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Fraud: चीनी नागरिक को आगरा में पकड़ लेते तो नहीं होती 1400 करोड़ की ठगी, नौ दिन में 1200 लोग फंसाए

Sun, 20 Aug 2023 11:00 AM IST
धीरेन्द्र सिंह आशीष शर्मा, आगरा
आशीष शर्मा, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sun, 20 Aug 2023 11:00 AM IST
सार

2022 में गेमिंग एप दानी दाता के माध्यम से आगरा में तीन करोड़ की ठगी हुई थी। आगरा पुलिस ने इसके बाद दिल्ली के तीन साझीदारों को जेल भेजा था, लेकिन इसके बाद पुलिस टीम सुस्त पड़ गई।

 

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Chinese citizen been caught in Agra there would not have been fraud of 1400 crores
Cyber Crime - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

गुजरात में एक साल पहले ऑनलाइन फुटबॉल बेटिंग एप बनाकर 1200 लोगों से 1400 करोड़ रुपये की ठगी कर भाग जाने वाले चीनी नागरिक वू उयानबे के तार आगरा से भी जुड़े हैं। यहां ऑनलाइन गेमिंग एप दानीदाता के माध्यम से रकम कमाने का झांसा देकर 3 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की गई थी। इसमें पुलिस की जांच में चीनी नागरिक वू उयानबे का नाम आया था। हालांकि पुलिस ने उसके तीन साथियों को दिल्ली से गिरफ्तार कर जेल भेजा। मगर, कहा जा रहा है कि यदि पुलिस टीमें सतर्कता और तत्परता दिखातीं तो गुजरात की ठगी को रोका जा सकता था। चीनी नागरिक अभी तक जांच एजेंसियों की गिरफ्त से दूर है।

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आगरा में 10 जून 2022 में मामला सामने आया था। दहतोरा, सिकंदरा के अनुज कुमार ने धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धारा में केस दर्ज कराया था। एक जून को उन्होंने 1000 रुपये जमा कराए थे। एक सप्ताह बाद ही एप ने काम करना बंद कर दिया था। आगरा के कई लोगों ने इस एप में रकम जमा कराई थी। पुलिस की जांच में दिल्ली की एक बैंक खाता का पता चला। बाद में पुलिस ने दिल्ली के विजय कुमार, अंकित गोस्वामी और सिद्धार्थ गौड़ को गिरफ्तार कर जेल भेजा। उनके खाते में 3 करोड़ से ज्यादा का लेन-देन हुआ था। हालांकि पुलिस रकम बरामद नहीं कर सकी। इस ठगी के शिकार आम लोग ही नहीं पुलिसकर्मी भी थे।
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व्यापार के बहाने बनाए थे साझीदार

जांच में सामने आया था कि ऑनलाइन गेमिंग एप दानी दाता चीन के नागरिक वू उयानबे ने बनाया था। वह टूरिस्ट वीजा पर भारत आता था। चांदनी चौक में चीन का सामान बेचता था। संपर्क में बाजार के कई दुकानदार थे। उसने अंकित, सिद्धार्थ और विजय को अपना साझीदार बनाया। अंकित और विजय के नाम से फर्म बनाई। फर्म के नाम से खाता खोला। गेमिंग के जरिए जमा होने वाली रकम मर्चेंट के माध्यम से इन दोनों के खाते में पहुंचती थी। सिद्धार्थ रकम निकालता था। रकम की 25 प्रतिशत धनराशि तीनों अपने पास रखते थे। बाकी रकम वू उयानबे को मनी एक्सचेंजर से उपलब्ध करा दी जाती थी।

वह चीन में कहां का है, असली पता क्या है, यह आरोपियों को भी नहीं पता नहीं है। तमाम कोशिश के बाद भी पुलिस उसकी जानकारी नहीं जुटा सकी। गिरफ्तार तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया। थाना सिकंदरा के प्रभारी निरीक्षक आनंद कुमार शाही का कहना है कि चीनी नागरिक के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। उसकी गिरफ्तारी के बाद अलग से चार्जशीट लगाई जाएगी। दानी दाता एप से ठगी के मामले में गुजरात और महाराष्ट्र में भी मुकदमे दर्ज हुए थे।

ज्यादा स्कोर पर कम रकम

दानी दाता एप प्ले स्टोर पर उपलब्ध था। मोबाइल पर डाउनलोड करने के बाद गेम शुरू होता था। शुरुआत से पहले एक निश्चित रकम प्लेयर को जमा करनी होती थी। यह रकम मर्चेंट के माध्यम से प्लेयर के खाते से दिल्ली की बैंक के खाते में जाती थी। एप एंटी स्कोरिंग बेट था, जिससे ज्यादा स्कोर होने पर कम धनराशि मिलती थी। कम स्कोर होने पर ज्यादा धनराशि मिलती थी।

केस दर्ज होते हैं...नहीं मिलती पीड़ितों को रकम

ऑनलाइन गेमिंग एप बनाकर लोगों से करोड़ों की ठगी की जा चुकी है। साइबर अपराधी भी धोखाधड़ी कर रहे हैं। आम लोगों के साथ-साथ चिकित्सक, व्यापारी, बेरोजगार, पुलिसकर्मी सभी शिकार बन चुके हैं। 1000 से लेकर एक करोड़ रुपये तक की ठगी की जा चुकी है। पुलिस केस तो दर्ज करती है लेकिन पीड़ितों को रकम वापस नहीं मिल पाती।

ईएमआई फ्री कार के नाम पर भी धोखाधड़ी

कई साल पहले आगरा में आईएमआई फ्री कार के नाम पर धोखाधड़ी की गई थी। आवास विकास कॉलोनी में कंपनी बनाकर संचालक ने लोगों से रकम जमा कराई थी। बताया गया था कि कार खरीद कर कंपनी में जोड़ दीजिए। किस्त की रकम कंपनी जमा करेगी। कुछ दिन बाद संचालक ने लोगों की किस्त जमा करना बंद कर दिया। सैकड़ों पीड़ित सामने आए। सिकंदरा पुलिस ने केस दर्ज किया था। संचालक जेल गया लेकिन पीड़ितों को रकम नहीं मिल सकी।

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