चैत्र नवरात्र रविवार से शुरू हो रहे हैं। नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाएगी। आप चाहते हैं कि आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी हों तो विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करें। ऐसा करने से मां आपकी हर मनोकामना को पूरा करेंगी। आइए जानें पूजा करने की विधि।
नवरात्र में कलश स्थापना कर मां की विशेष आराधना की जाएगी। ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण कुमार उपाध्याय बताते हैं कि रविवार को घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6.26 से 8.23 बजे तक है। इस दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इसके बाद भी पूरे दिन कभी भी घट स्थापना की जा सकती है। वहीं प्रतिपदा शाम 6.11 बजे तक जिले में रहेगी।
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- फोटो : अमर उजाला
पूजा सामग्री में चावल, सुपारी, रोली, मौली, जौ, सुगंधित पुष्प, केसर, सिंदूर, लौंग, इलायची, पान, सिंगार, सामग्री, दूध, दही, गंगाजल, शहद, शक्कर, शुद्ध घी, वस्त्र, आभूषण, बिल्व पत्र, यज्ञोपवीत, मिट्टी का कलश, मिट्टी का पात्र, दूर्बा, इत्र, चंदन, चौकी, लाल वस्त्र, धूप, दीप, नैवेद्य, अबीर, गुलाल, स्वच्छ मिट्टी, जल और ताम्र कलश को शामिल करें।
मां दुर्गा जी का चित्र स्थापित करें और पूर्वमुखी होकर उनकी चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। मां दुर्गा के बाईं ओर सफेद वस्त्र बिछा कर उस पर चावल के नौ कोष्ठक, नवग्रह, लाल वस्त्र पर गेहूं के सोलह कोष्ठ षोडशामृत बनाएं। एक मिट्टी के कलश पर स्वास्तिक बना कर उसके गले में मौली बांध कर उसके नीचे गेहूं अथवा चावल डाल कर रखें।
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फिर इसके बाद उस पर नारियल रखें। नारियल पर मौली भी बांधे। तेल का दीपक व शुद्ध घी का दीपक जलाए। मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर हल्का सा गीला करके उसमें जौ के दाने डाले, उसे चौकी के बाईं ओर कलश के पास रखें।