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बर्खास्त सिपाही का गैंग भर्ती में भेजता था धावक
अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 29 Apr 2016 12:03 AM IST
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पुलिस भ्ारती दाौड़
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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पुलिस और पीएसी में सिपाही भर्ती के लिए पुलिस लाइन में चल रही शारीरिक दक्षता परीक्षा (दौड़) में बर्खास्त सिपाही प्रदीप और उसके साथी सतीश के गैंग ने सेंध लगा ली थी। वो एक से डेढ़ लाख रुपये में दौड़ में अधिक अंक (200 में से 190) से पास कराने का ठेका लेकर धावकों को अभ्यर्थी के रूप में भेजते थे। धावकों को 50 से 60 हजार रुपये तक दिए जाते थे। पुलिस ने मास्टर माइंड, बर्खास्त सिपाही के साथ तीन को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया।
बता दें, बुधवार को अभ्यर्थी ओमप्रकाश सिंह ने अपने स्थान पर देवेंद्र सिंह और अभ्यर्थी अरविंद ने अजय कुमार को दौड़ लगाने के लिए भेजा था। अजय ने बताया था कि दलाल प्रदीप और रामू ने उसे 50 हजार रुपये देने की बात कही थी। जांच में क्राइम ब्रांच और नाई की मंडी पुलिस को लगाया गया। एसपी ट्रैफिक आरके सिंह ने बताया कि डीआईओएस कार्यालय के पास से गुरुवार दोपहर 12 बजे सरगना सतीश (निवासी नगला मिया, थाना सादाबाद, हाथरस), प्रदीप (निवासी नगला सहसू, थाना राया, मथुरा) और रामू (निवासी दोल्ला, थाना राया, मथुरा) को पकड़ा है। राया का प्रदीप छत्तीसगढ़ पुलिस का बर्खास्त सिपाही है। चार साल पहले पुलिस में भर्ती हुआ था। अनुशासनहीनता के कारण उसे आठ महीने पहले बर्खास्त कर दिया गया था।
सेना भर्ती में भी 20 से ज्यादा बार लगाई दौड़
एसपी ट्रैफिक आरके सिंह के मुताबिक, पूछताछ मेें पता चला कि पुलिस में भर्ती होने से पहले प्रदीप अच्छा धावक था। वह सतीश के संपर्क में आ गया था। सतीश कई सालों से पुलिस और सेना में भर्ती के लिए दौड़ लगाने के लिए फर्जी अभ्यर्थी भेज रहा है। चार साल पहले प्रदीप को सेना में फर्जी अभ्यर्थी बनाकर 16 से 20 बार भर्ती के लिए दौड़ा चुका है। इसके लिए वह उसे 10-10 हजार रुपये देता था। दौड़ में पास होने पर कई अभ्यर्थियों का सेना में चयन भी हो चुका है। पुलिस में खुद के भर्ती होने के बाद प्रदीप ने यह काम छोड़ दिया। मगर, बर्खास्त होने के बाद फिर से सतीश के संपर्क मेें आकर रामू और फरार श्यामू के साथ दौड़ के लिए धावकों को ढूंढता था।
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सतीश करता था अभ्यर्थियों की तलाश
सतीश ऐसे अभ्यर्थियों की तलाश करता था, जिनकी मेरिट कम होने के साथ ही दौड़ लगाने में असमर्थ होते थे। वहीं उनसे एक से डेढ़ लाख रुपये लेकर पास कराने का ठेका लेता था। इसके बाद धावकों को ढूंढने का काम प्रदीप और उसके साथी करते थे। इसके लिए उन्हें कमीशन मिलता था।
भाई के लिए दौड़ने आया, पकड़ा गया
गुरुवार को एक बार फिर फर्जी अभ्यर्थी पकड़ लिया गया। अलीगढ़ के थाना गोंडा स्थित गांव तलेसरा निवासी अभ्यर्थी विश्वेंद्र सिंह के स्थान पर उसका छोटा भाई पुष्पेंद्र सिंह दौड़ लगाने के लिए आया। पुलिस ने प्रमाण पत्रों की जांच के दौरान उसे पकड़ लिया।
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बता दें, बुधवार को अभ्यर्थी ओमप्रकाश सिंह ने अपने स्थान पर देवेंद्र सिंह और अभ्यर्थी अरविंद ने अजय कुमार को दौड़ लगाने के लिए भेजा था। अजय ने बताया था कि दलाल प्रदीप और रामू ने उसे 50 हजार रुपये देने की बात कही थी। जांच में क्राइम ब्रांच और नाई की मंडी पुलिस को लगाया गया। एसपी ट्रैफिक आरके सिंह ने बताया कि डीआईओएस कार्यालय के पास से गुरुवार दोपहर 12 बजे सरगना सतीश (निवासी नगला मिया, थाना सादाबाद, हाथरस), प्रदीप (निवासी नगला सहसू, थाना राया, मथुरा) और रामू (निवासी दोल्ला, थाना राया, मथुरा) को पकड़ा है। राया का प्रदीप छत्तीसगढ़ पुलिस का बर्खास्त सिपाही है। चार साल पहले पुलिस में भर्ती हुआ था। अनुशासनहीनता के कारण उसे आठ महीने पहले बर्खास्त कर दिया गया था।
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सेना भर्ती में भी 20 से ज्यादा बार लगाई दौड़
एसपी ट्रैफिक आरके सिंह के मुताबिक, पूछताछ मेें पता चला कि पुलिस में भर्ती होने से पहले प्रदीप अच्छा धावक था। वह सतीश के संपर्क में आ गया था। सतीश कई सालों से पुलिस और सेना में भर्ती के लिए दौड़ लगाने के लिए फर्जी अभ्यर्थी भेज रहा है। चार साल पहले प्रदीप को सेना में फर्जी अभ्यर्थी बनाकर 16 से 20 बार भर्ती के लिए दौड़ा चुका है। इसके लिए वह उसे 10-10 हजार रुपये देता था। दौड़ में पास होने पर कई अभ्यर्थियों का सेना में चयन भी हो चुका है। पुलिस में खुद के भर्ती होने के बाद प्रदीप ने यह काम छोड़ दिया। मगर, बर्खास्त होने के बाद फिर से सतीश के संपर्क मेें आकर रामू और फरार श्यामू के साथ दौड़ के लिए धावकों को ढूंढता था।
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सतीश करता था अभ्यर्थियों की तलाश
सतीश ऐसे अभ्यर्थियों की तलाश करता था, जिनकी मेरिट कम होने के साथ ही दौड़ लगाने में असमर्थ होते थे। वहीं उनसे एक से डेढ़ लाख रुपये लेकर पास कराने का ठेका लेता था। इसके बाद धावकों को ढूंढने का काम प्रदीप और उसके साथी करते थे। इसके लिए उन्हें कमीशन मिलता था।
भाई के लिए दौड़ने आया, पकड़ा गया
गुरुवार को एक बार फिर फर्जी अभ्यर्थी पकड़ लिया गया। अलीगढ़ के थाना गोंडा स्थित गांव तलेसरा निवासी अभ्यर्थी विश्वेंद्र सिंह के स्थान पर उसका छोटा भाई पुष्पेंद्र सिंह दौड़ लगाने के लिए आया। पुलिस ने प्रमाण पत्रों की जांच के दौरान उसे पकड़ लिया।