हिंसा की साजिश का मामला: मथुरा जेल में बंद सीएफआई सदस्य कप्पन की जमानत अर्जी खारिज
सिद्दीक कप्पन केरल का पत्रकार है। हाथरस कांड के बाद थाना मांट पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था।
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मथुरा जेल में बंद कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) के सदस्य सिद्दीक कप्पन की जमानत अर्जी मंगलवार को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (एडीजे) प्रथम की अदालत ने खारिज कर दी। उसकी जमानत पर सोमवार को भी सुनवाई हुई थी। इस दौरान बचाव पक्ष के सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखा।
सिद्दीक कप्पन को उसके साथी मसूद अहमद, मोहम्मद आलम और अतीकुर्रहमान के साथ 5 अक्तूबर 2020 को हाथरस जाते वक्त थाना मांट पुलिस ने यमुना एक्सप्रेसवे के मांट टोल प्लाजा से गिरफ्तार किया था। सीएफआई सदस्यों पर दंगा फैलाने, विदेशी फंडिंग, आईटी एक्ट और राजद्रोह जैसे संगीन आरोप लगे हैं। अप्रैल में इनके खिलाफ एसटीएफ ने चार्जशीट दाखिल की थी।
तीन आरोपियों की पहले ही खारिज हो चुकी है जमानत याचिका
सीएफआई के चार सदस्यों में से तीन की जमानत याचिका पूर्व में खारिज हो चुकी है। उन्हीं में से एक सदस्य सिद्दीक कप्पन की जमानत पर सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत में बहस चली। बहस पूरी ना होने पर मंगलवार को भी बहस हुई। कप्पन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विल्स मैथ्यू ने अपना पक्ष रखा।
उन्होंने अदालत से सद्दीक कप्पन को जमानत देने के लिए अपील की, लेकिन न्यायिक अधिकारी एडीजे प्रथम अनिल पांडे ने तीन बजे बाद जमानत की अर्जी को खारिज कर दिया। यह जानकारी देते हुए एडीजीसी सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि अदालत ने जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद कप्पन की जमानत के जमानत प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।
कप्पन अप्रैल में हो गया था कोरोना संक्रमित
21 अप्रैल को जेल में बाथरूम जाते सिद्दीक कप्पन गिर गया था। इससे उसके सिर में चोट लगी थी। जेल चिकित्सकों ने जब उसकी जांच की तो वह कोविड-19 संक्रमित पाया गया। जेल से उसे उपचार के लिए केएम मेडिकल कॉलेज भेजा गया। कोविड निगेटिव होने के बाद जेल वापस लाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 30 अप्रैल को कप्पन को दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया था। वहां पहुंचने के बाद वह फिर से कोरोना पॉजिटिव हो गया। एम्स में उसका उपचार हुआ। ठीक होने के बाद उसे दोबारा मथुरा जेल में शिफ्ट कर दिया गया।