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'पॉकेट मनी' बचाकर भारत में रोशन की बच्चों की दिवाली, स्कॉटलैंड से त्योहार मनाने आया परिवार

Sun, 27 Oct 2019 12:59 PM IST
Abhishek Saxena उमेश भारद्वाज, अमर उजाला, एटा
उमेश भारद्वाज, अमर उजाला, एटा Published by: Abhishek Saxena Updated Sun, 27 Oct 2019 12:59 PM IST
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Diwali Celebration with Poor Children By Scotland Family
स्कॉट परिवार ने बच्चों को दिए दीपावली के तोहफे - फोटो : अमर उजाला
संस्कृति से ही संस्कार का जन्म होता है, भारतीय संस्कृति के इन्हीं संस्कारों से सराबोर नन्हें बच्चे सात समंदर पार से अपनों के बीच दीपावली मनाने पहुंचे। त्योहार की खुशियां गरीब बच्चों संग बांटने के लिए सब्जी, पौधे और चॉकलेट बेचकर पॉकेटमनी जुटाई और इससे गरीब बच्चों को खाना खिलाकर तोहफे देकर उनका त्योहार खुशमय बनाया।   
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शांति नगर निवासी सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त बीपी अग्रवाल और डाकघर की एजेंट कमलेश अग्रवाल के तीन बेटे-बेटियों में छोटे पुत्र डॉ. अभिषेक अग्रवाल वर्ष 1995 में यूक्रेन चले गए थे। वहां कुछ दिन नौकरी करने के बाद वर्ष 2002 में स्कॉटलैंड आ गए।
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यहां 2004 में रॉवर्ड गार्डन विवि में लेक्चरर हो गए। इस दौरान उनकी शादी कनाडा की लड़की स्नो से हुई जो एकाउंटेंट हैं। दंपती के दो संतान हैं। इनमें बड़ी बेटी नौ वर्षीय ऐला अग्रवाल कक्षा पांच और छोटा बेटा ऐड अग्रवाल किंग्स वेल्स स्कूल में कक्षा तीन के छात्र हैं। 
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Diwali Celebration with Poor Children By Scotland Family
ऐला अग्रवाल और ऐड अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
बच्चों को जब से यह पता चला कि दीपों का त्योहार दीपावली मूल से भारत का त्योहार है तो वह कई साल से इसे उत्साह से मनाने की तैयारियों में जुटे रहे। पिछले तीन साल से स्कूल की छुट्टी होने के बाद घर के गार्डन में उगी सब्जियां, पौधे और चॉकलेट को स्कूल के बाहर स्टॉल लगाकर बेचते हैं।

स्कॉटलैंड में एक पौधा करीब दो पाउंड में बिकता है, एक पांउड 90 रुपये का है। बच्चों ने अब तक पढ़ाई के साथ चैरिटी से पचास हजार रुपये जुटा लिए। इन्हीं से गरीब बच्चों को देने के लिए उपहार खरीदे।
 

गरीब बच्चों में जागी उत्सुकता
शांति नगर में एससी-एसटी के बच्चों के लिए ज्ञान भारती प्राइमरी आवासीय विद्यालय संचालित है। यहां करीब 75 बच्चे पढ़ते हैं। ऐला और ऐड गुरुवार को स्कूल में पहुंचे और बच्चों को बिस्कुट, नमकीन, दही, जलेबी सहित भोजन आदि परोसा और बाद में लड्डू का डिब्बा त्योहार पर घर ले जाने के लिए उपहार स्वरूप दिया, इन डिब्बों को भी बच्चों ने अपने हाथों से पैक किया। 
 
विरासत में मिली सेवा
बच्चों को चैरिटी की यह प्रेरणा विरासत में मिली है। बाबा बीपी अग्रवाल ने शांति नगर में दुर्गा मंदिर के निर्माण में सहयोग किया तो बुआ स्मिता अग्रवाल अलीगढ़ में संस्कार भारती से जुड़कर मलिन बस्तियों में बच्चों के हितार्थ काम करती हैं। पिता अभिषेक स्कॉटलैंड में चैरिटेबल ट्रस्ट चलाते हैं, इसके माध्यम से वह गरीबों को आवास बनाकर उपलब्ध कराते हैं।  
 
लंदन यूनिवर्सिटी के एग्जामनर बने
अभिषेक अग्रवाल पर भारत आने के बाद ई-मेल से सूचना आई। इसमें उन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन का एक्सटर्नल एग्जामनर नियुक्त किया गया है।
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