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Agra News: भोजन की नली में था कैंसर, 7 घंटे ऑपरेशन से बची जान
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आगरा।
एसएन मेडिकल कॉलेज में भोजन की नली का जटिल सर्जरी कर जान बचाई है। ये ऑपरेशन सात घंटे चला। मरीज की हालत ठीक होने पर उसे डिस्चार्ज कर दिया है।
सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की डॉ. लवीना बालानी ने बताया कि 69 साल की वृद्धा को भोजन निगलने में परेशानी होने पर एसएन में दिखाया। यहां जांच कराने पर भोजन नली (इसोफेगस) में कैंसर मिला। ऐसे में टीम बनाकर मिनिमली इनवेसिव इसोफेगेक्टॉमी से सर्जरी की। इसमें भोजन नली के कैंसर वाले संक्रमित हिस्से को छोटे-छोटे चीरे लगाकर बाहर निकाला। इसमें ओपन सर्जरी के मुकाबले दर्द कम होता है। रक्तस्राव कम होता है, सर्जरी के बाद संक्रमण का खतरा भी नहीं रहता। मरीज जल्दी ठीक होता है। सर्जरी में सात घंटे का समय लगा। आईसीयू में रखने के बाद मरीज की हालत में सुधार होने पर डिस्चार्ज कर दिया है। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि निजी अस्पताल में इसका खर्च पांच लाख रुपये से अधिक है। एसएन में निशुल्क ऑपरेशन हुआ है। टीम में डॉ. अभिषेक अरोरा, डॉ. विशाल, डॉ. सचिन डॉ. मनु रहे। एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. अतिहर्ष मोहन अग्रवाल, डॉ. प्रभा, डॉ. अमृता, डॉ. हेमंत, डॉ. रवि, डॉ. वम्शी, डॉ. श्रुति ने संभाली।
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एसएन मेडिकल कॉलेज में भोजन की नली का जटिल सर्जरी कर जान बचाई है। ये ऑपरेशन सात घंटे चला। मरीज की हालत ठीक होने पर उसे डिस्चार्ज कर दिया है।
सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की डॉ. लवीना बालानी ने बताया कि 69 साल की वृद्धा को भोजन निगलने में परेशानी होने पर एसएन में दिखाया। यहां जांच कराने पर भोजन नली (इसोफेगस) में कैंसर मिला। ऐसे में टीम बनाकर मिनिमली इनवेसिव इसोफेगेक्टॉमी से सर्जरी की। इसमें भोजन नली के कैंसर वाले संक्रमित हिस्से को छोटे-छोटे चीरे लगाकर बाहर निकाला। इसमें ओपन सर्जरी के मुकाबले दर्द कम होता है। रक्तस्राव कम होता है, सर्जरी के बाद संक्रमण का खतरा भी नहीं रहता। मरीज जल्दी ठीक होता है। सर्जरी में सात घंटे का समय लगा। आईसीयू में रखने के बाद मरीज की हालत में सुधार होने पर डिस्चार्ज कर दिया है। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि निजी अस्पताल में इसका खर्च पांच लाख रुपये से अधिक है। एसएन में निशुल्क ऑपरेशन हुआ है। टीम में डॉ. अभिषेक अरोरा, डॉ. विशाल, डॉ. सचिन डॉ. मनु रहे। एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. अतिहर्ष मोहन अग्रवाल, डॉ. प्रभा, डॉ. अमृता, डॉ. हेमंत, डॉ. रवि, डॉ. वम्शी, डॉ. श्रुति ने संभाली।