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गजब का हाल: नगर निगम के टैक्स विभाग की बड़ी लापरवाही, नामांतरण के बिना बदल दिया संपत्ति मालिक का नाम

Sat, 29 Mar 2025 09:38 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 29 Mar 2025 09:38 AM IST
सार

नगर निगम के टैक्स विभाग की गड़बड़ी से बुजुर्ग महिला परेशान हैं। नगर निगम ने नामांतरण के बिना संपत्ति मालिक का नाम बदल दिया। एक संपत्ति संख्या, एक ही रसीद नंबर पर दो अलग अलग नाम चढ़ा दिए हैं। 
 

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Big negligence of Municipal Corporation's Tax Department changed  name of property owner without transfer
नगर निगम आगरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा नगर निगम के टैक्स विभाग की गड़बड़ी ने बुजुर्ग महिला को परेशान कर दिया। वजीरपुरा के राजेंद्र प्रसाद उपाध्याय के नाम पर दर्ज भवन का मालिक नामांतरण के बिना बदल दिया गया। एक साल पहले टैक्स रसीद में नाम बदलने का खेल हुआ है। बुजुर्ग महिला निगम के अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
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वजीरपुरा की संपत्ति संख्या 11/13/27 और भवन संख्या 23/446 बी/3 राजेंद्र प्रसाद उपाध्याय के नाम पर है। 16 सितंबर 2021 को 1129 रुपये का टैक्स जमा किया गया, जिसकी रसीद में राजेंद्र प्रसाद उपाध्याय का नाम है, लेकिन दो साल बाद 19 जून 2023 को एक और रसीद सामने आई, जिसमें संपत्ति का मालिक डॉ. अरिंजय जैन को बताया गया। राजेंद्र प्रसाद उपाध्याय की पत्नी टैक्स अधिकारियों से नाम परिवर्तन की वजह पूछ रही है लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा। मार्च में टैक्स जमा करने वाले अधिकतर लोग रसीदों में नाम की गड़बड़ियों को लेकर परेशान घूम रहे हैं। हेल्प डेस्क न होने इधर से उधर चक्कर काटने पड़ते है।

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मोतीकटरा में बदल दिया था मालिक
नगर निगम के टैक्स विभाग की यह करतूत नई नहीं है, बल्कि पूर्व में एक पार्षद के रिश्तेदार के घर पर भी टैक्स विभाग ने यही किया था। मामला पूर्व मेयर नवीन जैन के सामने रखा गया तो कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। पार्षद रवि बिहारी माथुर का कहना है कि  टैक्स विभाग के अधिकारी जानबूझकर लोगों को परेशान कर रहे है। समस्या का समाधान के स्थान पर लोगों को उलझाया जाता है। कैंप लगाने की जरूरत है। हेल्प डेस्क बनाई जाए, जिससे तत्काल निदान मिले। इस मामले में नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने बताया कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। एक ही पते पर दो नाम कैसे चल रहे हैं। पत्रावली देखने के बाद कुछ बता पाना मुमकिन होगा।

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