Raid In Agra: जीएसटी की बड़ी कार्रवाई में जमा किया गया 72 लाख रुपये का टैक्स, सरेंडर की गई रकम पर उठे सवाल
आगरा में वाणिज्य कर विभाग ने पान मसाला और गुटखा कारोबारियों की 19 फर्मों के 26 ठिकानों पर कार्रवाई की थी, जिसमें सरीन एंड सरीन से 50 लाख और अन्य से 22 लाख रुपये का टैक्स जमा कराया गया है।
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आगरा में वाणिज्य कर विभाग द्वारा बुधवार को पान मसाला और गुटखा कारोबारियों पर मारे गए छापे में बृहस्पतिवार को 72 लाख रुपये का टैक्स जमा कराया गया। बृहस्पतिवार को कार्रवाई पूरी हो गई, जिसमें गोल्ड मोहर के निर्माता फ्रीगंज स्थित सरीन एंड सरीन ने 50 लाख रुपये का टैक्स जमा कराया, जबकि अन्य से 22 लाख रुपये रात में ही टैक्स जमा करा लिया गया था। कार्रवाई खत्म होने के बाद वाणिज्य कर और सीजीएसटी की टीम 19 फर्मों से मिले खातों, स्टॉक का ब्यौरा, कच्चे बिल, खरीद बिक्री के रिकार्ड और कंप्यूटर डेटा का आकलन कर वास्तविक टैक्स की गणना करेगी।
वाणिज्य कर विभाग के एडीशनल कमिश्नर ग्रेड वन अजय कुमार सिंह ने बताया कि 26 ठिकानों पर एक साथ की गई कार्रवाई में कई वित्तीय अनियमिताएं मिली हैं। टैक्स भले ही 72 लाख रुपये जमा कराया हो, पर प्रदेश से बाहर के अपंजीकृत व्यापारियों के नाम पर कच्चे माल की इंवर्ड सप्लाई प्राप्त करके इससे तैयार उत्पाद की आऊटवर्ड सप्लाई की गई। अपंजीकृत व्यापारियों को ही माल की बिक्री करते हुए टैक्स चोरी की गई है। वाणिज्य कर की विशेष अनुसंधान शाखा के संयुक्त आयुक्त केएन पाल, रवि शेखर सिंह के साथ केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर (सीजीएसटी) के एडीशनल कमिश्नर महफूजर रहमान, असिस्टेंट कमिश्नर अनिल शुक्ला, अधीक्षक संजय कुमार, अनुराग, विपिन शर्मा, कपिल, सतीश सिंह, अजय सोनकर, अरविंद परमार की टीम ने सहयोग किया।
करोड़ों की चोरी के दावे, सरेंडर महज 72 लाख रुपये
मुख्यालय के आदेश पर वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों ने गुटखा निर्माताओं और वितरकों पर जब बुधवार को छापे मारे तो इसमें कानपुर और प्रदेश के अन्य शहरों की तरह करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी मिलने के दावे किए गए। अधिकारियों ने देर रात भी कागजात देखकर यही माना था कि करोड़ों रुपये का टैक्स विभाग को मिल जाएगा, लेकिन महज 72 लाख रुपये का टैक्स लेकर कार्रवाई खत्म कर दी गई। इस पर कारोबारियों के बीच चर्चाएं और सवाल उठते रहे। सोशल मीडिया पर व्यापारियों में चर्चा रही कि जिस कारोबार पर 204 फीसदी टैक्स है, उसमें 19 फर्मों से महज 72 लाख रुपये जमा क राए गए, जबकि अन्य शहरों में यह आंकड़ा 10 से 30 करोड़ तक रहा है।