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टूरिस्ट परमिट की आड़ में सवारियां ढो रहीं बसें
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मैनपुरी। जिले में भी बस माफिया रोडवेज को लाखों का चूना लगा रहे हैं। प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर डंके की चोट पर माफिया नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इन बसों में नियमों की भी जमकर धज्ज्यिां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार मौन हैं। जब भी कोई हादसा होता है तभी प्रशासन की नींद टूटती है।
मैनपुरी से दिल्ली, जयपुर, सोनीपत, प्रयागराज, बनारस और लखनऊ के लिए निजी बसों का संचालन होता है। टूरिस्ट परमिट की आड़ में ये बसें लंबी दूरी की सवारियां ढोने का काम कर रही हैं। जिले से रोजाना 15 से बीस साधारण व स्लीपर बसों का संचालन हो रहा है। ये बसें ईशन नदी पुल, रेलवे स्टेशन और करहल चौराहे से सवारियां बैठाती हैं। इससे एक ओर जहां रोडवेज को राजस्व का नुकसान हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर नियमों का भी खुला उल्लंघन किया जा रहा है। लेकिन माफिया के आगे सब बेबस हैं। डंके की चोट पर रोजाना ये बसें सवारियों को लाने और ले जाने का काम करती हैं, लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। इन बसों के लिए स्टेज कैरिज परमिट अनिवार्य है, लेकिन केवल टूरिस्ट परमिट लेकर ही इनके द्वारा सवारियां ढोई जा रही हैं। नियमानुसार ये अवैध है और बस सीज होने के साथ ही मालिक पर मुकदमा कराने का प्रावधान है, लेकिन बस माफिया पर कार्रवाई करने के लिए आखे आगे कौन आए।
इसलिए नहीं लेते स्टेज कैरिज परमिट
अलग-अलग स्थानों से सवारियां बैठाने के लिए स्टेज कैरिज परमिट लेना अनिवार्य है। लेकिन बस संचालकों द्वारा टूरिस्ट परमिट ही लिया जाता है। इसके पीछे कारण ये है कि स्टेज कैरिज परमिट पर अलग-अलग जगह से तो सवारियां बैठाई जा सकती हैं, लेकिन ये परमिट एक नियत क्षेत्र 20 से 25 किलोमीटर के लिए ही दिया जाता है। इसी क्षेत्र में बस का संचालन किया जा सकता है। वहीं टूरिस्ट परमिट पर बस कहीं भी ले जाई जा सकती है, लेकिन इसमें केवल एक ही स्थान से सवारियां लेने की बाध्यता है।
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किशनी में बस हादसे के बाद चला था अभियान
23 जून 2019 को किशनी थाना क्षेत्र में औरैया से दिल्ली जा रही स्लीपर बस पलट गई थी। इसमें एक महिला व बच्ची की मौत हो गई थी। इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी पीके उपाध्याय व एसपी अजय शंकर राय ने बसों के खिलाफ अभियान चलाया था। इसमें कई बस संचालकों पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन बाद में सब ठंडे बस्ते में चला गया।
नियम विरुद्ध बसों का संचालन करने वालों पर समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
कौशलेंद्र सिंह, यात्री कर अधिकारी।
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मैनपुरी से दिल्ली, जयपुर, सोनीपत, प्रयागराज, बनारस और लखनऊ के लिए निजी बसों का संचालन होता है। टूरिस्ट परमिट की आड़ में ये बसें लंबी दूरी की सवारियां ढोने का काम कर रही हैं। जिले से रोजाना 15 से बीस साधारण व स्लीपर बसों का संचालन हो रहा है। ये बसें ईशन नदी पुल, रेलवे स्टेशन और करहल चौराहे से सवारियां बैठाती हैं। इससे एक ओर जहां रोडवेज को राजस्व का नुकसान हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर नियमों का भी खुला उल्लंघन किया जा रहा है। लेकिन माफिया के आगे सब बेबस हैं। डंके की चोट पर रोजाना ये बसें सवारियों को लाने और ले जाने का काम करती हैं, लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। इन बसों के लिए स्टेज कैरिज परमिट अनिवार्य है, लेकिन केवल टूरिस्ट परमिट लेकर ही इनके द्वारा सवारियां ढोई जा रही हैं। नियमानुसार ये अवैध है और बस सीज होने के साथ ही मालिक पर मुकदमा कराने का प्रावधान है, लेकिन बस माफिया पर कार्रवाई करने के लिए आखे आगे कौन आए।
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इसलिए नहीं लेते स्टेज कैरिज परमिट
अलग-अलग स्थानों से सवारियां बैठाने के लिए स्टेज कैरिज परमिट लेना अनिवार्य है। लेकिन बस संचालकों द्वारा टूरिस्ट परमिट ही लिया जाता है। इसके पीछे कारण ये है कि स्टेज कैरिज परमिट पर अलग-अलग जगह से तो सवारियां बैठाई जा सकती हैं, लेकिन ये परमिट एक नियत क्षेत्र 20 से 25 किलोमीटर के लिए ही दिया जाता है। इसी क्षेत्र में बस का संचालन किया जा सकता है। वहीं टूरिस्ट परमिट पर बस कहीं भी ले जाई जा सकती है, लेकिन इसमें केवल एक ही स्थान से सवारियां लेने की बाध्यता है।
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किशनी में बस हादसे के बाद चला था अभियान
23 जून 2019 को किशनी थाना क्षेत्र में औरैया से दिल्ली जा रही स्लीपर बस पलट गई थी। इसमें एक महिला व बच्ची की मौत हो गई थी। इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी पीके उपाध्याय व एसपी अजय शंकर राय ने बसों के खिलाफ अभियान चलाया था। इसमें कई बस संचालकों पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन बाद में सब ठंडे बस्ते में चला गया।
नियम विरुद्ध बसों का संचालन करने वालों पर समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
कौशलेंद्र सिंह, यात्री कर अधिकारी।