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दिवाली पर पटाखे चलाते वक्त बरतें सावधानी, नहीं तो बढ़ जाएगी मुसीबत

Wed, 07 Nov 2018 02:51 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Wed, 07 Nov 2018 02:51 PM IST
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Diwali safety tips during firecrackers celebrate Safe Deepavali
फाइल फोटो
दिवाली रोशनी और उल्लास का पर्व है। सजग और सावधान रहकर इस पर्व को और खुशनुमा बना सकते हैं। इसलिए आतिशबाजी चलाते वक्त सावधानियां बरतें। क्योंकि जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। खासतौर से बच्चों के लिए, तो ऐसे में अभिभावक बेहद सतर्कता बरतें। 
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ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. आलोक मित्तल ने कहा कि धमाकों की तेज आवाज से कान में दर्द, सुन्न होना, अस्थायी बहरापन की शिकायत आ सकती है। 90 डेसीबल तक सुनने की आदर्श स्थित है। 132 से 150 डेसीबल तक सुन्न होना और 200 डेसीबल से अधिक पर कान का पर्दा फट सकता है। जरूरी है कि बच्चों के कान में रुई लगाकर पटाखे चलवाएं। 
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एसएन मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. यतेंद्र चाहर ने बताया कि पटाखे चलाने से अंगुली जलना, हाथ-पैर जलने के ज्यादा मामले आते हैं। ऐसे में घर में बीटाडिन जरूर रखें और घाव को ठंडे पानी से धोकर लगाएं। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर प्रकाश ने बताया कि आंखों से पानी बहना, लान होना, करकराहट की दिक्कत सबसे ज्यादा रहती है। 
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ये करें प्राथमिक उपचार

प्राथमिक उपचार में आंखों को साफ पानी से धोएं और डॉक्टर के परामर्श से ड्राप डालें। जख्म या कार्निया चोटिल होने पर तत्काल विशेषज्ञ को दिखाएं। एसएन के वक्ष एवं क्षय रोग विशेषज्ञ डॉ. जीवी सिंह ने कहा कि पटाखों से निकलने वाला धुआं अस्थमा और सांस रोगियों के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है। धुएं से बचें, दवाएं बंद न करें। 

- जल जाने पर घाव को ठंडे पानी से धोएं।
- घाव पर सेवलॉन, डेटॉल कतई न लगाएं। 
- घाव पर बीटाडिन लगाएं, डाक्टर को दिखाएं।
- आंख में बारुद जाने पर साफ पानी से धोएं। 
- डाक्टर के परामर्श पर आई ड्राप डाल सकते हैं। 

पटाखे चलाते वक्त बरतें सावधानी

- तेज आवाज के पटाखे चलाने से बचें। 
- आंखों पर चश्मा लगाकर पटाखे चलाएं। 
- लकड़ी में मोमबत्ती बांधकर पटाखे को आग लगाएं। 
- बच्चों के कानों में रुई लगाकर चलवाएं पटाखे।
- अभिभावक अपनी निगरानी में पटाखे चलवाएं। 

एसएन इमरजेंसी के डॉक्टरों की छुट्टी रद्द 

एसएन मेडिकल कालेज के इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों के अवकाश रद्द कर दिए गए हैं। दिवाली के लिए इमरजेंसी में मेडिकल ऑफिसर के नेतृत्व में विशेषज्ञों की ड्यूटी लगाई गई है। इसमें नेत्र रोग, त्वचा रोग, सर्जरी रोग, फिजीशियन, वक्ष एवं क्षय रोग के चिकित्सक रहेंगे। 

इसके अलावा बर्न यूनिट, बाल रोग अनुभाग में विशेष इंतजाम किए गए हैं। एसआईसी डॉ. एसके मजूमदार ने बताया कि दिवाली के चलते इमरजेंसी चिकित्सकों के अवकाश रद्द कर दिए हैं। दवा, सर्जरी आइटम की उपलब्धता बढ़ा दी है। अतिरिक्त बर्न कक्ष भी बनाया है। 

रात आठ से 10 बजे के बीच ही चलेंगे पटाखे

उधर, दिवाली पर रात आठ से 10 बजे तक ही पटाखे चला सकेंगे। इसके बाद आतिशबाजी करते पकड़े जाने वालों पर कार्रवाई होगी। इसके लिए एडीएम सिटी केपी सिंह ने संबंधित मजिस्ट्रेटों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन के संबंध में निर्देश जारी किया है। कहा है कि पटाखे रात आठ से दस बजे के बीच ही चलेंगे। इस संबंध में विद्यालयों के बच्चों को पहले ही जागरूक करने के लिए प्रबंधनों को आदेश जारी किया जा चुका है।

प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। दिवाली की रात तो खुली हवा में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभिन्न माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से सभी विद्यालयों में भी जागरूकता के लिए निर्देश जारी किए गए थे। इसके तहत बच्चों को ईको फ्रेंडली पटाखों के प्रयोग के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया था। 
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