#हिंदीहैंहम: हिंदी ने बड़े मंचों पर दिलाई नई पहचान, विदेशों में भी पाया सम्मान
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मातृभाषा हिंदी को बढ़ावा देने के लिए लोग कई वर्षों से प्रयास कर रहे हैं। फिरोजाबाद में लोगों को मातृभाषा का ज्ञान बड़े मंचों तक ले आया और नई पहचान भी दिलाई है। जो अन्य भाषा में ज्ञान रखने वाले लोगों से भी ज्यादा है। सफलतम लोगों ने भी स्वीकार किया है कि जिस मुकाम तक वह पहुंचे हैं, उमसें मातृभाषा हिंदी का बड़ा योगदान है।
मंच संचालन का मौका हिंदी की बदौलत
सिरसागंज के मुकेश कुमार उपाध्याय में स्नातक के बाद हिंदी प्रेम जागा, लेकिन महाविद्यालय ने एमए में प्रवेश नहीं दिया। क्योंकि स्नातक में उनके पास हिंदी नहीं थी। पहली साल व्यक्तिगत पढ़ाई की और अच्छे अंक प्राप्त किए। अंतिम वर्ष में प्रवेश मिल गया। अपने संकाय में एनडी कॉलेज शिकोहाबाद टॉप कर हिंदी संवर्धन समिति की ओर से स्वर्णपदक पाया। फिर मुकेश ‘मणिकांचन’ के रूप में लेखन और कविता का सफर चल पड़ा। मंच संचालन पर उन्होंने मजबूत पकड़ बनाई। मातृभाषा पर अपने स्वर्णिम समय का योगदान कर प्रतिष्ठित संस्था शब्दम में हिंदी के महत्वपूर्ण कार्य किए।
विदेशों में भी पाया है हिंदी की बदौलत सम्मान
हिंदी अकादमी मारीशस समेत दो दर्जन संस्थाओं द्वारा सम्मानित शिकोहाबाद के प्रशांत उपाध्याय चार दशक से मातृभाषा के लिए समर्पित हैं। कविता कोष, नवगीत कोष जैसे कई भाषा कोष में उनका उल्लेख है। आकाशवाणी, दूरदर्शन व राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न मंचों से अपनी कविताओं से हिंदी के प्रति अभिरुचि जगा रहे हैं। पत्र-पत्रिकाओं द्वारा निजभाषा के मानक लेखन के उत्थान में लगे हैं। उन्होंने लॉकडाउन की उदासी और कुहासे के बीच ‘सृजन साक्षात्कार’ शीर्षक से सोशल मीडिया पर हिंदी प्रेमियों को जीवंत बनाए रखा। ‘शब्द’ की आंख में जंगल व गीतों में झांकते दोहे काव्य संग्रह प्रकाशित हैं।
लंबी सेवायात्रा में हिंदी सेवा रहा प्रमुख लक्ष्य
साहित्य प्रकाश दीक्षित हिंदी प्रेमियों की कड़ी में ऐसा नाम है, जिन्होंने हिंदी की सेवा के जरिये अपने नाम को सार्थक किया है। पालीवाल इंटर कॉलेज शिकोहाबाद से लेकर धातरी के भारतीय इंटर कॉलेज व श्रीमती गोमती देवी बालिका इंटर कॉलेज तक की लंबी सेवायात्रा में हिंदी सेवा उनका प्रमुख लक्ष्य रहा। 75 वर्ष की आयु में भी वे सजग रहते हैं। कवियों व साहित्यकारों की जयंती के अवसरों पर उनके द्वारा निरंतर विद्यार्थियों के बीच हिंदी प्रोत्साहन के आयोजन कराए जाते रहते हैं। साहित्य प्रकाश दीक्षित अपने क्षेत्र के साहित्यिक संगठनों के साथ जुड़कर हिंदी के लिए निरंतर कार्यरत रहते हैं।