एक बोरी जाली करेंसी जलाई, एक यमुना के पानी में बहाई

एक बोरी जाली करेंसी जलाई, एक यमुना के पानी में बहाई Updated Fri, 17 Feb 2017 12:35 AM IST
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जाली करेंसी की सप्लाई में पकड़ी गई एत्माद्दौला की फातिमा उर्फ लीची ने आठ नवंबर 2016 की रात आठ बजे जैसे ही टीवी पर नोटबंदी की खबर देखी, वैसे ही उसके होश उड़ गए। वह पूरी रात एक पल के लिए भी सो नहीं पाई। घर में एक -एक हजार के नकली नोट का पूरा संदूक जो भरा रखा था। इसमें लगभग दो बोरी नोट थे। उसने पहले इन्हें बैंक में जमा कराने की कोशिश की। इसमें कामयाब नहीं हुई तो 30 दिसंबर को एक बोरी नोट घर में ही जला दिए। दूसरी बोरी के नोट ले जाकर यमुना नदी में बहा दिए। यह जानकारी उसने एनआईए को पूछताछ में दी है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि लीची के पास सबसे बड़ी खेप नवंबर के शुरू में पहुंची थी। वह खुद हर महीने एक से डेढ़ लाख रुपये खपा देती थी। जाली नोटों को सब्जी मंडी में चलाती थी। घर का सामान, बच्चों के कपड़े, टीवी, फ्रिज सब जाली नोटों से खरीदती थी। नवंबर में उसके पास एप्पल शेख ने बड़ी खेप पहुंचाई। उसे याद नहीं कि कुल नोट कितने थे। सिर्फ इतना बताया कि दो बोरी में नोट रखने पड़े थे। पूरा बक्सा भर गया था। लेकिन इनकी सप्लाई होने से पहले ही नोटबंदी हो गई थी। वह आगरा और फिरोजाबाद के कई लोगों को जाली करेंसी की सप्लाई देती थी।
बैंक में जमा कराने की कोशिश की
आगरा। पुलिस का कहना है कि लीची ने नोटबंदी के बाद एक -एक हजार के नोट बैंकों में जमा कराने की कोशिश की। उसने अपने खाते में तो कुछ पैसे जमा करा दिए लेकिन इसके बाद डर गई। उसे लग रहा था कि ज्यादा रकम जमा कराई तो पकड़ में आ जाएगी। उसने पड़ोस की कई महिलाओं को 20 से 30 हजार रुपये लेकर भेजा, लेकिन वे भी हिम्मत न जुटा सकीं। इसके बाद उसे नोट जलाने और पानी में बहाने का फैसला लेना पड़ा।

बांग्लादेश के जाली करेंसी रैकेट में ब्रज की 20 महिलाएं
आगरा।जाली करेंसी के बांग्लादेशी रैकेट की जड़ें पूरे ब्रज में फैली हुई हैं। फातिमा उर्फ लीची ने एत्माद्दौला की ही 10-12 महिलाओं को लालच के जाल में फंसा लिया था। ये भी नकली नोट चला रही थीं। इसी तरह अनवार उल इस्लाम ने फिरोजाबाद में पूरा गिरोह तैयार कर रखा है। मथुरा और मैनपुरी में भी इस रैकेट के तार जुड़े बताए गए हैं। एनआईए और एटीएस आखिरी सिरे तक पहुंचने की कोशिश में लगी हैं।
लीची बांग्लादेश से 20 साल पहले बॉर्डर क्रॉस करके आई थी। पहले पश्चिम बंगाल में रिश्तेदारी में रही। फिर उसकी शादी आगरा के एत्माद्दौला के शेर अली से हो गई तो यहां आकर रहने लगी। जाली करेंसी के इस रैकेट में मास्टरमाइंड एप्पल शेख और कोरियर अनवार उल इस्लाम बांग्लादेश के चापई नवाबगंज में उसके पड़ोसी हैं।
अनवार 2004 से ब्रज में जाली करेंसी का काम कर रहा था। वह लीची के घर में अक्सर ठहरता था। एक बार तो एक महीने रहा। 2008 में उसे फिरोजाबाद में दो लाख रुपये जाली करेंसी के साथ पकड़ा था। इस केस में उसे छह साल की सजा हुई। 2014 में सजा पूरी कर बांग्लादेश चला गया।
इस दौरान लीची के संपर्क में दूसर कोरियर रहे। 2015 में अनवार ने बांग्लादेश में नया पासपोर्ट बनवाया। फिर से वीजा लिया और पहुंच गया फिरोजाबाद। इस बार उसने बांग्लादेशी मूल की महिलाओं के माध्यम से जाली नोट चलाने शुरू किए। इन महिलाओं का मायका मालदा, चापई नवाबगंज और आस पास है। इनके माध्यम से दूसरी महिलाओं को लालच देकर जोड़ा। पुलिस सूत्रों की मानें तो वह 20 महिलाओं को जोड़ चुका था। इनमें से दस आगरा की हैं। लीची को एनआईए रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। इसके बाद इन महिलाओं समेत रैकेट से जुड़े तमाम लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की चूक से बना अनवार का पासपोर्ट
आगरा। जाली करेंसी केस में छह साल कैद की सजा पूरी करने के बाद 2014 में जब अनवार रिहा हुआ तो पुलिस एक चूक कर बैठी। ऐसे मामलों में पासपोर्ट पर रेड साइन ( लाल निशान ) लगा दिया जाता है ताकि ऐसे व्यक्ति का उसके देश में फिर से पासपोर्ट न बने लेकिन फिरोजाबाद पुलिस ने ऐसा नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि उसका फिर से पासपोर्ट बन गया। वह 2015 में इसी पासपोर्ट पर भारत आया।

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