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बाबा मुुंशीदास और उनके भाई की हत्या में तीन गिरफ्तार
बाबा मुुंशीदास और उनके भाई की हत्या में तीन गिरफ्तार
Updated Mon, 29 May 2017 01:23 AM IST
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डौकी
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थाना डौकी के गांव नरि में बाबा मुंशीदास और उनके बडे़ भाई नाहर सिंह की हत्या के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बाबा की तीन महीने पहले और उनके भाई की शुक्रवार रात को हत्या हुई थी। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही परिवारीजनों ने नाहर सिंह के शव का अंतिम संस्कार किया।
बता दें, गांव नरि में 26 फरवरी को बाबा मुंशीदास को आश्रम में घुसकर गोली मार दी गई थी। इस मामले में मृतक के भांजे सोनू ने शिवराम, जतन, मुरारी (गांव नरि) और अशोक (पूठा झील) के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान शिवराम और जतन की नामजदगी गलत पाई गई। राकेश और अशोक के अलावा सोनू पुत्र अशोक का नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने रविवार को सोनू, अशोक को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे स्थित नदौता गांव के पास से गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से हत्या में प्रयुक्त तमंचा बरामद कर लिया। उधर, शुक्रवार को हुई नाहर सिंह की हत्या के मामले में प्रीतम सिंह ने राकेश, सोनू के अलावा सुभाष के खिलाफ (ठारखजूर, बिसारना, डौकी) सहित चार अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। विवेचना के दौरान अशोक पुत्र जयराम का नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने सोनू और अशोक की गिरफ्तारी के बाद सुभाष को गिरफ्तार कर लिया।
अंतिम संस्कार के बाद ही गांव से गई पुलिस
बाबा मुंशीदास के भाई नाहर सिंह की छत पर सोते समय हत्या कर दी गई थी। मृतक के भतीजे राजकुमार ने हत्यारोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की थी। रात में ही शव का पोस्टमार्टम करा दिया गया। शव गांव में पहुंचने पर परिवारीजन आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए। अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। सूचना पर पुलिस प्रशासनिक अधिकारी आ गए। उन्हें दोपहर में बताया कि तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके बाद ही लोगों ने अंतिम संस्कार किया। तब कहीं पुलिस गांव से गई।
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1.20 करोड़ की जमीन के विवाद में बाबा की हत्या
फतेहाबाद। डौैकी के गांव नरि में 26 फरवरी को हुई बाबा मुंशीदास की हत्या के पीछे 1.20 करोड़ रुपये की जमीन का विवाद सामने आया है। पुलिस ने दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद यह खुलासा किया। इंस्पेक्टर संजीव तोमर ने बताया कि आरोपी अशोक ने पूछताछ में कहा कि पांच साल पहले उसके पिता जयराम ने बाबा मुंशीदास से पांच लाख रुपये उधार लिए थे। बाबा ने 4.5 बीघा जमीन गिरवी रख ली थी। मगर, जमीन का बैनामा धोखे से अपनी सास तेजो देवी के नाम करा लिया था। जयराम पक्ष ने कुछ समय बाद रुपये वापस कर दिए। इसके बाद जमीन के कागजात मांगना शुरू कर दिया। जमीन की कीमत तकरीबन 1.20 करोड़ रुपये थी। बाबा उसे देना नहीं चाहते थे। दो साल पहले जयराम की हत्या हो गई। इस मामले में बाबा मुंशीदास, नाहर सिंह, प्रीतम, कोमल और बाबा के चेला सुभाष को जेल भेजा गया था। एक साल तक आरोपी जेल में रहे। जमानत पर रिहा हुए। उधर, अशोक ने जमीन पर अपना कब्जा कर रखा था। जेल से छूटने के बाद बाबा ने फिर से जमीन पर कब्जा लेने के प्रयास शुरू कर दिए। इस कारण ही अशोक पक्ष ने बाबा की हत्या कर दी।
हत्यारोपियों से मिल गया बाबा का चेला
उधर, बाबा के भाई की हत्या में भी अशोक शामिल था। पुलिस ने बताया कि आरोपी सुभाष बाबा का काफी करीबी था। जमीन और अन्य काम बाबा उससे ही कराते थे। मुंशीदास की हत्या के बाद सुभाष को लगा कि आश्रम पर वह कब्जा जमा लेगा। मगर, नाहर सिंह ने ऐसा नहीं होने दिया। आश्रम की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। इससे सुभाष खिन्न हो गया। मुंशीदास की दूसरी पत्नी उर्मिला सुभाष के पक्ष में थी। वह भी अपने नाम संपत्ति चाहती थी। इस पर सुभाष अशोक के साथ मिल गया। अशोक ने उसे लालच दिया कि पूर्व में दर्ज कराए पिता की हत्या के मुकदमे में उसके खिलाफ गवाही नहीं देंगे। इसके अलावा हत्या के बाद आश्रम पर उसका कब्जा भी हो जाएगा। इसके बाद सभी ने हत्या का प्लान बनाया। घटना वाले दिन आश्रम में आए। इसके बाद नाहर सिंह के माथे पर सोते समय भारी वस्तु से प्रहार करके हत्या कर दी। इसके बाद उसे छत से फेंक दिया।
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बता दें, गांव नरि में 26 फरवरी को बाबा मुंशीदास को आश्रम में घुसकर गोली मार दी गई थी। इस मामले में मृतक के भांजे सोनू ने शिवराम, जतन, मुरारी (गांव नरि) और अशोक (पूठा झील) के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान शिवराम और जतन की नामजदगी गलत पाई गई। राकेश और अशोक के अलावा सोनू पुत्र अशोक का नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने रविवार को सोनू, अशोक को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे स्थित नदौता गांव के पास से गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से हत्या में प्रयुक्त तमंचा बरामद कर लिया। उधर, शुक्रवार को हुई नाहर सिंह की हत्या के मामले में प्रीतम सिंह ने राकेश, सोनू के अलावा सुभाष के खिलाफ (ठारखजूर, बिसारना, डौकी) सहित चार अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। विवेचना के दौरान अशोक पुत्र जयराम का नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने सोनू और अशोक की गिरफ्तारी के बाद सुभाष को गिरफ्तार कर लिया।
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अंतिम संस्कार के बाद ही गांव से गई पुलिस
बाबा मुंशीदास के भाई नाहर सिंह की छत पर सोते समय हत्या कर दी गई थी। मृतक के भतीजे राजकुमार ने हत्यारोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की थी। रात में ही शव का पोस्टमार्टम करा दिया गया। शव गांव में पहुंचने पर परिवारीजन आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए। अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। सूचना पर पुलिस प्रशासनिक अधिकारी आ गए। उन्हें दोपहर में बताया कि तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके बाद ही लोगों ने अंतिम संस्कार किया। तब कहीं पुलिस गांव से गई।
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1.20 करोड़ की जमीन के विवाद में बाबा की हत्या
फतेहाबाद। डौैकी के गांव नरि में 26 फरवरी को हुई बाबा मुंशीदास की हत्या के पीछे 1.20 करोड़ रुपये की जमीन का विवाद सामने आया है। पुलिस ने दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद यह खुलासा किया। इंस्पेक्टर संजीव तोमर ने बताया कि आरोपी अशोक ने पूछताछ में कहा कि पांच साल पहले उसके पिता जयराम ने बाबा मुंशीदास से पांच लाख रुपये उधार लिए थे। बाबा ने 4.5 बीघा जमीन गिरवी रख ली थी। मगर, जमीन का बैनामा धोखे से अपनी सास तेजो देवी के नाम करा लिया था। जयराम पक्ष ने कुछ समय बाद रुपये वापस कर दिए। इसके बाद जमीन के कागजात मांगना शुरू कर दिया। जमीन की कीमत तकरीबन 1.20 करोड़ रुपये थी। बाबा उसे देना नहीं चाहते थे। दो साल पहले जयराम की हत्या हो गई। इस मामले में बाबा मुंशीदास, नाहर सिंह, प्रीतम, कोमल और बाबा के चेला सुभाष को जेल भेजा गया था। एक साल तक आरोपी जेल में रहे। जमानत पर रिहा हुए। उधर, अशोक ने जमीन पर अपना कब्जा कर रखा था। जेल से छूटने के बाद बाबा ने फिर से जमीन पर कब्जा लेने के प्रयास शुरू कर दिए। इस कारण ही अशोक पक्ष ने बाबा की हत्या कर दी।
हत्यारोपियों से मिल गया बाबा का चेला
उधर, बाबा के भाई की हत्या में भी अशोक शामिल था। पुलिस ने बताया कि आरोपी सुभाष बाबा का काफी करीबी था। जमीन और अन्य काम बाबा उससे ही कराते थे। मुंशीदास की हत्या के बाद सुभाष को लगा कि आश्रम पर वह कब्जा जमा लेगा। मगर, नाहर सिंह ने ऐसा नहीं होने दिया। आश्रम की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। इससे सुभाष खिन्न हो गया। मुंशीदास की दूसरी पत्नी उर्मिला सुभाष के पक्ष में थी। वह भी अपने नाम संपत्ति चाहती थी। इस पर सुभाष अशोक के साथ मिल गया। अशोक ने उसे लालच दिया कि पूर्व में दर्ज कराए पिता की हत्या के मुकदमे में उसके खिलाफ गवाही नहीं देंगे। इसके अलावा हत्या के बाद आश्रम पर उसका कब्जा भी हो जाएगा। इसके बाद सभी ने हत्या का प्लान बनाया। घटना वाले दिन आश्रम में आए। इसके बाद नाहर सिंह के माथे पर सोते समय भारी वस्तु से प्रहार करके हत्या कर दी। इसके बाद उसे छत से फेंक दिया।