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जेल में बंदी की कलम से उभरी 'ख्वाहिशें' कवर पेज का हुआ विमोचन
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कासगंज में जेल बंदी की पुस्तक ख्वाइशें के कवर पेज का विमोचन करते प्रभारी जेलर व प्रदीप रघुनंदन
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। जेल में निरुद्ध बंदी कविता, कहानी, गजल और निबंध लिख रहे हैं। इनमें वे अपनी मानसिक स्थिति, जीवन के पहलुओं का चित्रण कर रहे हैं। बंदी की मंसूर हसन के कविता संग्रह ‘ख्वाहिशें’ के कवर पेज का प्रभारी जेल अधीक्षक व राष्ट्रीय युवा शक्ति प्रमुख ने रविवार को विमोचन किया गया।
जेल सुधारों के क्षेत्र में कार्य कर रहे राष्ट्रीय युवा शक्ति के प्रमुख प्रदीप रघुनंदन ने बताया कि वह ऐसेही बंदियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। उनकी रचनाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा हैं। जनपद की जेल में निरुद्ध बंदी मंसूर हसन की 50 कविताओं का संग्रह ‘ख्वाहिशें’ जीवन के विभिन्न रंगों को प्रतिबिंबित करता है।
कविताओं में जीवन की मुश्किलों का चित्रण है, वहीं राष्ट्र प्रेम का भी उद्घोष करती हैं।
प्रभारी जेल अधीक्षक राजीव कुमार ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है। साहित्य मानव की सोच में परिवर्तन कर रचनात्मक प्रवृत्ति की ओर ले जाता है। यह स्थिति जेलों के लिए सुखद है। विमोचन के मौके पर जेल के सभी कर्मियों व बंदियों ने खुशी का इजहार किया। इस दौरान उप जेलर एके सिंह सहित अन्य अधिकारी, कर्मी मौजूद रहे।
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जेल सुधारों के क्षेत्र में कार्य कर रहे राष्ट्रीय युवा शक्ति के प्रमुख प्रदीप रघुनंदन ने बताया कि वह ऐसेही बंदियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। उनकी रचनाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा हैं। जनपद की जेल में निरुद्ध बंदी मंसूर हसन की 50 कविताओं का संग्रह ‘ख्वाहिशें’ जीवन के विभिन्न रंगों को प्रतिबिंबित करता है।
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कविताओं में जीवन की मुश्किलों का चित्रण है, वहीं राष्ट्र प्रेम का भी उद्घोष करती हैं।
प्रभारी जेल अधीक्षक राजीव कुमार ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है। साहित्य मानव की सोच में परिवर्तन कर रचनात्मक प्रवृत्ति की ओर ले जाता है। यह स्थिति जेलों के लिए सुखद है। विमोचन के मौके पर जेल के सभी कर्मियों व बंदियों ने खुशी का इजहार किया। इस दौरान उप जेलर एके सिंह सहित अन्य अधिकारी, कर्मी मौजूद रहे।
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