आगरा में छैमार गिरोह का सरगना फाती गिरफ्तार: इस गिरोह ने यूपी समेत सात राज्यों में की हैं सैकड़ों वारदात
छैमार गिरोह के सरगना फाती उर्फ कदीम का एक नाम नहीं, 12 से अधिक नाम है। नए शहर में जाते ही वह अपना नाम बदल लेता था। उसकी गिरोह में घुमंतू जाति के सैकड़ों सदस्य शामिल है। एसटीएफ का दावा है कि यह गिरोह अब तक सैकड़ों वारदात कर चुका है।
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एसटीएफ आगरा यूनिट ने बुधवार को छैमार गिरोह के सरगना फाती उर्फ कदीम को गिरफ्तार किया है। उसके एक या दो नहीं बल्कि, 12 से अधिक नाम हैं। वह किसी नए शहर में जाते ही अपना नया नाम रख लेता है। उसके गैंग में घुमंतू जाति के सैकड़ों सदस्य शामिल है। शहरों में डेरा जमाकर वारदात करता है। उसके खिलाफ 15 मुकदमों की जानकारी मिली है। इनमें डकैती के दौरान हत्या के भी हैं। उस पर जौनपुर पुलिस ने 25 हजार का इनाम घोषित किया था।
एसटीएफ के निरीक्षक उदय प्रताप सिंह को सूचना मिली थी कि छैमार गिरोह आगरा में डेरा डालने की फिराक में है। गैंग का सरगना फाती उर्फ कदीम उर्फ अशद खान उर्फ बबलू उर्फ मोनिस आगरा में आ चुका है। इस पर टीम लग गई। बुधवार को उसे ट्रांसपोर्ट नगर से गिरफ्तार कर लिया।
फाती को वर्ष 2016 में एसटीएफ लखनऊ यूनिट ने गिरफ्तार किया था। उसे जेल भेजा गया था। उसने फर्जी जमानतदार लगाए थे। जेल से बाहर आने के बाद फरार हो गया। उसके जमानतदार भी नहीं मिल पा रहे थे। उसके खिलाफ जौनपुर में गैंगस्टर का मुकदमा दर्ज हुआ था।
उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। फाती हाल में हापुड़ के थाना गढ़ स्थित गांव दौतई में रह रहा था। मूलरूप से कन्नौज के थाना तिर्वा स्थित बिनौरा का रहने वाला है। उसके पास से तमंचा, दो कारतूस और 550 रुपये बरामद किए गए।
फर्जी जमानतदार लगाकर जेल से आया था बाहर
एसटीएफ की पूछताछ में सरगना फाती ने बताया कि लूट और डकैती करना खानदानी पेशा है। वह वारदात के बिना खा नहीं सकता है। जेल से बाहर आने के बाद नाम बदल लेता है। इसके लिए कागजात भी तैयार कराता है। उसके गैंग में घुमंतू जाति के अनगिनत लोग शामिल हैं। वह सदस्यों के परिवार सहित अलग राज्य के अलग-अलग जिलों में डेरा जमाकर रहते हैं।
गैंग में शामिल महिलाएं और पुरुष भीख मांगते हैं। थाली में भगवान की फोटो रखते हैं। इस दौरान ऐसे घरों को चिह्नित करते हैं, जो शहर से बाहरी इलाकों में होते हैं। रात में गैंग के 10-15 सदस्य जाकर लूट, हत्या, डकैती और दुष्कर्म की वारदात करते हैं। वारदात के बाद डेरे को कहीं और ले जाते हैं। हत्या करने वाले को ज्यादा पैसा मिलता था।
नए शहर में पहुंचते ही बदल लेता है नाम और पता
एसटीएफ का दावा है कि छैमार गिरोह दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा, झारखंड में सैकड़ों वारदात कर चुका है। उनके गैंग के किसी सदस्य के पकड़े जाने पर फर्जी जमानतदार लगाकर पैरवी करके छुड़ा लेते हैं। सदस्यों के पास अलग नाम और पते के आधार कार्ड, वोटर आईडी भी होती हैं।
कई बार हत्या और लूट की वारदात का खुलासा नहीं हो पाता है। इस कारण फाती बच जाता है। उसे खुद याद नहीं है कि कितनी वारदात कर चुका है। सभी मुकदमों में उसके नाम भी अलग हैं। एसटीएफ आरोपी पर दर्ज अन्य मुकदमों की जानकारी कर रही है।