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Agra News: करोड़ों का ठग खातों में कंगाल, पीड़ितों की रकम वापसी पर उठा सवाल

Fri, 06 Jun 2025 11:20 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Fri, 06 Jun 2025 11:20 PM IST
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Crores of rupees fraudulently siphoned off accounts, question raised on refund of victims' money
मैनपुरी। सेना भर्ती प्रशिक्षण के नाम पर अवैध रूप से संचालित ''''भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स सेंटर'''' के संचालक अरविंद पांडेय के कारनामे हर दिन नए रूप में सामने आ रहे हैं। वहीं, ठगी के शिकार हुए हजारों पीड़ितों को उनकी रकम कैसे वापस मिलेगी, यह सवाल आज भी अनुत्तरित है। अरविंद के बैंक खातों में कोई बड़ी रकम नहीं मिली है, उसकी अचल संपत्ति का भी कोई सुराग नहीं है, और न ही उससे कोई नकदी बरामद हुई है। इस गिरोह का कोषाध्यक्ष बिहार का प्रकाश अभी भी फरार है। पुलिस को उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी से ठगी गई करोड़ों की रकम का पता चलेगा। शुक्रवार को दो नए पीड़ित सामने आए। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के आनंद कुमार ने किशनी थाने में बताया कि सेंटर में भर्ती के लिए उनसे 1.18 लाख रुपये की मांग की गई थी। उन्होंने 2250 रुपये ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फीस दी थी और उन्हें एक जॉइनिंग लेटर व आईकार्ड भी दिया गया था। अरविंद और उसकी सहयोगी महिला मित्र की गिरफ्तारी के बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ। आनंद अपनी ओर से भी एक मामला दर्ज कराएंगे। कन्नौज के एक युवक ने भी अपनी पहचान उजागर किए बिना किशनी पुलिस को बताया कि उसने भी इस ट्रेनिंग सेंटर से प्रशिक्षण लिया था। दाखिले के लिए उससे 1.20 लाख रुपये फीस और 2100 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस ली गई थी। अरविंद यादव ने खुद को ''''डॉ. अरविंद यादव'''' और आर्मी अफसर बताया था, वर्दी भी पहने हुए था। एक एग्रीमेंट भी किया गया था जिसमें 3 महीने की ट्रेनिंग, उसके बाद 6 महीने तक ट्रेनिंग के साथ 14,800 रुपये प्रति माह देने और बाद में युवाओं को नेता या अभिनेता की सुरक्षा ड्यूटी में लगाने का वादा किया गया था। अरविंद पांडेय का परिवार मूल रूप से कुर्रा के राजपुर का रहने वाला है। उसकी मां मीरा ने बताया कि अरविंद 15-20 साल पहले ही परिवार को छोड़कर चला गया था और अब उनका उससे कोई संबंध नहीं है। अरविंद ने 2011 में शिकोहाबाद की निधि यादव से प्रेम विवाह किया था, जिसके बाद उसने परिवार से झगड़ा शुरू कर दिया और उन्हें छोड़कर चला गया। हाईस्कूल भी पास न करने वाले अरविंद ने 2014 में मैनपुरी में मोबाइल की दुकान खोलकर ठगी की दुनिया में कदम रखा। वह सिम खरीदने आने वाले लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उनके नाम पर बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से लोन लेता था। शहर कोतवाली में उसके खिलाफ इस मामले में भी केस दर्ज है। इसके बाद उसने फर्जी तरीके से ''''हिंदुस्तान दंत मंजन'''' के नाम से कंपनी खोली, फिर 2019 में ''''मिस इंडिया प्रतियोगिता'''' की तैयारी कराने के नाम पर देशभर की लड़कियों से ठगी की। उसने एक राजनीतिक दल भी बनाया और लोगों को जोड़ने के नाम पर पैसे ऐंठे। इसके बाद ''''नेशनल एंटी करप्शन क्राइम ब्यूरो'''' के नाम से संस्था संचालित कर लोगों को धमकाना और ठगना शुरू कर दिया।
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