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UP: आंगनबाड़ी भर्ती में बड़ा खेल...मेरिट से लेकर आरक्षण तक में गड़बड़ियां, जांच के लिए गठित हुई कमेटी
Tue, 08 Apr 2025 09:23 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 08 Apr 2025 09:23 AM IST
सार
आंगनबाड़ी भर्ती में हुई गड़बड़ी को लेकर कलेक्ट्रेट में प्रतिदिन चार से पांच शिकायतें पहुंच रहीं हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जांच के लिए कमेटी बनाई है।
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आंगनबाड़ी में भर्ती।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
आंगनबाड़ी भर्ती में मेरिट से लेकर आरक्षण तक में गड़बड़ियां होने की आशंका है। कलेक्ट्रेट में रोज 4 से 5 शिकायतें पहुंच रही हैं। भर्तियों में चेहेतों को लाभ देने और पात्रों को अपात्र बनाने का खेल हुआ है। शिकायतों के बाद डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने जांच के लिए कमेटी बना दी है।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने जनवरी में आंगनबाड़ी केंद्रों पर आंगनबाड़ी, सहायिका व सुपरवाइजर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। जिले में करीब 10 हजार महिलाओं ने आवेदन किए। प्रत्येक केंद्र पर तीन-तीन अभ्यर्थी छांटे गए। दस्तावेज सत्यापन के बाद मार्च में नियुक्ति मिल गई।
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महिला एवं बाल विकास विभाग ने जनवरी में आंगनबाड़ी केंद्रों पर आंगनबाड़ी, सहायिका व सुपरवाइजर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। जिले में करीब 10 हजार महिलाओं ने आवेदन किए। प्रत्येक केंद्र पर तीन-तीन अभ्यर्थी छांटे गए। दस्तावेज सत्यापन के बाद मार्च में नियुक्ति मिल गई।
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सीधी नियुक्ति के लिए आवेदन से लेकर मेरिट तक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन की गई। आरोप है कि नियुक्तियों में भ्रष्टाचार हुआ। पिछले तीन दिनों में एक दर्जन से अधिक शिकायतें डीएम ऑफिस में आई हैं। डीएम ने सभी शिकायतों की जांच के निर्देश मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह को दिए हैं। सभी नियुक्तियां सिर्फ दस्तावेज सत्यापन और साक्षात्कार के आधार पर दी गईं। कोई लिखित परीक्षा नहीं आयोजित की गई। पात्रता के लिए सिर्फ हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट बनी थी।
मंत्री ने भी लगाए थे आरोप
महिला एवं बाल विकास विभाग की राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने भी आंगनबाड़ी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का पालन नहीं होने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में मंत्री ने ही अपने विभाग की पोल खोली थी। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया को शुचिता और पारदर्शिता से संपन्न कराने के निर्देश सभी डीएम को दिए थे। लेकिन, भर्ती में शामिल अभ्यर्थियों की शिकायतों से प्रक्रिया पर फिर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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महिला एवं बाल विकास विभाग की राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने भी आंगनबाड़ी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का पालन नहीं होने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में मंत्री ने ही अपने विभाग की पोल खोली थी। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया को शुचिता और पारदर्शिता से संपन्न कराने के निर्देश सभी डीएम को दिए थे। लेकिन, भर्ती में शामिल अभ्यर्थियों की शिकायतों से प्रक्रिया पर फिर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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केस-1
- नगला दूल्हे खां निवासी शिव कुमारी ने भर्ती के लिए आवेदन किया था। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मेरिट के आधार पर दस्तावेज सत्यापन हुए। आरोप है कि उनकी मेरिट अधिक होने के बाद भी कम मेरिट पर नियुक्ति कर ली गई।
केस- 2
- जगनेर, मेवली निवासी शारदा देवी ने भर्ती के लिए आवेदन किया था। दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया। उन्होंने बताया कि उनकी हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के अंक मिलाकर मेरिट 11.746 थी। आरोप है कि 11.293 वाली अभ्यर्थी को नियुक्ति मिल गई।
केस-3
- नमक की मंडी निवासी अनुसूचित वर्ग की चिंकी कर्दम ने आवेदन किया था। ओवर एज बताकर दस्तावेज सत्यापन नहीं किए। एससी वर्ग में 5 साल की छूट मिलती है। आरक्षण का लाभ भी नहीं मिला। नियुक्ति नहीं की गई।
- नगला दूल्हे खां निवासी शिव कुमारी ने भर्ती के लिए आवेदन किया था। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मेरिट के आधार पर दस्तावेज सत्यापन हुए। आरोप है कि उनकी मेरिट अधिक होने के बाद भी कम मेरिट पर नियुक्ति कर ली गई।
केस- 2
- जगनेर, मेवली निवासी शारदा देवी ने भर्ती के लिए आवेदन किया था। दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया। उन्होंने बताया कि उनकी हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के अंक मिलाकर मेरिट 11.746 थी। आरोप है कि 11.293 वाली अभ्यर्थी को नियुक्ति मिल गई।
केस-3
- नमक की मंडी निवासी अनुसूचित वर्ग की चिंकी कर्दम ने आवेदन किया था। ओवर एज बताकर दस्तावेज सत्यापन नहीं किए। एससी वर्ग में 5 साल की छूट मिलती है। आरक्षण का लाभ भी नहीं मिला। नियुक्ति नहीं की गई।