' से मिली साधना को नई जिंदगी
Sat, 16 Nov 2019 09:59 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 16 Nov 2019 09:59 AM IST
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साधना का चेकअप करते डॉ.निमित
- फोटो : अमर उजाला
आयुष्मान योजना गरीबों के लिए वरदान साबित हो रही है। फिरोजाबाद में धन अभाव के कारण साधना को पेट में रखी खोपड़ी की हड्डी ने 14 माह तक दर्द दिया। जब 'आयुष्मान' मिला तो साधना देवी को नया जीवन मिल गया। आज साधना पूरी तरह से स्वस्थ्य है।
टूंडला के गांव मोहम्मदाबाद निवासी साधना देवी पत्नी नरेश कुमार का 14 माह पूर्व वाहन से दुर्घटना हो गई थी। इसमें साधना के दिमाग में गहरी चोट आई थी। उसे इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। दिमाग में सूजन न जाने के कारण ऑपरेशन करते समय साधना की खोपड़ी की हड्डी को पेट में रखा।
जो तीन माह बाद ऑपरेशन के माध्यम से पेट से हटाकर फिर से खोपड़ी में जोड़ी जानी थी। मगर साधना के पति इलेक्ट्रीशियन का कार्य करते हैं तो दोबारा ऑपरेशन का खर्चा उठाने में सक्षम नहीं थे। ऐसे में साधना का ऑपरेशन नहीं हो पा रहा था।
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टूंडला के गांव मोहम्मदाबाद निवासी साधना देवी पत्नी नरेश कुमार का 14 माह पूर्व वाहन से दुर्घटना हो गई थी। इसमें साधना के दिमाग में गहरी चोट आई थी। उसे इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। दिमाग में सूजन न जाने के कारण ऑपरेशन करते समय साधना की खोपड़ी की हड्डी को पेट में रखा।
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जो तीन माह बाद ऑपरेशन के माध्यम से पेट से हटाकर फिर से खोपड़ी में जोड़ी जानी थी। मगर साधना के पति इलेक्ट्रीशियन का कार्य करते हैं तो दोबारा ऑपरेशन का खर्चा उठाने में सक्षम नहीं थे। ऐसे में साधना का ऑपरेशन नहीं हो पा रहा था।
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14 महीने तक दर्द सहती रही साधना
साधना हर रोज दर्द से कराहती थी और सोते समय करवटें भी नहीं बदल पाती थी। इसके अलावा अन्य शरीरिक परेशानियां उसे दर्द देती रहीं। साधना अपनी जान को जोखिम में रखकर तीन माह की जगह 14 माह तक खोपड़ी की हड्डी पेट में रखी रही।
साधना का आयुष्मान भारत योजना कार्ड बना तो वो सेवार्थ संस्थान ट्रामा सेंटर में न्यूरोसर्जन डॉ. निमित गुप्ता के पास आईं। उसके बाद डॉ. निमित ने सफल ऑपरेशन किया और पेट से हड्डी निकालकर फिर से खोपड़ी में लगाया। आज साधना देवी पूरी तरह स्वस्थ्य है।
दूसरे चरण का होना था ऑपरेशन: डॉ.निमित
न्यूरोसर्जन डॉ. निमित ने बताया कि साधना का दूसरे चरण का ऑपरेशन होना था। पहला ऑपरेशन 14 माह पूर्व हुआ था। सिर की हड्डी पेट में रखी गई थी, जिसे दोबारा तीन माह बाद सिर में जोड़ना था। सिर में हड्डी न होने से चोट का खतरा, सिर दर्द, करवट न ले पाना सहित अन्य कई समस्याएं रहती हैं।
साधना का आयुष्मान भारत योजना कार्ड बना तो वो सेवार्थ संस्थान ट्रामा सेंटर में न्यूरोसर्जन डॉ. निमित गुप्ता के पास आईं। उसके बाद डॉ. निमित ने सफल ऑपरेशन किया और पेट से हड्डी निकालकर फिर से खोपड़ी में लगाया। आज साधना देवी पूरी तरह स्वस्थ्य है।
दूसरे चरण का होना था ऑपरेशन: डॉ.निमित
न्यूरोसर्जन डॉ. निमित ने बताया कि साधना का दूसरे चरण का ऑपरेशन होना था। पहला ऑपरेशन 14 माह पूर्व हुआ था। सिर की हड्डी पेट में रखी गई थी, जिसे दोबारा तीन माह बाद सिर में जोड़ना था। सिर में हड्डी न होने से चोट का खतरा, सिर दर्द, करवट न ले पाना सहित अन्य कई समस्याएं रहती हैं।
धन अभाव के कारण नहीं करा पा रहे थे ऑपरेशन
साधना के पति नरेश कुमार ने बताया कि धन अभाव से वो अपनी पत्नी का ऑपरेशन नहीं करा पा रहे थे। इलेक्ट्रीशियन का कार्य करते हैं तो सिर्फ घर खर्चे चला पाते है। पत्नी को तकलीफ होती थी, मगर पैसा न होने के कारण कुछ कर भी नहीं पा रहे थे। आयुष्मान योजना का कार्ड बना तो यह ऑपरेशन करा सके।