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महक बिखेरने से पहले दुनिया छोड़ गई सुरभि
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Sun, 05 Jul 2015 02:11 AM IST
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रही, मगर उसे ममता का आंचल नसीब नहीं हो सका। जन्म लेने के बाद से ही वह
ममताभरे स्पर्श की आस में बिलखती रही। तबियत बिगड़ी तो उसे शिशु गृह से
एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। शिशु गृह
के संचालकों की मानें तो बच्ची को डायरिया था।
आगरा कैंट स्टेशन पर 18 मई को ट्रेन में पांच दिन की अबोध बच्ची लावारिस हालत में मिली थी। तब बच्ची स्वस्थ थी। जीआरपी ने चेतना संस्था की मदद से बच्ची को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया। जहां से डीपीओ के मौखिक आदेश पर उसे शाहगंज स्थित राजकीय शिशु गृह को सौंप दिया गया। चाइल्ड लाइन के सदस्यों ने बच्ची का चेकअप कराने की कोशिश की मगर एसएन अस्पताल और लेडी लायल में चेकअप नहीं किया गया। संस्था ने बच्ची का नाम सुरभि रखा। तभी से संस्था की महिला सदस्य उसकी देखभाल कर रही थीं। शिशु गृह की सरोज चतुर्वेदी ने बताया कि 24 जून को बच्ची को डायरिया होने पर एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल विभाग में भर्ती कराया। 29 जून को तबियत ठीक होने पर उसे शिशु गृह में ले गए। शुक्रवार दोपहर फिर से हालत खराब होने पर उसे भर्ती कराया, जहां शाम को उसकी मौत हो गई। अब 72 घंटे बाद उसका पोस्टमार्टम कराया जाएगा। एसएन के बाल रोग विभाग के डा. राकेश भाटिया ने बताया कि बच्ची एनमिक के साथ ही डायरिया से पीड़ित थी। बेहद कमजोर होने के कारण उसे बचाया नहीं जा सका।
आगरा कैंट स्टेशन पर 18 मई को ट्रेन में पांच दिन की अबोध बच्ची लावारिस हालत में मिली थी। तब बच्ची स्वस्थ थी। जीआरपी ने चेतना संस्था की मदद से बच्ची को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया। जहां से डीपीओ के मौखिक आदेश पर उसे शाहगंज स्थित राजकीय शिशु गृह को सौंप दिया गया। चाइल्ड लाइन के सदस्यों ने बच्ची का चेकअप कराने की कोशिश की मगर एसएन अस्पताल और लेडी लायल में चेकअप नहीं किया गया। संस्था ने बच्ची का नाम सुरभि रखा। तभी से संस्था की महिला सदस्य उसकी देखभाल कर रही थीं। शिशु गृह की सरोज चतुर्वेदी ने बताया कि 24 जून को बच्ची को डायरिया होने पर एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल विभाग में भर्ती कराया। 29 जून को तबियत ठीक होने पर उसे शिशु गृह में ले गए। शुक्रवार दोपहर फिर से हालत खराब होने पर उसे भर्ती कराया, जहां शाम को उसकी मौत हो गई। अब 72 घंटे बाद उसका पोस्टमार्टम कराया जाएगा। एसएन के बाल रोग विभाग के डा. राकेश भाटिया ने बताया कि बच्ची एनमिक के साथ ही डायरिया से पीड़ित थी। बेहद कमजोर होने के कारण उसे बचाया नहीं जा सका।