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यादव सिंह की जांच में रिश्तेदारों तक आएगी आंच

Fri, 17 Jul 2015 01:52 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा Updated Fri, 17 Jul 2015 01:52 AM IST
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relative will also effected in enquiry of yadav singh investigation
भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों से घिरे नोएडा विकास प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह के काले कारनामों की सीबीआई जांच का दायरा आगरा तक पहुंच सकता है। एक तो यादव सिंह ताजनगरी का ही रहने वाला है। दूसरा उसकी यहां बेशकीमती बेनामी संपत्त्ति बताई जाती है। उसकी छुपी दौलत तक पहुंचने के लिए केन्द्रीय जांच एजेंसी उसके रिश्तेदारों से भी पूछताछ कर सकती   है।
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यादव सिंह काफी समय से पत्नी और बच्चों समेत नोएडा में रहता है लेकिन उनके भाइयों समेत परिवार के बाकी लोग आगरा में ही रहते हैं। देवरी रोड पर उसका आलीशान मकान है।
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उस पर लगे भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों की सीबीआई जांच के आदेश होते ही उसके रिश्तेदारों में हड़कंप मचा है। पिछले साल उसके घर से बेशुमार दौलत मिलने पर भी रिश्तेदार भारी टेंशन में आ गए थे। तब भी उसकी संपत्ति की खुफिया जांच कराई गई थी। एक टीम आगरा भी आई थी।
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उसके परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि उसने आगरा में भी पैसा निवेश कर रखा है। आयकर की नजर से बचने के लिए रिश्तेदारों के नाम से जमीन ले रखी है। माना जा रहा है कि  सीबीआई इसकी जांच करने के लिए आ सकती है।
--। पत्नी के चुनाव लड़ने की थी चर्चा
आगरा। पिछले विधान सभा चुनाव में यादव सिंह की पत्नी के मैदान में उतरने की चर्चा चली थी। ऐसा कहा जा रहा था कि राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के साथ रिश्तों के चलते यादव सिंह अपनी पत्नी के लिए टिकट का इंतजाम कर लेगा। लेकिन यह सिर्फ चर्चा ही रही।
--। मदद में खूब लुटाया पैसा
यादव सिंह ने बेइंतहा पैसा कमाया। इसमें बदनामी मिली। सस्पेंड हुआ, जांच चली। शायद इसलिए वह अपनी छवि को लेकर चिंतित भी रहता था। वह आगरा के लोगों की नजर में दानवीर बनना चाहता था। इसलिए गरीब लड़कियों की शादी कराने से लेकर बेरोजगारों को रोजगार दिलाने तक में मदद की। बड़े बड़े अफसरों का उससे मिलना मुश्किल था लेकिन आगरा के लोगों को वह आसानी से समय दे देता था।

--। फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा
यादव सिंह की ससुराल फीरोजाबाद में है। उसके चार भाइयों में एक आर्मी से रिटायर्ड है। एक सेवला के पास आर्मी बेस वर्कशॉप में है। एक बैंक कर्मी है। एक उसके साथ ही रहता है। उसके परिवार से जुड़े लोगों ने बताया कि वह 1980 में जेई बना था। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। नोएडा विकास प्राधिकरण में पहुंचने के बाद उसका सिक्का खूब चला।
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