Agra: बीएएमएस की कॉपी बदलने के मामले में एक और आरोपी गिरफ्तार, विश्वविद्यालय में करता था कंप्यूटर कार्य
आरोपी अतुल कटियार विश्वविद्यालय का पूर्व कर्मचारी है। सात महीने पहले नौकरी छोड़कर जा चुका है। पुलिस की विवेचना में उसका नाम सामने आया था।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की बीएएमएस और एमबीबीएस परीक्षा में कॉपियां बदलने का काम एक बड़ा रैकेट कर रहा था। इस खेल में शामिल होकर कॉपियों के बार कोड लीक करने वाले एक पूर्व कर्मचारी को पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार किया गया। वह विश्वविद्यालय के लिए परीक्षा कार्य करने वाली एजेंसी का कंप्यूटर ऑपरेटर था। वह विद्यार्थियों की कॉपियों के बार कोड लीक कर छात्र नेता राहुल पाराशर को देता था। इसके लिए रकम लेता था। राहुल के खातों से उसके खातों में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पाया गया है।
एसपी सिटी विकास कुमार ने बताया कि पकड़ा गया आरोपी अतुल कटियार है। वह कानपुर का रहने वाला है। वह पूर्व में विश्वविद्यालय के एजेंसी में कंप्यूटर ऑपरेटर था। उसने सात महीने पहले नौकरी छोड़ दी थी। वह बार कोड कॉपियां बदलने वाले गैंग को उपलब्ध कराता था। उसके संपर्क में छात्र नेता राहुल पाराशर था। इसके लिए ऑनलाइन पैसा लेता था। उसके खाते से 10 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक के ऑनलाइन लेनदेन की जानकारी मिली है।
बार कोड से पता चलता है कॉपी किसकी
एसपी सिटी ने बताया कि छात्रों की कॉपियों पर एक बार कोड डाला जाता है। इस बार कोड से ही पता चलता है कि छात्र का नाम क्या है? किस कालेज का है? बार कोड की वजह से कॉपी जांचने वालों को छात्र और कॉलेज की जानकारी नहीं हो पाती है। मगर, एजेंसी का पूर्व कर्मचारी बार कोड लीक कर देता था, जिससे गैंग को छात्र की जानकारी मिल जाती थी। इसके बाद गैंग उससे मिलकर वह कॉपियां आसानी से बदल देते थे।
अब तक 8 की गिरफ्तारी, एक का समर्पण
बीएएमएस की कॉपियां बदलने का मामला 27 अगस्त को सामने आया था। इस मामले में थाना हरीपर्वत में मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस ने विश्वविद्यालय के टेंपो चालक देवेंद्र को जेल भेजा था। बाद में दिल्ली से डॉ. अतुल को गिरफ्तार किया गया था। एक और मुकदमा दर्ज हुआ, जिसमें 14 छात्रों की कॉपियां बदली गई थीं। इसके बाद कॉपियां लिखने वाले पुनीत और दलाल दुर्गेश की गिरफ्तारी हुई थी। जांच में एमबीबीएस की कॉपियां बदलने का मामला भी उजागर हुआ। इस पर थाना हरीपर्वत में तीसरा मुकदमा दर्ज हुआ, जिसमें 26 छात्रों की कॉपियां बदली गई थीं। मामले में एसआईटी जांच कर रही है। मुख्य आरोपी छात्र नेता राहुल पाराशर कोर्ट में समर्पण करके जेल चला गया था। चार आरोपी छलेसर स्थित फार्मेसी कॉलेज का कर्मचारी शैलेंद्र बघेल, मूल्यांकन केंद्र का कर्मचारी उमेश, भीकम सिंह और पूर्व कर्मचारी शिव कुमार दिवाकर भी पकड़े गए थे।
जिम्मेदार पर नहीं हुई कार्रवाई
पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. विनय पाठक के कार्यकाल में कॉपियां बदलने का मामला उजागर हुआ था। कर्मचारी, छात्र नेता, कॉपियां लिखने वाले, टेंपो चालक और एजेंट पकड़े गए। लेकिन कोई ऐसा नहीं पकड़ा गया जो कॉपियों को सुरक्षित रखने के लिए जिम्मेदार पद पर बैठा हो। इस खेल में बड़े लोगों की संलिप्तता की भी जानकारी पुलिस को मिली थी। बीएएमएस और एमबीबीएस की कॉपियां बदलती थीं। बार कोड लीक हो रहे थे। कॉपियां भी दी जा रही थी। मगर, किसी जिम्मेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ये उठ रहे सवाल
- बीएएमएस परीक्षा की 14 और एमबीबीएस परीक्षा की 26 कॉपियां बदली पाई गईं। इन कॉपियों के हस्तलेख का मिलाना होना था। यह कब होगा?
- जिन छात्रों की कॉपियां बदली गईं, उनकी सांठगांठ के बिना कुछ नहीं हो सकता। उन पर क्या कार्रवाई हुई?
- छात्रों ने ही कॉपियां बदलने का ठेका दिया होगा? वह बता सकते हैं कि उनके संपर्क में कौन था?