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Agra News: शवों की नहीं करनी पड़ेगी चीरफाड़, एआई से खुलेंगे मौत के राज
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एडवांस ऑटोप्सी सेंटर। एआई
आगरा। अज्ञात शवों और अनसुलझे हत्याकांडों के रहस्यों से अब पर्दा हटेगा। आर्टिफिशयल इंटेलीजेंसी (एआई) से मौत के राज खुलेंगे। इसके लिए एसएन मेडिकल कॉलेज में एडवांस ऑटोप्सी (पोस्टमार्टम) सेंटर बन रहा है। इसमें एआई आधारित मशीनें और उपकरण लगेंगे। फोरेंसिक एक्सपर्ट भी तैयार होंगे।
इंटीग्रेटेड प्लान के तहत लेडी लॉयल परिसर में 10 मंजिला इमारत बन रही है। इसमें मेडिकल छात्रों की पढ़ाई के लिए वर्चुअल ऑटोप्सी भी होगी। इसमें बिना शरीर के चीरफाड़ के पोस्टमार्टम के तरीकों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा। यहां देशभर के फोरेंसिक एक्सपर्ट भी तैयार होंगे। इसके लिए एआई बेस्ड मशीनों और उपकरणों की खरीद होगी। प्राचार्य डाॅ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि निर्माण प्रक्रिया शुरू हो गई है। 18 महीने में बनकर तैयार हो जाएगा। इसमें वैज्ञानिक ढंग से पोस्टमार्टम होंगे, साथ ही अनसुलझे रहस्यों से भी पर्दा उठेगा। फोरेंसिक एक्सपर्ट तैयार होंगे, जो क्राइम सीन पर मौके पर जाकर जांच करेंगे।
थ्रीडी तकनीकी से पता चलेंगी अंदरूनी चोट
- फोरेंसिक विभाग की डॉ. रिचा गुप्ता ने बताया कि वर्चुअल ऑटोप्सी की सुविधा होगी, जिसमें शव की चीरफाड़ की जरूरत नहीं होगी। मशीनों के जरिये जांच हो सकेगी। थ्रीडी एक्सरे, सीटी स्कैन और एमआरआई की भी सुविधा होगी। इससे हड्डी, मुलायम ऊतकों, मस्तिष्क और शरीर के अंदरूनी चोटों की सटीक जांच हो सकेगी। इसमें एआई का भी उपयोग किया जाएगा। खास बात यह है कि जहर या केमिकल से होने वाली मौत की जांच में शव के अंगों को काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विशेष उन्नत सुई व उपकरणों से इसका पता चल सकेगा।
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डिजिटल साक्ष्य और आधुनिक मोर्चरी
- ऑटोप्सी सेंटर में आधुनिक मोर्चरी की सुविधा होगी। इसमें पोस्टमार्टम की चंद मिनटों में रिपोर्ट तैयार हो जाएगी। इससे कानूनी जांच प्रक्रिया तेज होगी। इसमें शवों के लिए आधुनिक बेहद फ्रीजर होंगे, जिसमें शवों को कई दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड होगी, जिससे संबंधित लोग इसकी जानकारी कर सकेंगे। स्कैन और रिपोर्ट पूरी तरह डिजिटल होती हैं, जिन्हें साक्ष्य के तौर पर अदालती कार्रवाई के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।
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इंटीग्रेटेड प्लान के तहत लेडी लॉयल परिसर में 10 मंजिला इमारत बन रही है। इसमें मेडिकल छात्रों की पढ़ाई के लिए वर्चुअल ऑटोप्सी भी होगी। इसमें बिना शरीर के चीरफाड़ के पोस्टमार्टम के तरीकों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा। यहां देशभर के फोरेंसिक एक्सपर्ट भी तैयार होंगे। इसके लिए एआई बेस्ड मशीनों और उपकरणों की खरीद होगी। प्राचार्य डाॅ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि निर्माण प्रक्रिया शुरू हो गई है। 18 महीने में बनकर तैयार हो जाएगा। इसमें वैज्ञानिक ढंग से पोस्टमार्टम होंगे, साथ ही अनसुलझे रहस्यों से भी पर्दा उठेगा। फोरेंसिक एक्सपर्ट तैयार होंगे, जो क्राइम सीन पर मौके पर जाकर जांच करेंगे।
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थ्रीडी तकनीकी से पता चलेंगी अंदरूनी चोट
- फोरेंसिक विभाग की डॉ. रिचा गुप्ता ने बताया कि वर्चुअल ऑटोप्सी की सुविधा होगी, जिसमें शव की चीरफाड़ की जरूरत नहीं होगी। मशीनों के जरिये जांच हो सकेगी। थ्रीडी एक्सरे, सीटी स्कैन और एमआरआई की भी सुविधा होगी। इससे हड्डी, मुलायम ऊतकों, मस्तिष्क और शरीर के अंदरूनी चोटों की सटीक जांच हो सकेगी। इसमें एआई का भी उपयोग किया जाएगा। खास बात यह है कि जहर या केमिकल से होने वाली मौत की जांच में शव के अंगों को काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विशेष उन्नत सुई व उपकरणों से इसका पता चल सकेगा।
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डिजिटल साक्ष्य और आधुनिक मोर्चरी
- ऑटोप्सी सेंटर में आधुनिक मोर्चरी की सुविधा होगी। इसमें पोस्टमार्टम की चंद मिनटों में रिपोर्ट तैयार हो जाएगी। इससे कानूनी जांच प्रक्रिया तेज होगी। इसमें शवों के लिए आधुनिक बेहद फ्रीजर होंगे, जिसमें शवों को कई दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड होगी, जिससे संबंधित लोग इसकी जानकारी कर सकेंगे। स्कैन और रिपोर्ट पूरी तरह डिजिटल होती हैं, जिन्हें साक्ष्य के तौर पर अदालती कार्रवाई के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।