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शोध में खुलासा: आंख में चोट के बाद इलाज में देरी से कम हो रही रोशनी, पुरुषों की संख्या अधिक
Sun, 19 Mar 2023 11:23 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
हितेश सिंह, आगरा
हितेश सिंह, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sun, 19 Mar 2023 11:23 AM IST
सार
एसएन मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में विकलांगता प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पहुंचने वाले 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों पर किया गया शोध।
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आंख
- फोटो : istock
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विस्तार
आंख में चोट लगने के बाद इलाज कराने में देरी लोगों को भारी पड़ रही है। आंखों की रोशनी कम हो रही है। मरीज जितनी देर करता जाता है, समस्या उतनी अधिक बढ़ जाती है। एसएन मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में इस पर शोध किया गया है।
नेत्र रोग की डॉ. स्निग्धा सेन की देखरेख और विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु यादव व डॉ. पिंकी वर्मा के मार्गदर्शन में डॉ. मुकेश प्रकाश ने आंखों की विकलांगता का प्रमाणपत्र बनवाने आने वाले 40 वर्ष से कम आयु के मरीजों पर शोध किया है। डॉ. मुकेश प्रकाश ने बताया कि उन्होंने दिसंबर 2020 से जून 2022 तक 172 लोगों पर काम किया। अधिकतर लोगों में ट्रॉमा (चोट लगने) की वजह से आंखों की रोशनी कम हुई।
इसमें भी खेती का काम करने वाले मजदूरों की संख्या अधिक रही। काम करने के दौरान उनकी आंख में चोट आई। डॉक्टरों के पास समय से पहुंचे नहीं या मनमाना उपचार कर लिया। इससे उनकी समस्या बढ़ गई। डॉ. मुकेश प्रकाश का कहना है कि लोग समय से इलाज कराने के लिए पहुंचते तो आंखों की रोशनी बचाई जा सकती थी।
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नेत्र रोग की डॉ. स्निग्धा सेन की देखरेख और विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु यादव व डॉ. पिंकी वर्मा के मार्गदर्शन में डॉ. मुकेश प्रकाश ने आंखों की विकलांगता का प्रमाणपत्र बनवाने आने वाले 40 वर्ष से कम आयु के मरीजों पर शोध किया है। डॉ. मुकेश प्रकाश ने बताया कि उन्होंने दिसंबर 2020 से जून 2022 तक 172 लोगों पर काम किया। अधिकतर लोगों में ट्रॉमा (चोट लगने) की वजह से आंखों की रोशनी कम हुई।
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इसमें भी खेती का काम करने वाले मजदूरों की संख्या अधिक रही। काम करने के दौरान उनकी आंख में चोट आई। डॉक्टरों के पास समय से पहुंचे नहीं या मनमाना उपचार कर लिया। इससे उनकी समस्या बढ़ गई। डॉ. मुकेश प्रकाश का कहना है कि लोग समय से इलाज कराने के लिए पहुंचते तो आंखों की रोशनी बचाई जा सकती थी।
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