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बाह में भैंस चोरी के मामले में कानून को लिया हाथ में
बाह में भैंस चोरी के मामले में कानून को लिया हाथ में
Updated Thu, 07 Apr 2016 01:58 AM IST
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मौके पर यदि पुलिस हस्तक्षेप न करती तो कुछ भी हो सकता था।
- फोटो : Demo pic
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चांद-सितारों की दूरी नाप रहे देश में अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी हैं इसका पता बुधवार को विक्रमपुर गांव की इस घटना से चलता है। भैंस चोरी के मामले में एक परिवार ने पुलिस की बजाय सगुनिया (तथाकथित नजूमी जो खोई वस्तु का पता बताते हैं) की शरण ली। यहां तक तो गनीमत थी। सगुनिया ने दूसरे गांव के एक युवक को भैंस चोर बताया तब भी ये पुलिस के पास न गए। इन लोगों ने कानून हाथ में लेते हुए युवक के घर हमला बोल दिया। उसे पीटा, धमकी दी कि भैंस न लौटाई तो जान से मार देंगे।
इस अंधविश्वास पर हैरत इसलिए भी ज्यादा है कि मामला गांव विक्रमपुर की ग्राम प्रधान के परिवार से जुड़ा है। पुलिस को दी गई तहरीर और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक चार दिन पहले प्रधान के परिवारी रामकेश की दो भैैंसें चोरी हो गईं। इसकी रिपोर्ट दर्ज कराने के बजाय संबंधित लोग खुद ही भैंसों की तलाश में जुट गए। इनमें ग्राम प्रधान के पति हरेंद्र मुखिया, सहदेव, राघवेंद्र भी शामिल थे। इन्होंने यहां-वहां सुरागरसी की कोशिश की। जहां-जहां संभव था, गए भी। तीन दिन बीतने के बाद भी भैंसों का पता नहीं लग सका। इसके बाद भी इन्होंने पुलिस से ज्यादा भरोसा एक सगुनिया पर जताया। इन्होंने उसकी शरण ली और भैंसों का पता बताने की गुहार की।
बताते हैं, सगुनिया के कहे मुताबिक ये लोग गांव चौरंगा बीहड़ निवासी देवेंद्र के घर पहुंच गए। आरोप है कि 20-25 की संख्या में पहुंचे इन लोगों ने देवेंद्र को भैंस चोर बताकर पीटना शुरू कर दिया। उन्होंने भैंस न लौटाने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दे डाली। हमलावरों के लौटने के बाद दहशतजदा देवेंद्र ने बाह थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए जानमाल की सुरक्षा की गुहार लगाई। पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है।
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इस अंधविश्वास पर हैरत इसलिए भी ज्यादा है कि मामला गांव विक्रमपुर की ग्राम प्रधान के परिवार से जुड़ा है। पुलिस को दी गई तहरीर और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक चार दिन पहले प्रधान के परिवारी रामकेश की दो भैैंसें चोरी हो गईं। इसकी रिपोर्ट दर्ज कराने के बजाय संबंधित लोग खुद ही भैंसों की तलाश में जुट गए। इनमें ग्राम प्रधान के पति हरेंद्र मुखिया, सहदेव, राघवेंद्र भी शामिल थे। इन्होंने यहां-वहां सुरागरसी की कोशिश की। जहां-जहां संभव था, गए भी। तीन दिन बीतने के बाद भी भैंसों का पता नहीं लग सका। इसके बाद भी इन्होंने पुलिस से ज्यादा भरोसा एक सगुनिया पर जताया। इन्होंने उसकी शरण ली और भैंसों का पता बताने की गुहार की।
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बताते हैं, सगुनिया के कहे मुताबिक ये लोग गांव चौरंगा बीहड़ निवासी देवेंद्र के घर पहुंच गए। आरोप है कि 20-25 की संख्या में पहुंचे इन लोगों ने देवेंद्र को भैंस चोर बताकर पीटना शुरू कर दिया। उन्होंने भैंस न लौटाने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दे डाली। हमलावरों के लौटने के बाद दहशतजदा देवेंद्र ने बाह थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए जानमाल की सुरक्षा की गुहार लगाई। पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है।
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