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UP: पेड़ों पर कंटीले तार, रातभर पहरा और गोपनीय निगरानी...जेल में बंदियों की सुरक्षा के लिए उठाए गए ये कदम
Sat, 11 Oct 2025 09:05 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 11 Oct 2025 09:05 AM IST
सार
जेल में सुसाइड रोकने के लिए पेड़ों पर कंटीले तार लगाए गए हैं। इतना ही नहीं टाॅयलेट में भी पहरा कर दिया गया है।
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आगरा जिला जेल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा जिला जेल में बंदियों की सुरक्षा के साथ ही आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए नई व्यवस्था की गई है। जेल परिसर में लगे तकरीबन 200 पेड़ों पर कंटीले तार लगाए गए हैं, जिससे कोई बंदी पेड़ पर चढ़कर कूदने या फंदा बनाने की कोशिश नहीं कर सके। इसके अलावा बैरक और अस्पताल के टाॅयलेट में भी रात में 12 घंटे पहरा दिया जा रहा है। लूट और डकैती के आरोप में निरुद्ध बंदियों की गतिविधियों की जानकारी भी गोपनीय तरीके से जेल प्रशासन ले रहा है।
26 अगस्त की रात में जिला कारागार के अस्पताल में बने टॉयलेट में चादर से फंदा बनाकर खंदाैली निवासी बंदी साैदान सिंह ने आत्महत्या कर ली थी। घटना के समय बंदीरक्षक माैजूद नहीं था। साैदान सिंह हत्या और जानलेवा हमले के मामले में 19 अप्रैल 2023 से जेल में बंद था। इससे पहले एक बंदी ने जेल परिसर में बने टॉवर से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। कई बार बंदी परिसर में लगे पेड़ों पर चढ़कर भी कूदने की घटनाएं कर चुके हैं।
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26 अगस्त की रात में जिला कारागार के अस्पताल में बने टॉयलेट में चादर से फंदा बनाकर खंदाैली निवासी बंदी साैदान सिंह ने आत्महत्या कर ली थी। घटना के समय बंदीरक्षक माैजूद नहीं था। साैदान सिंह हत्या और जानलेवा हमले के मामले में 19 अप्रैल 2023 से जेल में बंद था। इससे पहले एक बंदी ने जेल परिसर में बने टॉवर से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। कई बार बंदी परिसर में लगे पेड़ों पर चढ़कर भी कूदने की घटनाएं कर चुके हैं।
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इसको देखते हुए निगरानी की विशेष व्यवस्था की गई है। जेल अधीक्षक हरिओम शर्मा ने बताया कि लूट-डकैती के अलावा पारिवारिक झगड़े में आने वाले बंदियों की संख्या अधिक है। शुरू में कई बंदियों से मुलाकात करने वालों की संख्या अधिक होती है। जमानत नहीं होने की स्थिति में मुलाकात करने वालों की संख्या कम हो जाती है। परिवार में झगड़ा होने की स्थिति में कई बार परिजन भी नहीं आते हैं। ऐसे में बंदी अवसाद ग्रस्त हो जाते हैं। उनकी काउंसिलिंग कराई जाती है। इसके बावजूद तनाव दूर न होने की स्थिति में वो आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।
इन घटनाओं को रोकने के लिए जेल परिसर में लगे 200 पेड़ों पर कंटीले तार लगाए गए हैं। इसके अलावा बैरकों में बने टॉयलेट में निगरानी के लिए रात 8 से सुबह 8 बजे तक बंदीरक्षकों की ड्यूटी लगाई जा रही है। यही व्यवस्था जेल अस्पताल में भी की गई है।
कैमरों से निगरानी के साथ कंटीले तार भी लगाए गए
कैमरों से निगरानी के साथ कंटीले तार भी लगाए गए
जिला जेल में इस समय बंदियों की संख्या 2230 हैं। 34 बैरक बनी हैं। हर बैरक में शाैचालय है। परिसर में तकरीबन 275 से अधिक पेड़ हैं। इनमें मुख्य जेल में 200 के लगभग हैं। दिन में बंदी भोजन से लेकर नहाने और कपड़े धोने के लिए बैरकों से बाहर आते हैं। इस दाैरान ही वह पेड़ पर चढ़कर कूदने की कोशिश करते हैं। पहले कैमरों से निगरानी की जा रही थी। अब कंटीले तार भी लगा दिए गए हैं।
अपराधियों की गतिविधि पर नजर
जेल में 80 फीसदी बंदी बड़े अपराध से लेकर चोरी और लूट के आरोप में निरुद्ध हैं। वे गुटबाजी करते हैं। कई बार चम्मच, प्लेट, बल्ब से हमला करने की स्थिति में रहते हैं। इसके अलावा जूते के फीते, चादर और कपड़ों से भी आत्मघाती घटनाएं कर सकते हैं। इसको देखते हुए हर बैरक में बंदियों की गतिविधि पर गोपनीय तरीके से नजर रखने की व्यवस्था की गई है। किसी तरह की गुटबाजी की बात सामने आती है तो बंदियों को अलग-अलग बैरक में भेज दिया जाता है।
जेल में 80 फीसदी बंदी बड़े अपराध से लेकर चोरी और लूट के आरोप में निरुद्ध हैं। वे गुटबाजी करते हैं। कई बार चम्मच, प्लेट, बल्ब से हमला करने की स्थिति में रहते हैं। इसके अलावा जूते के फीते, चादर और कपड़ों से भी आत्मघाती घटनाएं कर सकते हैं। इसको देखते हुए हर बैरक में बंदियों की गतिविधि पर गोपनीय तरीके से नजर रखने की व्यवस्था की गई है। किसी तरह की गुटबाजी की बात सामने आती है तो बंदियों को अलग-अलग बैरक में भेज दिया जाता है।