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लाभचंद्र मार्केट: सड़क की जमीन पर खड़े कर दिए गए दो होटल, पूरा बना दीं दुकानें; जांच में हुआ बड़ा खुलासा

Wed, 06 May 2026 09:49 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Wed, 06 May 2026 09:49 AM IST
सार

आगरा के एमजी रोड स्थित लाभचंद्र मार्केट और उससे जुड़े होटल सड़क की जमीन पर बने पाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई जांच में 100 साल पुराने रिकॉर्ड से अवैध कब्जे का खुलासा हुआ, जिससे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का खतरा बढ़ गया है।

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Century-Old Maps Expose Market and Hotels Built on Public Road Land in Agra
लाभचंद्र मार्केट विवाद - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा के एमजी रोड स्थित राजामंडी बाजार में लाभचंद्र मार्केट, उसके ऊपर बने होटल धर्मलोक और चंद्रलोक सड़क की जमीन पर खड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित 12 सदस्यीय कमेटी की जांच में यह खुलासा हुआ है। वर्ष 1929 के राजस्व रिकॉर्ड से निरस्त लीज पर खड़े अवैध निर्माण के साम्राज्य की पोल खुली है। ऐसे में अब लाभचंद्र्र मार्केट में 69 दुकानों और होटल के भविष्य पर संकट के बादल गहरा रहे हैं।
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यह रिपोर्ट कमेटी ने 28 फरवरी को एडीएम प्रोटोकॉल के माध्यम से डीएम को सौंपी थी। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लाभचंद्र्र मार्केट का एक बड़ा हिस्सा उस सार्वजनिक सड़क पर बना है, जो दशकों पहले राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज थी। उपजिलाधिकारी सदर सचिन राजपूत के नेतृत्व में गठित समिति ने जांच रिपोर्ट में लिखा है कि नगर निगम की ओर से इस जमीन की लीज एक साल पहले ही निरस्त की जा चुकी है, उस पर बना निर्माण अब अवैध अतिक्रमण की श्रेणी में आता है।
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100 साल पुराने नक्शों ने दी सड़क की गवाही
सुप्रीम कोर्ट के आदेश याचिका संख्या-27640/2025 के अनुपालन में 10 फरवरी 2026 को भारी फोर्स के बीच मार्केट की पैमाइश की गई थी। जांच समिति ने वर्ष 1874 और 1923 के जीर्ण-शीर्ण अभिलेखों को पैमाइश के लिए उपयुक्त नहीं पाया। आखिरकार, वर्ष 1929-1930 की नजूल सर्वे शीट संख्या-66 को सबसे प्रामाणिक दस्तावेज माना गया, जिसमें लीज दिए जाने से पूर्व ही उक्त स्थान पर सार्वजनिक रास्ता स्पष्ट रूप से अंकित था।
 
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दुकानों के पीछे छिपी सच्चाई
जांच रिपोर्ट के अनुसार, लाभचंद्र मार्केट की दुकानों का विवरण चौंकाने वाला है। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, एमजी रोड की ओर सड़क की चौड़ाई लगभग 29.87 मीटर (98 फीट) थी। 1940 में धर्मचंद्र जैन को दो नजूल भूखंड संख्या 2032 और 2033 पट्टे पर दिए गए थे, जो वास्तव में गाटा संख्या 287 सड़क का ही हिस्सा थे। वर्ष 1947 में नगर महापालिका (अब नगर निगम) की ओर से दी गई 626.6 वर्ग गज की लीज को नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने 5 अप्रैल 2025 को ही निरस्त कर दिया था। जांच में पता चला कि दुकानों की कुल 7.80 मीटर चौड़ाई में से केवल 3 से 4.88 मीटर हिस्सा ही फ्रीहोल्ड नजूल भूमि में आता है। शेष सारा निर्माण नगर निगम की उस भूमि पर है, जिसकी लीज खत्म हो चुकी है और अब वह पूरी तरह से अवैध है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे सड़क मुक्त कराने के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर सड़क का चिह्नांकन कर उसे हर प्रकार के अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए, ताकि जनता के लिए रास्ता बहाल हो सके। प्रशासन ने 1907 में निर्मित आगरा कॉलेज के थॉमसन हॉस्टल को स्थायी बिंदु मानकर लाभचंद्र्र मार्केट की पैमाइश की, जिससे कब्जे की स्थिति साफ हो गई है। इस रिपोर्ट के बाद अब अवैध कब्जों पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटक रही है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि मार्केट के मध्य बिंदु तक पहुंचते-पहुंचते नजूल भूखंडों की चौड़ाई शून्य हो जाती है, यानी वहां बना पूरा ढांचा ही सड़क की जमीन पर है।
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