Agra: जूता मंडी, लेदर पार्क 'बीमार', संकट में घरेलू कारोबार; बीआईएस मानक चिह्न की अनिवार्यता से ऑर्डर प्रभावित
आगरा में जूता मंडी, लेदर पार्क 'बीमार' का स्थिति में है। इससे घरेलू कारोबार संकट में है। बीआईएस मानक चिह्न की अनिवार्यता से ऑर्डर प्रभावित हो रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश के आगरा में जिस जूता उद्योग की धमक चीन, यूरोप से लेकर दुनियाभर में फैली है, आगरा का वह जूता अब मानकों में उलझा है। बसपा सरकार में प्रोत्साहन के लिए बनीं योजनाएं भी ख्वाब बन कर रह गई। 13 साल से जूता मंडी वीरान है। लेदर पार्क 'बीमार' हैं। अब बीआईएस मानक चिह्न को लेकर फिर घरेलू कारोबार संकट से जूझ रहा है।
तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने 2008 में आगरा में जूता मंडी (प्रदर्शनी, प्रशिक्षण एवं कल्याण केंद्र) की घोषणा की। जिसका उद्देश्य एक छत के नीचे घरेलू जूता उद्यमियों के लिए कारोबार देना था। पंचकुइयां स्थित नार्मल कंपांउड में एडीए से मंडी बनाई। 2010 में लोकार्पण हुआ।
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13 साल बाद भी 147 दुकान, 22 गोदाम खाली हैं। जिन्हें अब एडीए ने ओडीओपी मार्केटिंग सेल को हस्तांरित करने का प्रस्ताव अपर मुख्य सचिव एमएसएमई व निर्यात प्रोत्साहन के लिए भेजा है। उधर, महुअर में लेदर पार्क पर 150 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
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ऐसे में अब भारतीय मानक ब्यूरो ने एक जुलाई से जूतों सहित 21 उत्पादों पर गुणवत्ता मानक चिह्न लागू कर दिया है। आगरा शू मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन वरिष्ठ उपाध्यक्ष जितेंद्र त्रिलोकानी ने बताया कि बीआईएस के कारण बड़े-बड़े ब्रांड ने माल के लिए ऑर्डर नहीं दे रहे। जिसके कारण घरेलू उद्योग प्रभावित हो रहा है।
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निर्माण का बड़ा क्षेत्र
आगरा जूता निर्माण का बड़ा क्षेत्र है। तमाम बहुराष्ट्रीय कंपनियां आगरा में माल खरीदकर बेचती हैं। बीआईएस के कारण नए ऑर्डर नहीं मिल रहे। इधर, उच्च गुणवत्ता मानक का जूता बनाने के लिए आगरा में पर्याप्त टेक्नीशियन नहीं है। आगरा जूता लघु उद्योग उत्पादक समिति अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनी का कहना है कि सरकार ने जूता निर्माण से जुड़े छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए। आगरा में हाथ से जूता बनाने का बड़ा वर्ग है।