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कोरोना टीकाकरण: जानिए कैसे काम करेगी वैक्सीन, समझिए एंटीबॉडीज बनने की प्रक्रिया
Fri, 15 Jan 2021 04:47 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 15 Jan 2021 04:47 PM IST
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कोरोना वैक्सीन
- फोटो : अमर उजाला
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लोहे को लोहा ही काटता है। यह फार्मूला कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने में भी अपनाया गया। कोरोना वायरस से मुकाबला करने के लिए उसी वायरस का सहारा लिया गया जो संक्रमित कर रहा है। जिंदा वायरस को निष्क्रिय करके कोविशील्ड वैक्सीन को तैयार किया गया है। यह शरीर में पहुंचकर एंटीबॉडीज विकसित करता है। एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि चिकित्सा विज्ञानियों ने कोविशील्ड वैक्सीन में जिंदा वायरस की संक्रमण की क्षमता को खत्म कर वैक्सीन बनाई है। निष्क्रिय लेकिन जिंदा वायरस वैक्सीन के तौर पर शरीर में पहुंचकर एंटीबॉडीज बनाने के लिए उत्प्रेरित करता है।
ये भी पढ़ें- कोरोना टीकारण: वैक्सीन लगवाने के लिए तैयार है आगरा, स्वास्थ्यकर्मियों में उत्साह
दोनों डोज लेने पर ही प्रभावी होगी वैक्सीन
वैक्सीन पूरी तरह से तभी प्रभावी होगी, जब पहली डोज के बाद 28 वें दिन दूसरी डोज लगाई जाएगी। डॉ. संजय काला ने बताया कि यह वैक्सीन लगभग साढे़ चार से छह महीने में बनी है। दरअसल, सामान्यत: पांच साल वैक्सीन बनाने में लग जाते हैं, लेकिन कड़ी मेहनत से यह वैक्सीन छह महीने में बनाई गई है। वैक्सीन लगने के बाद दोबारा संक्रमण की आशंका भी है, लेकिन यह तभी संभव है जब वायरस का हैवी लोड हो। लेकिन ऐसा कम ही होगा।
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सुरक्षित है वैक्सीन... मैं परिवार को लगवा चुका हूं
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने बताया कि दोनों ही वैक्सीन बेहद सुरक्षित और कारगर हैं। वह ट्रॉयल के दौरान खुद अपने पूरे परिवार को यह वैक्सीन लगवा चुके हैं। उनके परिजनों को किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं आई। बड़ी संख्या में लोगों पर परीक्षण हुआ है। वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है।
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दोनों डोज लेने पर ही प्रभावी होगी वैक्सीन
वैक्सीन पूरी तरह से तभी प्रभावी होगी, जब पहली डोज के बाद 28 वें दिन दूसरी डोज लगाई जाएगी। डॉ. संजय काला ने बताया कि यह वैक्सीन लगभग साढे़ चार से छह महीने में बनी है। दरअसल, सामान्यत: पांच साल वैक्सीन बनाने में लग जाते हैं, लेकिन कड़ी मेहनत से यह वैक्सीन छह महीने में बनाई गई है। वैक्सीन लगने के बाद दोबारा संक्रमण की आशंका भी है, लेकिन यह तभी संभव है जब वायरस का हैवी लोड हो। लेकिन ऐसा कम ही होगा।
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सुरक्षित है वैक्सीन... मैं परिवार को लगवा चुका हूं
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने बताया कि दोनों ही वैक्सीन बेहद सुरक्षित और कारगर हैं। वह ट्रॉयल के दौरान खुद अपने पूरे परिवार को यह वैक्सीन लगवा चुके हैं। उनके परिजनों को किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं आई। बड़ी संख्या में लोगों पर परीक्षण हुआ है। वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है।
वैक्सीन लगवाने का इंतजार
एसएन मेडिकल कॉलेज में इंटर्न डॉ. बिलाल ने कहा कि 10 महीने से कोरोना से डॉक्टर जंग लड़ रहे हैं। कई की जान भी गई। अब वैक्सीन आई है तो इसे लगवाने का बेसब्री से इंतजार है। इससे बचाव होगा। मैं वैक्सीन लगवा रहा हूं।
वैक्सीन देश की उपलब्धि
एसएन मेडिकल कॉलेज में इंटर्न डॉ. हितेश चौधरी ने कहा कि वैक्सीन लगवाने में मेरा भी नाम है। दिल की कहूं तो देश ने कम समय में कारगर वैक्सीन बनाकर दुनियाभर में धाक जमाई है। यह देश की उपलब्धि है, इस पर सभी को गर्व होना चाहिए
एसएन मेडिकल कॉलेज में इंटर्न डॉ. बिलाल ने कहा कि 10 महीने से कोरोना से डॉक्टर जंग लड़ रहे हैं। कई की जान भी गई। अब वैक्सीन आई है तो इसे लगवाने का बेसब्री से इंतजार है। इससे बचाव होगा। मैं वैक्सीन लगवा रहा हूं।
वैक्सीन देश की उपलब्धि
एसएन मेडिकल कॉलेज में इंटर्न डॉ. हितेश चौधरी ने कहा कि वैक्सीन लगवाने में मेरा भी नाम है। दिल की कहूं तो देश ने कम समय में कारगर वैक्सीन बनाकर दुनियाभर में धाक जमाई है। यह देश की उपलब्धि है, इस पर सभी को गर्व होना चाहिए