{"_id":"57f2b86c4f1c1b8b3226ffdd","slug":"gaga-got-bail-soon-surrender","type":"story","status":"publish","title_hn":"गागा को सरेंडर करते ही मिल गई जमानत ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
गागा को सरेंडर करते ही मिल गई जमानत
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 04 Oct 2016 01:28 AM IST
विज्ञापन
चौथ वसूली केस में गागा समेत चार ने किया समर्पण
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहुचर्चित भरतपुर हाउस गोलीकांड से जुड़े चौथ वसूली केस में आरोपी स्वदेश वर्मा उर्फ गागा समेत चार ने सोमवार को कोर्ट में सरेंडर कर दिया। चारों आरोपियों को जमानत मिल गई है।
ये लोग सरेंडर की अर्जी देने के बावजूद कोर्ट में पेश होने से काफी समय से बच रहे थे। बता दें, भरतपुर हाउस में 20 जून को जूता कारोबारी राजकुमार लालवानी की हत्या की गई थी। इसमें डिब्बा कारोबारी गागा, सराफ संजीव रस्तोगी, उनका ड्राइवर नामजद कराए गए थे। पुलिस ने पहले ड्राइवर को क्लीन चिट दी। फिर राजकुमार के परिवार के विरोध के बावजूद गागा का नाम निकाल दिया। इसी दौरान राजकुमार के भाई सुंदर लालवानी ने गागा और संजीव समेत छह लोगों के खिलाफ चौथ वसूली का केस दर्ज कराया। इन पर आरोप है कि इन्होंने दबाव बनाकर राजकुमार की प्रापर्टी खरीदी। उसे जो पैसा दिया, वह भी अपने खाते में जमा करवा लिया। इसके साक्ष्य पुलिस को दिए गए थे।
इस केस में संजीव रस्तोगी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। गागा पुलिस से बचता भाग रहा था। उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुए। तब भी भागता रहा। इसके बाद कुर्की पूर्व वारंट भी जारी हो गए। तब उसने सरेंडर की अर्जी दी। इसके बावजूद देरी पर देरी किए जा रहा था। लेकिन सोमवार दोपहर 12:30 बजे उसे सरेंडर कर दिया। उसके साथ अशोक कुमार वर्मा, अजय जैन और अनिल शर्मा ने भी समर्पण किया।
विज्ञापन
आरोपियों की तरफ से अधिवक्ता प्रवीन श्रीवास्तव, नाहर सिंह तोमर और अशोक गौतम ने कहा कि सह अभियुक्त संजीव रस्तोगी की जमानत मंजूर हो चुकी है, इसलिए इन चारों को भी जमानत दी जाए। उधर सुंदर लालवानी ने आरोपियों के जमानत प्रार्थना पत्र पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने याचना खारिज कर दी। आरोपियों को 20-20 हजार रुपये के दो-दो जमानती और इतनी ही राशि के मुचलकों पर जमानत दे दी गई।
पुलिस ने गिरफ्तारी का प्रयास ही नहीं किया
आगरा। गागा पर पुलिस पूरी तरह से मेहरबान रही। पहले उसका नाम राजकुमार की हत्या से निकाल दिया। इसके बाद चौथ वसूली केस में उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास ही नहीं किया। पुलिस सूत्रों की मानें तो वह शहर में ही था। पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए दबिश तक नहीं दी जबकि उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो चुका था।
विज्ञापन
ये लोग सरेंडर की अर्जी देने के बावजूद कोर्ट में पेश होने से काफी समय से बच रहे थे। बता दें, भरतपुर हाउस में 20 जून को जूता कारोबारी राजकुमार लालवानी की हत्या की गई थी। इसमें डिब्बा कारोबारी गागा, सराफ संजीव रस्तोगी, उनका ड्राइवर नामजद कराए गए थे। पुलिस ने पहले ड्राइवर को क्लीन चिट दी। फिर राजकुमार के परिवार के विरोध के बावजूद गागा का नाम निकाल दिया। इसी दौरान राजकुमार के भाई सुंदर लालवानी ने गागा और संजीव समेत छह लोगों के खिलाफ चौथ वसूली का केस दर्ज कराया। इन पर आरोप है कि इन्होंने दबाव बनाकर राजकुमार की प्रापर्टी खरीदी। उसे जो पैसा दिया, वह भी अपने खाते में जमा करवा लिया। इसके साक्ष्य पुलिस को दिए गए थे।
विज्ञापन
इस केस में संजीव रस्तोगी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। गागा पुलिस से बचता भाग रहा था। उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुए। तब भी भागता रहा। इसके बाद कुर्की पूर्व वारंट भी जारी हो गए। तब उसने सरेंडर की अर्जी दी। इसके बावजूद देरी पर देरी किए जा रहा था। लेकिन सोमवार दोपहर 12:30 बजे उसे सरेंडर कर दिया। उसके साथ अशोक कुमार वर्मा, अजय जैन और अनिल शर्मा ने भी समर्पण किया।
विज्ञापन
आरोपियों की तरफ से अधिवक्ता प्रवीन श्रीवास्तव, नाहर सिंह तोमर और अशोक गौतम ने कहा कि सह अभियुक्त संजीव रस्तोगी की जमानत मंजूर हो चुकी है, इसलिए इन चारों को भी जमानत दी जाए। उधर सुंदर लालवानी ने आरोपियों के जमानत प्रार्थना पत्र पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने याचना खारिज कर दी। आरोपियों को 20-20 हजार रुपये के दो-दो जमानती और इतनी ही राशि के मुचलकों पर जमानत दे दी गई।
पुलिस ने गिरफ्तारी का प्रयास ही नहीं किया
आगरा। गागा पर पुलिस पूरी तरह से मेहरबान रही। पहले उसका नाम राजकुमार की हत्या से निकाल दिया। इसके बाद चौथ वसूली केस में उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास ही नहीं किया। पुलिस सूत्रों की मानें तो वह शहर में ही था। पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए दबिश तक नहीं दी जबकि उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो चुका था।