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अपर्णा रिवर व्यू, मंगलम शिला में सीलिंग
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 28 May 2015 02:01 AM IST
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में यमुना के लिए खतरा बताए गए निर्माणों में पुष्पांजलि के दो प्रोजेक्टों के बाद मंगलम शिला और अपर्णा रिवर व्यू आवासीय योजनाओं में एडीए ने सीलिंग की कार्रवाई की। इमारतों के निर्माण में भी पर्यावरण के मानकों का उल्लंघन किया गया था। साथ ही मानचित्र में भी गड़बड़ी पाई गई है। अपर्णा रिवर व्यू की 11वीं मंजिल सील गई है।
आगरा विकास प्राधिकरण के उपसचिव जगदीश यादव ने बताया कि केंद्रीय हिंदी संस्थान रोड पर नगला बूढ़ी के पास अपर्णा रिवर व्यू इमारत के निर्माणकर्ता आशीष मंगल प्राधिकरण के समक्ष एन्वायरमेंटल इम्पैक्ट एसिस्मेंट सर्टिफिकेट प्रस्तुत नहीं कर सके। उन्होंने बताया कि पास ही स्थिति जेके मंगल की मंगलम शिला इमारत का भी पर्यावरणीय एनओसी नहीं था। उनके मानचित्र में भी कुछ गड़बड़ी पाई गई है। एनओसी प्रस्तुत करने की दशा में सील खोली जा सकती है। कार्रवाई के दौरान प्रवर्तन प्रभारी राजीव दीक्षित, अवर अभियंता सोनी और उदयवीर आदि मौजूद रहे। गौरतलब है कि अमर उजाला ने बुधवार के अंक में अपर्णा रिवर व्यू में बरती गई अनियमितताओं का खुलासा किया था। इस इमारत में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से 27 मीटर निर्माण के लिए एनओसी ली गई थी। एडीए ने इसका नक्शा पास कर दिया था। दो साल बाद बिल्डर ने इसके एक्सटेंशन के लिए एडीए में फिर से आवेदन कर दिया। बिल्डर ने इस बार इसकी ऊंचाई 35 मीटर रखी। मगर एक्सटेंशन के आवेदन के साथ 27 मीटर के निर्माण वाली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी लगा दी।
दीवार बनाए एडीए
यमुना के डूब क्षेत्र में की जा रही तोड़फोड़ के विरोध में आगरा डूब क्षेत्र बचाओ मोर्चा खड़ा हो गया है। मोर्चा संयोजक राजकुमार पथिक और अध्यक्ष चंद्रशेखर शर्मा का कहना है कि प्राधिकरण की कार्रवाई से जनता में रोष है। लोगों ने जो निर्माण कराए हैं, उनके नक्शे एडीए ने ही पास किए हैं। विकास शुल्क अदा किया है। अब जो मकान बन चुके हैं उन्हें तोड़ने से कोई लाभ नहीं है। यमुना के डूब क्षेत्र में भविष्य में कोई निर्माण न होने दिए जाएं। इसके लिए एडीए आबादी और यमुना के डूब क्षेत्र के बीच दीवार बनाए। उन्होंने कहा कि जनहित याचिका दायर की जाएगी।
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आगरा विकास प्राधिकरण के उपसचिव जगदीश यादव ने बताया कि केंद्रीय हिंदी संस्थान रोड पर नगला बूढ़ी के पास अपर्णा रिवर व्यू इमारत के निर्माणकर्ता आशीष मंगल प्राधिकरण के समक्ष एन्वायरमेंटल इम्पैक्ट एसिस्मेंट सर्टिफिकेट प्रस्तुत नहीं कर सके। उन्होंने बताया कि पास ही स्थिति जेके मंगल की मंगलम शिला इमारत का भी पर्यावरणीय एनओसी नहीं था। उनके मानचित्र में भी कुछ गड़बड़ी पाई गई है। एनओसी प्रस्तुत करने की दशा में सील खोली जा सकती है। कार्रवाई के दौरान प्रवर्तन प्रभारी राजीव दीक्षित, अवर अभियंता सोनी और उदयवीर आदि मौजूद रहे। गौरतलब है कि अमर उजाला ने बुधवार के अंक में अपर्णा रिवर व्यू में बरती गई अनियमितताओं का खुलासा किया था। इस इमारत में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से 27 मीटर निर्माण के लिए एनओसी ली गई थी। एडीए ने इसका नक्शा पास कर दिया था। दो साल बाद बिल्डर ने इसके एक्सटेंशन के लिए एडीए में फिर से आवेदन कर दिया। बिल्डर ने इस बार इसकी ऊंचाई 35 मीटर रखी। मगर एक्सटेंशन के आवेदन के साथ 27 मीटर के निर्माण वाली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी लगा दी।
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दीवार बनाए एडीए
यमुना के डूब क्षेत्र में की जा रही तोड़फोड़ के विरोध में आगरा डूब क्षेत्र बचाओ मोर्चा खड़ा हो गया है। मोर्चा संयोजक राजकुमार पथिक और अध्यक्ष चंद्रशेखर शर्मा का कहना है कि प्राधिकरण की कार्रवाई से जनता में रोष है। लोगों ने जो निर्माण कराए हैं, उनके नक्शे एडीए ने ही पास किए हैं। विकास शुल्क अदा किया है। अब जो मकान बन चुके हैं उन्हें तोड़ने से कोई लाभ नहीं है। यमुना के डूब क्षेत्र में भविष्य में कोई निर्माण न होने दिए जाएं। इसके लिए एडीए आबादी और यमुना के डूब क्षेत्र के बीच दीवार बनाए। उन्होंने कहा कि जनहित याचिका दायर की जाएगी।
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