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गड़बड़ी मिलने पर चार स्कूली बसें सीज
Updated Tue, 05 Sep 2017 12:15 AM IST
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स्कूल बस
- फोटो : amar ujala
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मैनपुरी। स्कूल संचालक बच्चों को लेकर अपनी काई भी जिम्मेदारी नहीं समझ रहे है। इतना ही नहीं उन्होंने स्कूल की बसों में मानक के अनुरूप कोई भी व्यवस्था नहीं की है। स्कूल संचालकों व स्कूल बस ड्राइवरों में कोई सुधार नहीं हो रहा। सोमवार को परिवहन विभाग ने चेकिंग अभियान के तहत चार स्कूल बसों को सीज कर दिया गया।
पीटीओ कौशलेन्द्र यादव ने बताया कि इस दौरान करहल में ज्ञानस्थली की बस व बरनाहल में दीपू मेमोरियल स्कूल की बिना दस्तावेजों के सीज की गई। वहीं मैनपुरी और नवाखेड़ा के स्कूलों की बस को भी बिना पंजीकरण के सीज किया गया। उन्होंने कहा कि यदि कोई स्कूल संचालक स्कूल बस का किराया ले रहा है तो वह उपभोक्ता के दायरे में आ जाता है।इस दिशा में बच्चों के अभिभावक जागरूक नहीं है।
वहीं स्कूल संचालकों ने स्कूल बसों में अग्निशमन यंत्र नहीं लगाए है लेकिन यह यंत्र बच्चों की सुविधा के लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में अब चेकिंग के दौरान जिले के सभी अधिकारियों को भी जोड़ा जाएगा। इसमें एसडीएम, सीओ, डीआईओएस व बीएसए आदि प्रमुख रहेंगे।
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स्कूल के लिए परिवहन विभाग ने कई प्रकार के मानक तय किए है। स्कूल गाड़ी की फिटनेस ठीक होनी चाहिए। स्कूल गाड़ी का हर साल एआरटीओ ऑफिस में आकर चेक कराना पड़ता है। विभाग के द्वारा ही यह तय किया जाता है कि गाड़ी एक साल तक सुरक्षित सफर कर सकती है या नहीं। गाड़ी के सभी दस्तावेज पूरे होने चाहिए।
वहीं प्रदूषण प्रमाण पत्र भी हासिल होना जरूरी है। गाड़ी पीले रंग की होनी चाहिए। इस पर आगे व पीछे स्कूल बस लिखा होना चाहिए। वहीं प्रधानाचार्य का नंबर भी लिखा होना चाहिए। वहीं सीट बेल्ट पहनकर गाड़ी चलानी चाहिए। गाड़ी में अगिभनशमन यंत्र और मेडिकल किट भी होनी चाहिए। गाड़ी पीले रंग की होनी चाहिए वहीं गाड़ी में रिफ्लेक्टर लगा होना चाहिए।
स्कूल संचालकों की लापरवाही से पहले भी कई घटनाएं हो चुकी है। पिछले महीने में पैराडाइज स्कूल की बस करहल रोड पर डिवाइडर पर चढ़ गई थी। इसके बाद ड्राइवर मौके से फरार हो गया था। स्थानीय लोगों की मदद से बच्चों को बस से उतारा गया था। वहीं एक प्राइवेट वैन में सेंट थोमस स्कूल के बच्चों को ले जाते समय अइाग लग गई थी। गनीमत रही कि इसमें भी कोई बच्चा हताहत नहीं हुआ था।
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पीटीओ कौशलेन्द्र यादव ने बताया कि इस दौरान करहल में ज्ञानस्थली की बस व बरनाहल में दीपू मेमोरियल स्कूल की बिना दस्तावेजों के सीज की गई। वहीं मैनपुरी और नवाखेड़ा के स्कूलों की बस को भी बिना पंजीकरण के सीज किया गया। उन्होंने कहा कि यदि कोई स्कूल संचालक स्कूल बस का किराया ले रहा है तो वह उपभोक्ता के दायरे में आ जाता है।इस दिशा में बच्चों के अभिभावक जागरूक नहीं है।
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वहीं स्कूल संचालकों ने स्कूल बसों में अग्निशमन यंत्र नहीं लगाए है लेकिन यह यंत्र बच्चों की सुविधा के लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में अब चेकिंग के दौरान जिले के सभी अधिकारियों को भी जोड़ा जाएगा। इसमें एसडीएम, सीओ, डीआईओएस व बीएसए आदि प्रमुख रहेंगे।
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स्कूल के लिए परिवहन विभाग ने कई प्रकार के मानक तय किए है। स्कूल गाड़ी की फिटनेस ठीक होनी चाहिए। स्कूल गाड़ी का हर साल एआरटीओ ऑफिस में आकर चेक कराना पड़ता है। विभाग के द्वारा ही यह तय किया जाता है कि गाड़ी एक साल तक सुरक्षित सफर कर सकती है या नहीं। गाड़ी के सभी दस्तावेज पूरे होने चाहिए।
वहीं प्रदूषण प्रमाण पत्र भी हासिल होना जरूरी है। गाड़ी पीले रंग की होनी चाहिए। इस पर आगे व पीछे स्कूल बस लिखा होना चाहिए। वहीं प्रधानाचार्य का नंबर भी लिखा होना चाहिए। वहीं सीट बेल्ट पहनकर गाड़ी चलानी चाहिए। गाड़ी में अगिभनशमन यंत्र और मेडिकल किट भी होनी चाहिए। गाड़ी पीले रंग की होनी चाहिए वहीं गाड़ी में रिफ्लेक्टर लगा होना चाहिए।
स्कूल संचालकों की लापरवाही से पहले भी कई घटनाएं हो चुकी है। पिछले महीने में पैराडाइज स्कूल की बस करहल रोड पर डिवाइडर पर चढ़ गई थी। इसके बाद ड्राइवर मौके से फरार हो गया था। स्थानीय लोगों की मदद से बच्चों को बस से उतारा गया था। वहीं एक प्राइवेट वैन में सेंट थोमस स्कूल के बच्चों को ले जाते समय अइाग लग गई थी। गनीमत रही कि इसमें भी कोई बच्चा हताहत नहीं हुआ था।