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इन ‘निर्भयाओं’ को भी न्याय अधूरा लगेगा
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Thu, 24 Dec 2015 02:10 AM IST
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निर्भया का नाबालिग गुनहगार रिहा हुआ था तो उसकी मां ने कहा था कि न्याय अधूरा रहा। यह कसक आगरा की तमाम ‘निर्भयाओं’ को भी रहेगा जिनके नाबालिग गुनहगार कम सजा पाकर रिहा होंगे। क्योंकि बदला हुआ किशोर कानून (जुवेनाइल एक्ट) इन पर लागू नहीं होगा। निर्भया कांड के बाद से ही जिस संशोधन की मांग की जा रही थी, वह अब हुआ। इन गुनहगारों की जल्दी रिहाई और पीड़िताओं को कसक का कारण यही देरी होगा। स्थानीय बाल संप्रेक्षण गृह में बंद 82 किशोरों में से 50 जघन्य अपराधों के आरोपी हैं। इनमें आधे ऐसे हैं जो डेढ़-दो साल से बंद हैं। मतलब एक-डेढ़ साल में ही इन्हें आजादी मिलनी तय है।
बता दें, लोकसभा के बाद गत दिनों राज्यसभा में पास हुआ किशोर न्याय विधेयक राष्ट्रपति के पास जाएगा। उनकी मंजूरी के बाद यह कानून का रूप लेगा। जानकारों का कहना है कि संशोधित कानून उन वारदात पर ही लागू होगा जो इसके लागू होने की तिथि या बाद के होंगे। इसका अर्थ यह कि जो नाबालिग जघन्य अपराधों में पहले से बंद, या फरार हैं, उन पर दोष सिद्ध होने की सूरत में सजा पुराने कानून से ही मिलेगी। इसमें यह अधिकतम तीन साल है। यहां बाल संप्रेक्षण गृह में 16 से 18 वर्ष के 30 बंदी हैं। ये सभी निर्भया कांड के बाद गिरफ्तार किए गए हैं। इन पर रेप, हत्या, डकैती के आरोप हैं। इनमें 19 की उम्र 17 वर्ष या इससे अधिक है। ये आगरा, फीरोजाबाद, मैनपुरी , एटा और कासगंज के हैं। इनमें से दस पर रेप के बाद हत्या के आरोपी हैं।
जुवेनाइल एक्ट में संशोधन के मुताबिक उनको ही सजा मिलेगी, जो इसके लागू हो जाने के बाद अपराध करेंगे।
- अभय पाठक (अध्यक्ष, आगरा बार)
संसद पहले ही जिम्मेदारी समझ लेती, तो न निर्भया, न ही अन्य के नाबालिग गुनहगार इतनी जल्दी जेल से छूटते।
- करतार सिंह भारतीय (वरिष्ठ अधिवक्ता)
नए कानून में कई खूबियां हैं। 16 साल का किशोर भी बालिग माना जाएगा, यह बहुत पहले लागू होना चाहिए था।
- मान सिंह चौरान (वरिष्ठ अधिवक्ता)
राजनेताओं की चूक है। निर्भया कांड के बाद तो नया कानून बनाने में एक दिन की देरी भी नहीं होनी चाहिए थी।
- अशोक चौबे (वरिष्ठ अधिवक्ता)
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बता दें, लोकसभा के बाद गत दिनों राज्यसभा में पास हुआ किशोर न्याय विधेयक राष्ट्रपति के पास जाएगा। उनकी मंजूरी के बाद यह कानून का रूप लेगा। जानकारों का कहना है कि संशोधित कानून उन वारदात पर ही लागू होगा जो इसके लागू होने की तिथि या बाद के होंगे। इसका अर्थ यह कि जो नाबालिग जघन्य अपराधों में पहले से बंद, या फरार हैं, उन पर दोष सिद्ध होने की सूरत में सजा पुराने कानून से ही मिलेगी। इसमें यह अधिकतम तीन साल है। यहां बाल संप्रेक्षण गृह में 16 से 18 वर्ष के 30 बंदी हैं। ये सभी निर्भया कांड के बाद गिरफ्तार किए गए हैं। इन पर रेप, हत्या, डकैती के आरोप हैं। इनमें 19 की उम्र 17 वर्ष या इससे अधिक है। ये आगरा, फीरोजाबाद, मैनपुरी , एटा और कासगंज के हैं। इनमें से दस पर रेप के बाद हत्या के आरोपी हैं।
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जुवेनाइल एक्ट में संशोधन के मुताबिक उनको ही सजा मिलेगी, जो इसके लागू हो जाने के बाद अपराध करेंगे।
- अभय पाठक (अध्यक्ष, आगरा बार)
संसद पहले ही जिम्मेदारी समझ लेती, तो न निर्भया, न ही अन्य के नाबालिग गुनहगार इतनी जल्दी जेल से छूटते।
- करतार सिंह भारतीय (वरिष्ठ अधिवक्ता)
नए कानून में कई खूबियां हैं। 16 साल का किशोर भी बालिग माना जाएगा, यह बहुत पहले लागू होना चाहिए था।
- मान सिंह चौरान (वरिष्ठ अधिवक्ता)
राजनेताओं की चूक है। निर्भया कांड के बाद तो नया कानून बनाने में एक दिन की देरी भी नहीं होनी चाहिए थी।
- अशोक चौबे (वरिष्ठ अधिवक्ता)