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पुलिस लाइन बनी अपराधियों के लिए मुफीद जगह
Updated Wed, 13 Sep 2017 11:50 PM IST
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Police Line
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मैनपुरी। पुलिस लाइन अब अपराधियों के मुफीद जगह बनती जा रही है। अपराधी बडे़ ही आराम से वारदात को अंजाम देकर निकल जाते हैं। पुलिस लाइन की सुरक्षा व्यवस्था को बीते एक माह में तीन बार अपराधियों ने चुनौती दी हैं। अभी तक कार्रवाई के नाम पर किसी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पुलिस लाइन में खुद पुलिसकर्मी और आम जनता असुरक्षित है। बीते एक माह में दो बड़ी वारदातों ने जहां सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है, वहीं इनके बाद भी कोई कार्रवाई न होने से महकमे में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
स्कूल से घर जाते समय लापता हुई छह साल की बच्ची का शव 11 अगस्त को पुलिस लाइन में आरआई के आवास के पीछे खेत में पड़ा मिला था। बालिका के साथ परिसर में बने प्रतीक्षालय के बाहर दुष्कर्म व कुकर्म करने के बाद गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। इसके खुलासे में जो आरोपी सामने आया था। वह मानसिक रूप से कमजोर था और टाफी का लालच देकर मासूम के साथ दरिंदगी के बाद हत्या कर दी थी।
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पुलिस लाइन परिसर में बने आरटीसी भवन के बाथरूम में दरोगा राधारमण का शव मिलने से सनसनी फैल गई। पहले तो घटना को पुलिस आत्महत्या मानती रही। मगर जब कानपुर में तैनात थाना बेवर क्षेत्र के गांव गढिया घुटारा निवासी आरोपी सत्यप्रकाश यादव मृतक के मोबाइल के साथ गिरफ्त में आया तो जांच की दिशा ही बदल गई।
सिपाही ने नशे में धुत होकर दरोगा की गला दबाकर हत्या करने का जुर्म कबूल किया था। इस कबूलनामे के बाद पुलिस ने उसे चालान कर जेल भेज दिया था। दरोगा की हत्या के साथ ही तीसरी घटना एक बैरक से एक दरोगा के 10 हजार रुपये चोरी की घटना भी हुई थी। मगर पीड़ित की ओर से थाने में कोई तहरीर नहीं दी गई।
तीनों ही घटनाओं के बाद किसी जिम्मेदार पदाधिकारी के विरुद्ध कोई कार्रवाई न होने से महकमे में अब चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। मामले में अधिकारी भी अभी कुछ भी साफ तौर पर बोलना नहीं चाहते। कार्रवाई के बारे में अभी तक कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है।
पुलिस लाइन में खुद पुलिसकर्मी और आम जनता असुरक्षित है। बीते एक माह में दो बड़ी वारदातों ने जहां सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है, वहीं इनके बाद भी कोई कार्रवाई न होने से महकमे में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
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स्कूल से घर जाते समय लापता हुई छह साल की बच्ची का शव 11 अगस्त को पुलिस लाइन में आरआई के आवास के पीछे खेत में पड़ा मिला था। बालिका के साथ परिसर में बने प्रतीक्षालय के बाहर दुष्कर्म व कुकर्म करने के बाद गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। इसके खुलासे में जो आरोपी सामने आया था। वह मानसिक रूप से कमजोर था और टाफी का लालच देकर मासूम के साथ दरिंदगी के बाद हत्या कर दी थी।
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पुलिस लाइन परिसर में बने आरटीसी भवन के बाथरूम में दरोगा राधारमण का शव मिलने से सनसनी फैल गई। पहले तो घटना को पुलिस आत्महत्या मानती रही। मगर जब कानपुर में तैनात थाना बेवर क्षेत्र के गांव गढिया घुटारा निवासी आरोपी सत्यप्रकाश यादव मृतक के मोबाइल के साथ गिरफ्त में आया तो जांच की दिशा ही बदल गई।
सिपाही ने नशे में धुत होकर दरोगा की गला दबाकर हत्या करने का जुर्म कबूल किया था। इस कबूलनामे के बाद पुलिस ने उसे चालान कर जेल भेज दिया था। दरोगा की हत्या के साथ ही तीसरी घटना एक बैरक से एक दरोगा के 10 हजार रुपये चोरी की घटना भी हुई थी। मगर पीड़ित की ओर से थाने में कोई तहरीर नहीं दी गई।
तीनों ही घटनाओं के बाद किसी जिम्मेदार पदाधिकारी के विरुद्ध कोई कार्रवाई न होने से महकमे में अब चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। मामले में अधिकारी भी अभी कुछ भी साफ तौर पर बोलना नहीं चाहते। कार्रवाई के बारे में अभी तक कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है।