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वो भयावह दिन: अस्पतालों ने चस्पा किए थे नो ऑक्सीजन के नोटिस, तब 20 हुए थे डिबार
Wed, 09 Jun 2021 11:00 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 09 Jun 2021 11:00 AM IST
सार
अस्पतालों ने नो ऑक्सीजन के नोटिस चस्पा किए थे। मरीज भर्ती करना बंद कर दिया था। मरीजों को जबरन डिस्चार्ज किया जाने लगा। तब जिला प्रशासन ने 20 कोविड अस्पतालों को उपचार सूची से डिबार किया था।
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अस्पताल के गेट पर चस्पा ऑक्सीजन खत्म होने का नोटिस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जब दूसरी लहर चरम पर थी तब ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे अस्पतालों ने नो ऑक्सीजन के नोटिस चस्पा किए थे। मरीज भर्ती करना बंद कर दिया था। मरीजों को जबरन डिस्चार्ज किया जाने लगा। तब जिला प्रशासन ने 20 कोविड अस्पतालों को उपचार सूची से डिबार किया था। ये 19 से 30 अप्रैल का समय था। जब ताजनगरी में दूसरी लहर चरम पर थी और ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मच रहा था। उस समय आईएमए को आकस्मिक बैठक बुलाकर कहना पड़ा था कि ऑक्सीजन के लिए हमें गिड़गिड़ाना पड़ रहा है।
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जिले में तब 41 निजी कोविड हॉस्पिटल थे। जिनमें 1400 से अधिक संक्रमित भर्ती थे। 24 अप्रैल को 10 अस्पतालों ने नो-ऑक्सीजन के नोटिस चस्पा किए। फिर 26 अप्रैल को 34 अस्पतालों में जीवन रक्षक उपकरण बंद करने पड़े। वेंटिलेटर, नेजल कैनुला, बाईपेप और अन्य जीवन रक्षक उपकरणों के लिए हाईफ्लो ऑक्सीजन का संकट खड़ा हो गया। तब शहर में ऑक्सीजन की आपूर्ति लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन पर निर्भर थी। नोएडा, रांची, मोदी नगर समेत कई जगहों से ऑक्सीजन टैंकर मंगाए जा रहे थे।
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ऑक्सीजन किल्लत से तंग आकर आईएमए ने आकस्मिक बैठक बुलानी पड़ी थी। जिसमें आईएमए ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा था कि ऑक्सीजन के लिए हमें प्रशासन के सामने गिड़गिड़ाना पड़ रहा है। आईएमए ने अस्पतालों के लिए अपील जारी करनी पड़ी। जिसमें सिर्फ जरूरतमंद मरीजों को ही भर्ती करने की बात कही गई। ऑक्सीजन किल्लत के उस दौर में कई अस्पतालों ने मरीजों को डिस्चार्ज करना शुरू कर दिया था।
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मरीजों को भर्ती नहीं करने और ऑक्सीजन खत्म होने के नोटिस चस्पा करने पर जिला प्रशासन ने 27 अप्रैल को 20 कोविड अस्पतालों पर कार्रवाई करते हुए उन्होंने कोविड सूची से डिबार कर दिया था। आलम ये था कि एक भाई ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए प्लांट पर लाइन खड़ा रहा जबकि दूसरे ने ऑक्सीजन इंतजार में अस्पताल में दम तोड़ दिया। इनके कोविड के अलावा बड़ी संख्या में नॉन कोविड मरीज शामिल थे।
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