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मां की मौत के सच से जानकर अनजान बनी रही वीना
मां की मौत के सच से जानकर अनजान बनी रही वीना
Updated Wed, 01 Mar 2017 11:57 PM IST
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मां की मौत के सच से जानकर अनजान बनी रही वीना
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अर्जुन नगर में एक मकान में विमला का कंकाल और उनकी बेटी वीना का शव मिलने के मामले ने पूरे शहर को झकझोर रखा है। शहर में हर किसी की जुबां पर तीन सवाल हैं। पहला इतने रसूखदार परिवार की महिलाएं मुफलिसी का शिकार कैसे हो गईं? दूसरा, वीना ने मां के शव के साथ छह महीने कैसे और क्यों बिताए? और तीसरा, उन्होंने मां की मौत का सच क्यों छिपाया? पुलिस के पास इनमें से किसी का जवाब नहीं है। पुलिस मनोचिकित्सकों की राय ले रही है।
मनोचिकित्सक साफ तौर पर कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं हैं। कारण, एक तो उनके पास मां-बेटी की जिंदगी की सिर्फ थोड़ी सी जानकारी है। दूसरा, उन्होंने उन्हें कभी देखा नहीं। न ही उनकी बीमारी के बारे में कोई मेडिकल रिपोर्ट उनके पास है।
ऐसे में उनके व्यवहार और हालात को देखकर ही वह राय रख रहे हैं। उनका कहना है कि हो सकता है कि वीना किसी मनोरोग की शिकार रही हों। यह केस सिजोफेनिया का लग रहा है।
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इसके शिकार मरीज अपनी अलग दुनिया में रहना चाहते हैं। कई बार वे सच जानकर भी उससे अनजान बने रहते हैं। यह ऑड एंड एसेन्ट्रिक बिहेवियर ( विचित्र और सामाजिक मान्यताओं से विकेंद्रित व्यवहार) कहलाता है।
अलग-अलग मरीज में इसकी अलग-अलग वजह होती है। कोई मानसिक कमजोरी के चलते ऐसा करता है तो- कोई किसी के अत्याधिक लगाव के चलते उसके साथ अनहोनी होने पर अनजान बना रहता है। उसका दिमागयह स्वीकार ही नहीं करता कि ऐसा हो सकता है। वह जानता है लेकिन मानता नहीं। सच से अनजान बने रहना चाहता है। दूसरे के सामने अंजानेपन को साबित करता है। हो सकता है कि वीना सिजोफेनिया की ऐसी ही मरीज रही हों। सवाल यह है कि वह तो डबल एमए और पीएचडी थी। देखने में उनका व्यवहार भी सामान्य था। इस पर मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के चिकित्साधीक्षक डा. दिनेश राठौर का कहना है कि यह जरूरी नहीं कि सिजोफेनिया के मरीज मंदबुद्धि हों। पढ़ाई लिखाई में होशियार लोगों में से भी इसके शिकार हो जाते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण अमेरिका के महान गणितज्ञ जॉन नास हैं। उन्हें नोबल पुरस्कार मिला। वह सिजोफेनिया के मरीज थे।
सामने नहीं आना चाहता विमला का परिवार
विमला का मायका रावतपाड़ा का बताया गया है। उनके पिता गोपालदास अग्रवाल अपने जमाने के बड़े सेठ थे। पुलिस उनके घर का पता लगा रही है। रावतपाड़ा के लोगों का कहना है कि हो सकता है कि वे लोग सामने न आना चाहते हों। यहां बहुत समय पहले गोपालदास नाम के दो लोग रहते थे। इनमें से एक ने दो शादियां की थीं। विमला के पिता के बारे में भी यही बताया जा रहा है कि उन्होंने दो शादियां कीं, लेकिन अभी तक कोई सामने नहीं आया है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि रावतपाड़ा से काफी लोग बाहर चले गए हैं। कमला नगर और बल्केश्वर में जाकर बस गए हैं। कई लोग शहर से ही बाहर चले गए। हो सकता है कि विमला का परिवार भी बाहर चला गया हो।
पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं
विमला के कंकाल का पोस्टमार्टम बुधवार को किया गया। इसमें मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। इसका दाह संस्कार वीरेंद्र चाहर ने किया। चाहर उस मकान के मालिक हैं जिसमें विमला और वीना रहती थीं। डाक्टरों ने हड्डी और बाल के सैंपल भी लिए हैं। वीना के शव से भी सैंपल लिए गए थे। इनका डीएनए परीक्षण कराया जाएगा ताकि इसका साक्ष्य मिल सके कि वीना, विमला की बेटी थी।
अजीबो-गरीब व्यवहार
- मकान मालिक वीरेंद्र चाहर वीना से 13 दिसंबर 2016 को मिले थे। वीना ने कहा था कि मां बीमार हैं, अस्पताल में भर्ती हैं।
- वीरेंद्र चाहर को घर में बदबू आ रही थी। वीना ने कह दिया, गंदगी बहुत हो गई है और कोई बात नहीं है। सफाई करवा देंगी।
- जिस कमरे में विमला की लाश थी, वीना उसमें नहीं जाती थीं। कमरे में धूल जमी थी। अगर वह जाती तो पैरों के निशान मिलते।
- मां के जीवित रहते वीना घर का सामान लेने बाहर जाती थीं लेकिन उनकी मृत्यु के बाद वह घर से बाहर नहीं निकलीं।
मनोचिकित्सक साफ तौर पर कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं हैं। कारण, एक तो उनके पास मां-बेटी की जिंदगी की सिर्फ थोड़ी सी जानकारी है। दूसरा, उन्होंने उन्हें कभी देखा नहीं। न ही उनकी बीमारी के बारे में कोई मेडिकल रिपोर्ट उनके पास है।
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ऐसे में उनके व्यवहार और हालात को देखकर ही वह राय रख रहे हैं। उनका कहना है कि हो सकता है कि वीना किसी मनोरोग की शिकार रही हों। यह केस सिजोफेनिया का लग रहा है।
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इसके शिकार मरीज अपनी अलग दुनिया में रहना चाहते हैं। कई बार वे सच जानकर भी उससे अनजान बने रहते हैं। यह ऑड एंड एसेन्ट्रिक बिहेवियर ( विचित्र और सामाजिक मान्यताओं से विकेंद्रित व्यवहार) कहलाता है।
अलग-अलग मरीज में इसकी अलग-अलग वजह होती है। कोई मानसिक कमजोरी के चलते ऐसा करता है तो- कोई किसी के अत्याधिक लगाव के चलते उसके साथ अनहोनी होने पर अनजान बना रहता है। उसका दिमागयह स्वीकार ही नहीं करता कि ऐसा हो सकता है। वह जानता है लेकिन मानता नहीं। सच से अनजान बने रहना चाहता है। दूसरे के सामने अंजानेपन को साबित करता है। हो सकता है कि वीना सिजोफेनिया की ऐसी ही मरीज रही हों। सवाल यह है कि वह तो डबल एमए और पीएचडी थी। देखने में उनका व्यवहार भी सामान्य था। इस पर मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के चिकित्साधीक्षक डा. दिनेश राठौर का कहना है कि यह जरूरी नहीं कि सिजोफेनिया के मरीज मंदबुद्धि हों। पढ़ाई लिखाई में होशियार लोगों में से भी इसके शिकार हो जाते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण अमेरिका के महान गणितज्ञ जॉन नास हैं। उन्हें नोबल पुरस्कार मिला। वह सिजोफेनिया के मरीज थे।
सामने नहीं आना चाहता विमला का परिवार
विमला का मायका रावतपाड़ा का बताया गया है। उनके पिता गोपालदास अग्रवाल अपने जमाने के बड़े सेठ थे। पुलिस उनके घर का पता लगा रही है। रावतपाड़ा के लोगों का कहना है कि हो सकता है कि वे लोग सामने न आना चाहते हों। यहां बहुत समय पहले गोपालदास नाम के दो लोग रहते थे। इनमें से एक ने दो शादियां की थीं। विमला के पिता के बारे में भी यही बताया जा रहा है कि उन्होंने दो शादियां कीं, लेकिन अभी तक कोई सामने नहीं आया है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि रावतपाड़ा से काफी लोग बाहर चले गए हैं। कमला नगर और बल्केश्वर में जाकर बस गए हैं। कई लोग शहर से ही बाहर चले गए। हो सकता है कि विमला का परिवार भी बाहर चला गया हो।
पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं
विमला के कंकाल का पोस्टमार्टम बुधवार को किया गया। इसमें मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। इसका दाह संस्कार वीरेंद्र चाहर ने किया। चाहर उस मकान के मालिक हैं जिसमें विमला और वीना रहती थीं। डाक्टरों ने हड्डी और बाल के सैंपल भी लिए हैं। वीना के शव से भी सैंपल लिए गए थे। इनका डीएनए परीक्षण कराया जाएगा ताकि इसका साक्ष्य मिल सके कि वीना, विमला की बेटी थी।
अजीबो-गरीब व्यवहार
- मकान मालिक वीरेंद्र चाहर वीना से 13 दिसंबर 2016 को मिले थे। वीना ने कहा था कि मां बीमार हैं, अस्पताल में भर्ती हैं।
- वीरेंद्र चाहर को घर में बदबू आ रही थी। वीना ने कह दिया, गंदगी बहुत हो गई है और कोई बात नहीं है। सफाई करवा देंगी।
- जिस कमरे में विमला की लाश थी, वीना उसमें नहीं जाती थीं। कमरे में धूल जमी थी। अगर वह जाती तो पैरों के निशान मिलते।
- मां के जीवित रहते वीना घर का सामान लेने बाहर जाती थीं लेकिन उनकी मृत्यु के बाद वह घर से बाहर नहीं निकलीं।