Mathura Election Result: मांट विधानसभा से श्याम सुंदर शर्मा का मजबूत किला ढहाना नहीं था आसान, भाजपा प्रत्याशी ने इस तरह लगाई सेंध
भाजपा प्रत्याशी राजेश ने 2015 में पत्नी को ब्लॉक प्रमुख बनवाकर राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले श्याम सुंदर शर्मा के गढ़ में सेंध लगाना शुरू कर दिया था। इसके बाद वे लगातार सक्रिय रहे और जब भाजपा ने राजेश पर विश्वास जताया, तो वे श्याम सुंदर शर्मा की लगातार 8 बार की जीत का सिलसिला तोड़ने में कामयाब रहे।
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राजनीति के चाणक्य पूर्वमंत्री और मांट से आठ बार के विधायक श्याम सुंदर शर्मा का किला ढहाते हुए राजेश चौधरी विधायक निर्वाचित हो गए। साल 2015 में राजेश ने अपनी पत्नी को नौहझील ब्लॉक प्रमुख बनवाकर सेंध लगाना शुरू कर दी थी। इसके बाद उनका हौसला बढ़ता गया। इसी का नतीजा रहा कि राजेश चौधरी ने इस बार श्याम की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया।
कभी नहीं देखा पीछे मुड़कर
एबीवीपी से छात्र राजनीति में कदम रखने वाले राजेश ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। बजरंग दल से लेकर भाजयुमो में राष्ट्रीय मंत्री और प्रदेश में महामंत्री बनने के बाद अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। इसके बाद प्रदेश में भाजपा प्रवक्ता बनकर संगठन पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार के मंत्रियों से नजदीकियां होने के बाद भी संगठन में लगातार सक्रिय रहे।
धमक का कराया अहसास
चुनावी दंगल की बात करें तो राजेश ने पत्नी सुमन को साल 2015 और 2021 में नौहझील का ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित करवाया। श्यामसुंदर शर्मा के गण में राजेश चौधरी की इस दस्तक के साथ ही उन्होंने राजनितिक पंडितों को अपनी धमक का अहसास करवा दिया था। इसी से उनके विधायक बनने की राह भी आसान हो गई थी।
जनता पर बनाई मजबूत पकड़
वह लगातार जनता में पकड़ बनाते रहे। इसी के बल पर भाजपा ने भी उन पर विश्वास जताया और पहली बार चुनावी मैदान में राजेश ने मांट विधानसभा से ताल ठोंकी। 10 मार्च को मतगणना के परिणाम में राजेश के विधायक निर्वाचित होने के साथ ही पूर्वमंत्री का किला ढह गया। हालांकि लगातार पूर्व मंत्री इस विधानसभा से जीतते आ रहे थे।
लाल चौक पर झंडा फहराने वाली टीम में थे
छात्र राजनीति से शुरूआत करने वाले राजेश ने छात्र आंदोलन किए। बजरंग दल में रहते हुए गोतस्करों से गोवंशों को आजाद करवाया। भाजयुमो में रहते हुए 1992 में जब मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराया गया, तब राजेश चौधरी भी इस टीम का हिस्सा रहे थे। नवनिर्वाचित विधायक का कहना है कि मांट की जनता के विश्वास पर वह खरे उतरेंगे।
हर दल में पैठ रखते हैं श्याम
दिल्ली से लेकर लखनऊ तक पिछले करीब 35 साल से राजनीतिक चर्चा होती रही कि श्याम के सामने किसी को भी प्रत्याशी बनाओ, हार ही मिलेगी। क्योंकि राजनीतिक दांव-पेंच में माहिर श्याम की काट किसी के पास नहीं थी। जानकार कहते हैं कि श्याम खुद तो चुनाव लड़ते ही हैं, विधान सभा चुनाव में मांट से किसको टिकट मिलनी चाहिए, उसमें भी दखल होता था, क्योंकि श्याम की पैठ हर पार्टी में रही है, लेकिन इस बार जनता धोखा दे गई और मथुरा की राजनीति के चाणक्य चारों खाने चित हो गए।